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ऑपरेशन कर चार दिनों तक देखने नही आई डॉक्टर, पक गया टांका

Sun, 03 Jul 2022 10:48 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 03 Jul 2022 10:48 PM IST
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फोटो-10 गोंडा के जिला महिला अस्पताल में भर्ती प्रसूता। -संवाद - फोटो : GONDA
गोंडा। सरकारी अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का दावा खोखला साबित हो रहा है। जिला अस्पताल महिला में डॉक्टरों की मनमानी मरीजों पर भारी पड़ रही है। डॉक्टर गर्भवती का सीजेरियन प्रसव तो करा देती हैं, इसके बाद दोबारा राउंड लेकर प्रसूताओं का हाल जानना मुनासिब नहीं समझती हैं। ऐसे में कई प्रसूताओं की हालत गंभीर हो गई है, ऑपरेशन के बाद इनके टांके तक पक गए। नर्स से पूछने पर वह डॉक्टर पर ही पल्ला झाड़कर किनारा कस लेती हैं।
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जिला अस्पताल महिला में सरकारी सेवाएं सिर्फ सीजेरियन प्रसव कराने तक ही सीमित रहती है, बाकी प्रसूताओं के देखरेख को भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता। रविवार को महिला अस्पताल में भर्ती कई प्रसूताओं के तीमारदारों से बातचीत में उनका दर्द छलका। अस्पताल में तीसरे तल पर भर्ती प्रसूता रुक्मिणी शुक्ला के तीमारदार महेंद्र शुक्ल ने बताया कि उनके परिजन का गुरुवार शाम सात बजे डॉ. ज्योतिमा सिंह ने सीजेरियन प्रसव करवाया। प्रसव के बाद वार्ड में भर्ती करा दिया गया। चार दिन बीतने के बावजूद डॉक्टर ने राउंड लेकर प्रसूता का हाल जानना मुनासिब नहीं समझा। चार दिनों तक पट्टी तक नहीं बदली गई।
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वहीं सोमई ने बताया कि उनकी बहू का भी सीजेरियन आपरेशन बुधवार को हुआ था। न कोई डॉक्टर देखने आया, न ही ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स सीधे मुंह बात करती। लापरवाही से प्रसूता का टांका पक गया है। स्टाफ नर्स ने बताया कि सोमवार को डॉक्टर आएंगी तब दिखाना। ऐसे ही कई तीमारदारों ने बदहाल व्यवस्थाओं व डॉक्टरों के लापरवाही की बात कही।
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ऑपरेशन से पहले थामा देते हैं सामान की लिस्ट
- जिला महिला अस्पताल में सभी स्वास्थ्य सेवाएं मुफ्त में मिलती हैं, लेकिन हकीकत इससे इतर है। यहां सीजेरियन प्रसव कराने आए गर्भवती के तीमारदारों को सर्जिकल ग्लव्स से लेकर बेहोशी का इंजेक्शन तक खुद लाना पड़ता है। अधिकांश मंहगी दवाएं तीमारदार बाहर से ही लाते हैं। तीमारदार विवेक ने बताया यहां आपरेशन के पहले डॉक्टर जरूरी सामानों, दवाओं व इंजेक्शन की सूची थमा देते हैं। जो बाहर से खरीदकर लाने पर ही आपरेशन शुुरू होता है। आरोप है कि आपरेशन के बाद निर्धारित सुविधा शुल्क अदा करने के बाद ही वार्ड में भर्ती किया जाता है।
अस्पताल में पिछले दिनों संसाधनों की कमी थी, लेकिन अब व्यवस्था कर ली गई है। किसी भी तीमारदार को बाहर से दवाएं व इंजेक्शन खरीदने की जरूरत नहीं है। खुद हर दिन राउंड कर मरीजों व व्यवस्थाओं का जायजा लेती हूं। सभी डॉक्टरों को निर्देशित किया गया है कि हर रोज राउंड कर मरीजों का हाल जानें। डॉ. सुषमा सिंह, सीएमएस महिला अस्पताल

रेडियोलॉजिस्ट के स्थानांतरण निरस्त करने की मांग
जिला महिला अस्पताल में संबद्ध रेडियोलॉजिस्ट के स्थानांतरण को निरस्त किए जाने की मांग की गई। महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. सुषमा सिंह ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर बताया कि अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करने वाले रेडियालॉजिस्ट डॉ. एके राय का स्थानांतरण लखीमपुर खीरी जनपद में कर दिया गया है। पिछले कई वर्षों से अस्पताल में निष्ठापूर्वक अल्ट्रासाउंड कर रहे थे। उनके स्थानांतरण से अस्पताल में गर्भवती व अन्य महिलाओं का अल्ट्रासाउंड कार्य ठप हो जाएगा। मांग किया कि डॉ. अनिल कुमार राय का स्थानांतरण निरस्त कराने के लिए उचित कार्रवाई की जाय।
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