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Gonda News: खून की जांच में गोंडा 70वें पायदान पर
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गोंडा। हर बुखार डेंगू या मलेरिया हो सकता है, इसी आशंका के साथ सभी बुखार पीड़ितों के ब्लड की स्लाइड बनाकर जांच करानी थी। सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में आने वाले मरीजों में कम से कम दस फीसदी लोगों की स्लाइड बनाई जानी थी, इतनी ही स्लाइड ग्रामीण इलाकों के बुखार पीड़ितों की बननी थीं। मगर मलेरिया विभाग स्लाइड बनाने में फेल साबित हुआ है।
मलेरिया विभाग की ओर से पूरे साल में सिर्फ तीस हजार मरीजों की स्लाइड ही तैयार की जा सकी। इसके चलते हाल में ही संचारी निदेशक की समीक्षा में स्लाइड तैयार करने के मामले में गोंडा जिला पूरे प्रदेश में 70वें स्थान पर पाया गया। यही वजह है कि डेंगू, मलेरिया, दिमागी बुखार सहित अन्य संक्रामक बीमारियों से पूरे साल जिला कांपता रहा। गांवों में घर-घर लोग बीमार पड़ रहे हैं। मगर स्वास्थ्य विभाग बुखार पीड़ितों की जांच के लिए ब्लड की स्लाइड बनाने में रुचि ही नहीं ले रहा है।
यही वजह है कि जिले में डेंगू के केस बढ़कर 175 तक पहुंच गए। वहीं, मलेरिया के 13 मरीज मिले हैं। करीब दस हजार लोग अन्य बुुखार की चपेट में आ चुके हैं। शासन की ओर से संक्रामक बीमारियों पर नियंत्रण के लिए अधिक से अधिक ब्लड स्लाइड तैयार करने का निर्देश दिया गया था। सभी सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में आने वाले मरीजों में से कम से कम दस फीसदी लोगों की ब्लड स्लाइड बनानी थी। मगर स्वास्थ्य महकमा स्लाइड बनाने के मामले में फेल रहा।
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जिला मलेरिया अधिकारी एसजेडए जैदी ने बताया कि मलेरिया विभाग की ओर से इस साल में अब तक करीब 30 हजार स्लाइड बनाई गईं। जबकि हर महीने जिला अस्पताल सहित सभी स्वास्थ्य केंद्रों को मिलाकर करीब एक लाख लोगों का ओपीडी में इलाज होता है। एसजेडए जैदी ने बताया कि शासन की मंशा के अनुसार जिला अस्पताल सहित सभी स्वास्थ्य केंद्रों में हर महीने करीब दस हजार स्लाइड तैयार की जानी चाहिए। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों से भी हर महीने करीब दस हजार स्लाइडें बनाई जानी चाहिए।
ब्लड स्लाइड बनाने में फिसड्डी ब्लॉकों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मलेरिया निरीक्षकों की तैैनाती कर स्लाइडों की संख्या बढ़ाने का सख्त निर्देश दिया गया है। संचारी निदेशक डॉ. एके सिंह ने जिले की खराब प्रगति को देखते हुए सुधार के सख्त निर्देश दिए थे। एबीईआर (एनुअल ब्लड एग्जामिनेशन रिपोर्ट) में इटियाथोक सीएचसी सबसे फिसड्डी पाया गया है। जहां मलेरिया निरीक्षक डॉ. पुष्पेंद्र मिश्र की ड्यूटी लगाकर स्लाइड बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। भवानी प्रसाद तिवारी को वजीरगंज विकासखंड की जिम्मेदारी सौंपी गई। मनकापुर में एबीईआर बढ़ाने के लिए मलेरिया निरीक्षक सुनील कुमार तैनात किए गए हैं। बताया जा रहा कि ब्लड स्लाइड बनाने में जिला 70वें स्थान पर पाया गया है, इस पर संचारी निदेशक ने खासी नाराजगी जताई थी।
सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा ने बताया कि जिले में बुखार के मरीजों की ब्लड स्लाइड बनाने में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। कम एबीईआर वाले सीएचसी पर मलेरिया निरीक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। आशा, एएनएम व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की ओर से ब्लड स्लाइड तैयारी की जा रही है।
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मलेरिया विभाग की ओर से पूरे साल में सिर्फ तीस हजार मरीजों की स्लाइड ही तैयार की जा सकी। इसके चलते हाल में ही संचारी निदेशक की समीक्षा में स्लाइड तैयार करने के मामले में गोंडा जिला पूरे प्रदेश में 70वें स्थान पर पाया गया। यही वजह है कि डेंगू, मलेरिया, दिमागी बुखार सहित अन्य संक्रामक बीमारियों से पूरे साल जिला कांपता रहा। गांवों में घर-घर लोग बीमार पड़ रहे हैं। मगर स्वास्थ्य विभाग बुखार पीड़ितों की जांच के लिए ब्लड की स्लाइड बनाने में रुचि ही नहीं ले रहा है।
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यही वजह है कि जिले में डेंगू के केस बढ़कर 175 तक पहुंच गए। वहीं, मलेरिया के 13 मरीज मिले हैं। करीब दस हजार लोग अन्य बुुखार की चपेट में आ चुके हैं। शासन की ओर से संक्रामक बीमारियों पर नियंत्रण के लिए अधिक से अधिक ब्लड स्लाइड तैयार करने का निर्देश दिया गया था। सभी सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में आने वाले मरीजों में से कम से कम दस फीसदी लोगों की ब्लड स्लाइड बनानी थी। मगर स्वास्थ्य महकमा स्लाइड बनाने के मामले में फेल रहा।
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जिला मलेरिया अधिकारी एसजेडए जैदी ने बताया कि मलेरिया विभाग की ओर से इस साल में अब तक करीब 30 हजार स्लाइड बनाई गईं। जबकि हर महीने जिला अस्पताल सहित सभी स्वास्थ्य केंद्रों को मिलाकर करीब एक लाख लोगों का ओपीडी में इलाज होता है। एसजेडए जैदी ने बताया कि शासन की मंशा के अनुसार जिला अस्पताल सहित सभी स्वास्थ्य केंद्रों में हर महीने करीब दस हजार स्लाइड तैयार की जानी चाहिए। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों से भी हर महीने करीब दस हजार स्लाइडें बनाई जानी चाहिए।
ब्लड स्लाइड बनाने में फिसड्डी ब्लॉकों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मलेरिया निरीक्षकों की तैैनाती कर स्लाइडों की संख्या बढ़ाने का सख्त निर्देश दिया गया है। संचारी निदेशक डॉ. एके सिंह ने जिले की खराब प्रगति को देखते हुए सुधार के सख्त निर्देश दिए थे। एबीईआर (एनुअल ब्लड एग्जामिनेशन रिपोर्ट) में इटियाथोक सीएचसी सबसे फिसड्डी पाया गया है। जहां मलेरिया निरीक्षक डॉ. पुष्पेंद्र मिश्र की ड्यूटी लगाकर स्लाइड बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। भवानी प्रसाद तिवारी को वजीरगंज विकासखंड की जिम्मेदारी सौंपी गई। मनकापुर में एबीईआर बढ़ाने के लिए मलेरिया निरीक्षक सुनील कुमार तैनात किए गए हैं। बताया जा रहा कि ब्लड स्लाइड बनाने में जिला 70वें स्थान पर पाया गया है, इस पर संचारी निदेशक ने खासी नाराजगी जताई थी।
सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा ने बताया कि जिले में बुखार के मरीजों की ब्लड स्लाइड बनाने में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। कम एबीईआर वाले सीएचसी पर मलेरिया निरीक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। आशा, एएनएम व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की ओर से ब्लड स्लाइड तैयारी की जा रही है।