{"_id":"623b619fca626258bb283e8a","slug":"health-fraud-money-gonda-news-lko622840067","type":"story","status":"publish","title_hn":"कागजों में दौड़ रहीं 20 गाड़ियां,हर महीने लग रही 6.5 लाख की चपत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कागजों में दौड़ रहीं 20 गाड़ियां,हर महीने लग रही 6.5 लाख की चपत
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फोटो-3 गोंडा के परसपुर में बिना आरबीएसके का लोजिस्टिक लगी गाड़ी। -संवाद
- फोटो : GONDA
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गोंडा। स्वास्थ्य विभाग में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत चलने वाली गाड़ियां कटघरे में आ गई हैं। शासन के तय मानकों की अनदेखी करते हुए बिना जीपीएस लगी गाड़ियों को एनएचएम के तहत दौड़ाया जा रहा है और ठेकेदार को धड़ल्ले से भुगतान भी हो रहा है। कई गाड़ियां चल ही नहीं रहीं, और फाइलों पर फर्राटा भर रही हैं। मिलीभगत कर हर माह नियमित उनका लाखों रुपये भुगतान हो रहा है। सीएचसी के प्रभारी अधिकारियों की भूमिका भी संदेह में है, जो गाड़ियों का सत्यापन कर रहे हैं। जिले मेें 16 सीएचसी पर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 32 गाड़ियां तथा पर्यवेक्षण के लिए 16 गाड़ियां आवंटित की गई हैं। 20 गाड़ियां कागजों पर दौड़ रही हैं। ठेकेदार को छह लाख 50 हजार रुपये का भुगतान कर खेल कर लिया जाता है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत सीएचसी-पीएचसी को गाड़ियां दी गई हैं। सरकार की मंशा है कि एनएचएम की टीम गांव-देहात तक आसानी से पहुंच सके। वहां लोगों को स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ मिल सके। अकेले राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत ही जिले को 32 गाड़ियां आवंटित की गई हैं। प्रत्येक सीएचसी को एक गाड़ी मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम, तंबाकू निषेध अभियान, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के पर्यवेक्षण के लिए आवंटित की गई है, लेकिन सीएचसी अधीक्षक राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की गाड़ी को पर्यवेक्षण के लिए उपयोग में ले रहें हैं। इसके बाद भी दूसरी गाड़ी का हर महीने 32500 रुपये का भुगतान हो रहा है।
गाड़ियों में नहीं लगवाया जीपीएस
विभाग के आंखों में धूल झोंककर बिना चले गाड़ियों का भुगतान कराने के लिए शासन के निर्देश के बावजूद गाड़ियों में जीपीएस नहीं लगवाया गया। जबकि अभियान पर निगरानी और वित्तीय अनियमितता रोकने के लिए निर्देश दिया गया था कि जो भी गाड़ियां चलेंगी, सभी में जीपीएस सिस्टम होना चाहिए। जिससे उनकी लोकेशन देखी जा सके और गाड़ियां कितनी किलोमीटर चलीं, इसका पता लगाया जा सके। लेकिन ठेकेदारों से मिलकर कमीशन के चक्कर में अधिकारियों और बाबुओं ने अभियान को पलीता लगा दिया है। 20 से अधिक ऐसी गाड़ियां कागजों में चल रही हैं जिनमें जीपीएस सिस्टम ही नहीं लगा है। यह पता ही नहीं चल सकता कि गाड़ी कहां चल रही हैं, चली भी रही हैं या नहीं।
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ये है शासन का मानक, हो रही अनदेखी
-राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत जितनी भी गाड़ियां चलेंगी, सभी में जीपीएस सिस्टम होना चाहिए।
-गाड़ियां कब, कितनी दूर चलीं, कौन सी टीम गई, इसका रोजाना का रिकार्ड रखा जाएगा।
-कोई भी गाड़ी 2 साल से अधिक पुरानी नहीं होगी। साथ ही गाड़ियां कंडम हालत में न हों, इसका ध्यान रखा जाएगा।
-ठेकेदार किराए पर गाड़ी लेकर एनएचएम में नहीं देगा। बल्कि करीब 75 फीसदी गाड़ियां उसकी होनी चाहिए।
गाड़ियों के नंबर में होता खेल
विभाग गाड़ियों के नंबर में खेल करता है। एक ही गाड़ी कई सीएचसी पर भेज दी जाती है। कई योजनाओं में एक ही गाड़ी चल रही है। कागज में जरूर दिखाया जाता है कि सभी सीएचसी पर अलग-अलग नंबर की गाड़ी चल रही है।
पहचान छिपाने के लिए नहीं लगवाया पोस्टर
निगरानी और वित्तीय अनियमितता रोकने के लिए सीएमओ ने 15 मार्च को सभी सीएचसी व पीएचसी अधीक्षकों को पत्र लिखकर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत सभी अनुबंधित गाड़ियों पोस्टर एवं लॉजिस्टिक लगाने का निर्देश दिया था। इसके लिए मेसर्स मारुती नंदन काजीदेवर गोंडा को जिम्मेदारी सौंपी गई थी कि 16 मार्च दोपहर 12 बजे तक सभी गाड़ियों में पोस्टर व लॉजिस्टिक लगावाकर सूचित करें जिससे गाड़ियों की पहचान की जा सके, लेकिन अभी तक किसी भी गाड़ी में पोस्टर नहीं लगाया गया।
नियमों के तहत गाड़ियों के भुगतान का निर्देश है। इसमें गड़बड़ी पर जांच होगी। आरबीएसके की सभी गाड़ियों पर पोस्टर, लॉजिस्टिक व जीपीएस लगाने का सख्त निर्देश दिया गया है। ऐसा न करने वाले ठेकेदार व अधीक्षक के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। डॉ. राधेश्याम केसरी, मुख्य चिकित्साधिकारी
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत सीएचसी-पीएचसी को गाड़ियां दी गई हैं। सरकार की मंशा है कि एनएचएम की टीम गांव-देहात तक आसानी से पहुंच सके। वहां लोगों को स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ मिल सके। अकेले राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत ही जिले को 32 गाड़ियां आवंटित की गई हैं। प्रत्येक सीएचसी को एक गाड़ी मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम, तंबाकू निषेध अभियान, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के पर्यवेक्षण के लिए आवंटित की गई है, लेकिन सीएचसी अधीक्षक राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की गाड़ी को पर्यवेक्षण के लिए उपयोग में ले रहें हैं। इसके बाद भी दूसरी गाड़ी का हर महीने 32500 रुपये का भुगतान हो रहा है।
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गाड़ियों में नहीं लगवाया जीपीएस
विभाग के आंखों में धूल झोंककर बिना चले गाड़ियों का भुगतान कराने के लिए शासन के निर्देश के बावजूद गाड़ियों में जीपीएस नहीं लगवाया गया। जबकि अभियान पर निगरानी और वित्तीय अनियमितता रोकने के लिए निर्देश दिया गया था कि जो भी गाड़ियां चलेंगी, सभी में जीपीएस सिस्टम होना चाहिए। जिससे उनकी लोकेशन देखी जा सके और गाड़ियां कितनी किलोमीटर चलीं, इसका पता लगाया जा सके। लेकिन ठेकेदारों से मिलकर कमीशन के चक्कर में अधिकारियों और बाबुओं ने अभियान को पलीता लगा दिया है। 20 से अधिक ऐसी गाड़ियां कागजों में चल रही हैं जिनमें जीपीएस सिस्टम ही नहीं लगा है। यह पता ही नहीं चल सकता कि गाड़ी कहां चल रही हैं, चली भी रही हैं या नहीं।
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ये है शासन का मानक, हो रही अनदेखी
-राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत जितनी भी गाड़ियां चलेंगी, सभी में जीपीएस सिस्टम होना चाहिए।
-गाड़ियां कब, कितनी दूर चलीं, कौन सी टीम गई, इसका रोजाना का रिकार्ड रखा जाएगा।
-कोई भी गाड़ी 2 साल से अधिक पुरानी नहीं होगी। साथ ही गाड़ियां कंडम हालत में न हों, इसका ध्यान रखा जाएगा।
-ठेकेदार किराए पर गाड़ी लेकर एनएचएम में नहीं देगा। बल्कि करीब 75 फीसदी गाड़ियां उसकी होनी चाहिए।
गाड़ियों के नंबर में होता खेल
विभाग गाड़ियों के नंबर में खेल करता है। एक ही गाड़ी कई सीएचसी पर भेज दी जाती है। कई योजनाओं में एक ही गाड़ी चल रही है। कागज में जरूर दिखाया जाता है कि सभी सीएचसी पर अलग-अलग नंबर की गाड़ी चल रही है।
पहचान छिपाने के लिए नहीं लगवाया पोस्टर
निगरानी और वित्तीय अनियमितता रोकने के लिए सीएमओ ने 15 मार्च को सभी सीएचसी व पीएचसी अधीक्षकों को पत्र लिखकर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत सभी अनुबंधित गाड़ियों पोस्टर एवं लॉजिस्टिक लगाने का निर्देश दिया था। इसके लिए मेसर्स मारुती नंदन काजीदेवर गोंडा को जिम्मेदारी सौंपी गई थी कि 16 मार्च दोपहर 12 बजे तक सभी गाड़ियों में पोस्टर व लॉजिस्टिक लगावाकर सूचित करें जिससे गाड़ियों की पहचान की जा सके, लेकिन अभी तक किसी भी गाड़ी में पोस्टर नहीं लगाया गया।
नियमों के तहत गाड़ियों के भुगतान का निर्देश है। इसमें गड़बड़ी पर जांच होगी। आरबीएसके की सभी गाड़ियों पर पोस्टर, लॉजिस्टिक व जीपीएस लगाने का सख्त निर्देश दिया गया है। ऐसा न करने वाले ठेकेदार व अधीक्षक के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। डॉ. राधेश्याम केसरी, मुख्य चिकित्साधिकारी