फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   Gonda-Bahraich railway will be closed in November

नवंबर में बंद जाएगा गोंडा-बहराइच रेलमार्ग

Sun, 20 Sep 2015 09:37 PM IST
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 20 Sep 2015 09:37 PM IST
विज्ञापन
गोंडा से बहराइच के बीच रेल यातायात नवंबर के आखिरी सप्ताह से आठ महीने के लिए बंद हो जाएगा। इससे गोंडा, बहराइच सहित अन्य जनपदों के लोग ट्रेन से बहराइच नहीं आ-जा सकेंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि पिछले रेल बजट में मोदी सरकार ने गोंडा-बहराइच छोटी लाइन के बड़ी लाइन में अमान परिवर्तन किए जाने की स्वीकृति दी थी।
विज्ञापन


इसका काम दो महीने बाद नवंबर के आखिरी सप्ताह से शुरू हो जाएगा। गोंडा-बहराइच के रेल इतिहास में ऐसा पहली बार होगा, जब 95 साल बाद किसी रेल ट्रैक का आवागमन इतने दिनों के लिए बंद होगा। साथ ही गोंडा से निकलने वाली छोटी लाइन का वजूद खत्म हो जाएगा।
विज्ञापन


गोंडा-बहराइच के बीच ट्रेन चलाए जाने की शुरूआत 95 साल पहले ब्रिटिश शासनकाल में सन 1920 में हुई थी। जबकि गोंडा का रेल इतिहास इससे 38 साल और पुराना है। यहां सन 1882 में रेलवे स्टेशन की स्थापना हुई थी। उस समय गोंडा से छपरा होते हुए आसाम तक ट्रेनों का संचालन होता था।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके बाद सन 1920 में पहली बार गोंडा से बहराइच के बीच ट्रेनाें का संचालन शुरू किया गया। गोंडा से बहराइच तक ट्रेन जाती थी, लेकिन उसका विस्तार पड़ोसी देश नेपालगंज व मैलानी तक कर दिया गया।

मौजूदा समय गोंडा-बहराइच छोटी लाइन पर गोंडा से 9 जोड़ी ट्रेनों का संचालन होता है, जिसमें एक ट्रेन गोकुल एक्सप्रेस भी शामिल है, जिससे हर रोज हजारों श्रद्धालु उत्तराखंड स्थित मां पूर्णागिरि की यात्रा करते हैं। लेकिन नवंबर में गोंडा से बहराइच के बीच रेल यातायात बंद हो जाने पर मां पूर्णागिरि सहित अन्य स्थानों तक जाने के लिए यात्रियों को बस का सहारा लेना पड़ेगा।

नवंबर के आखिरी सप्ताह से रेल महकमा गोंडा-बहराइच के बीच बिछी छोटी लाइन को बड़ी लाइन में परिवर्तित करने का काम शुरू कर देगा। जिससे न सिर्फ पांच हजार यात्रियों की मुश्किलें बढ़ेंगीं, बल्कि इससे हर दिन प्राप्त होने वाली 60 हजार रुपये रेल की आय भी प्रभावित होगी।

72 साल तक अनवरत स्टीम इंजन के संचालन के बाद वर्ष 1992 में इसे बंद कर दिया गया और उसके स्थान पर डीजल इंजन का प्रयोग होने लगा। करीब 23 साल से संचालित डीजल इंजन का वर्जन बदल जाएगा। अमान परिवर्तन होने के बाद छोटी लाइन पर चलने वाले डीजल इंजन भी बंद हो जाएंगे।

वहीं स्टीम इंजन को संरक्षित रखने के लिए एक इंजन स्टेशन के बाहर रखा गया है, जिससे लोग उसके इतिहास के बारे में जानकारी कर सकें। स्टीम इंजन का संचालन ड्राइवर के साथ एक फायर मैन भी करता रहा, जो सब्बल से कोयले को इंजन की भट्ठी में डालता था। अब तो फायरमैन की पोस्ट भी खत्म कर दी गई है।


पिछले रेल बजट में मोदी सरकार ने गोंडा-बहराइच छोटी लाइन को बड़ी लाइन में परिवर्तित किए जाने के लिए इसका बजट पास किया था। इसके क्रम में 61 किलोमीटर छोटी लाइन को बड़ी लाइन में परिवर्तित किया जाना है। इसका काम वैसे तो अक्तूबर में ही शुरू हो जाता, लेकिन किन्हीं कारणों से अब इसके काम की शुरूआत नवंबर के आखिरी सप्ताह से होगी। 240 दिनों के भीतर इसका काम पूरा होने की उम्मीद है। - आलोक सिंह, मंडल रेल प्रबंधक
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed