{"_id":"48eaf4aa95fc149a2105690932514f15","slug":"give-the-information-of-garden-crops-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"औद्यानिक फसलों की दी जानकारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
औद्यानिक फसलों की दी जानकारी
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 23 Sep 2015 11:33 PM IST
विज्ञापन
केंद्र के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. उपेन्द्र नाथ सिंह, उद्यान विभाग के अनिल शुक्ला व केंद्र के वैज्ञानिक एवं कृषकों की उपस्थिति में पं. दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
डॉ. उपेन्द्र नाथ सिंह ने औद्यानिक फसलों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से चलाई जा रही गतिविधियों की जानकारी दी। मिथिलेश कुमार झा द्वारा औद्यानिक फसलों में छोटे एवं अत्यंत उपयोगी उपकरणों के संचालन एव उपयोगिता के बारे में तथा पुष्पेन्द्र सिंह गुर्जर ने औद्यानिक फसलों की प्रमुख प्रजातियों एवं उनकी विशेषताओं पर प्रकाश डाला।
इसके बाद कृषि वैज्ञानिकों की टीम ने बरसात न होने के कारण बर्बाद हो रही फसलों का निरीक्षण किया। वैज्ञानिकों ने बताया कि वर्षा न होने से धान में पत्ती लपेटक कीट का प्रकोप लगभग 55-60 प्रतिशत खेतों हो गया है। इसी प्रकार क्षेत्र में अरहर की फसल में भी पत्ती लपेटक कीट का प्रकोप देखने को मिला। यह कीट अरहर के ऊपर की पत्तियों को लपेटकर सफेद जाला बनाकर उसी में छिपा रहता है और पत्तियां खाता रहता है।
विज्ञापन
इसके नियंत्रण के लिए मोनोक्रोटोफास 36 ई.सी 1.25 मिली. दवा प्रति बीघा छिड़काव करें या क्यूनालफास 25 ई.सी का उपयोग भी लाभदायक रहेगा। इसके अतिरिक्त धान में जहां बालिया निकलने वाली हैं, उस खेत में पानी भर दें। पानी सूखने के बाद यूरिया 5 किग्रा./बीघा की दर से छिड़काव करें, इससे बालियां एक समान निकलेंगी।
विज्ञापन
डॉ. उपेन्द्र नाथ सिंह ने औद्यानिक फसलों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से चलाई जा रही गतिविधियों की जानकारी दी। मिथिलेश कुमार झा द्वारा औद्यानिक फसलों में छोटे एवं अत्यंत उपयोगी उपकरणों के संचालन एव उपयोगिता के बारे में तथा पुष्पेन्द्र सिंह गुर्जर ने औद्यानिक फसलों की प्रमुख प्रजातियों एवं उनकी विशेषताओं पर प्रकाश डाला।
विज्ञापन
इसके बाद कृषि वैज्ञानिकों की टीम ने बरसात न होने के कारण बर्बाद हो रही फसलों का निरीक्षण किया। वैज्ञानिकों ने बताया कि वर्षा न होने से धान में पत्ती लपेटक कीट का प्रकोप लगभग 55-60 प्रतिशत खेतों हो गया है। इसी प्रकार क्षेत्र में अरहर की फसल में भी पत्ती लपेटक कीट का प्रकोप देखने को मिला। यह कीट अरहर के ऊपर की पत्तियों को लपेटकर सफेद जाला बनाकर उसी में छिपा रहता है और पत्तियां खाता रहता है।
विज्ञापन
इसके नियंत्रण के लिए मोनोक्रोटोफास 36 ई.सी 1.25 मिली. दवा प्रति बीघा छिड़काव करें या क्यूनालफास 25 ई.सी का उपयोग भी लाभदायक रहेगा। इसके अतिरिक्त धान में जहां बालिया निकलने वाली हैं, उस खेत में पानी भर दें। पानी सूखने के बाद यूरिया 5 किग्रा./बीघा की दर से छिड़काव करें, इससे बालियां एक समान निकलेंगी।