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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   Ghaghara crosses the red mark, in the 45 meter dam river

घाघरा लाल निशान के पार, 45 मीटर बांध नदी में समाया

Mon, 24 Jul 2017 11:23 PM IST
amar ujala
amar ujala Updated Mon, 24 Jul 2017 11:23 PM IST
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 घाघरा के रौद्र रुप के आगे सरकारी तंत्र फेल हो गया। सोमवार को घाघरा अपने पूरे शबाब पर रही। बांध का करीब 45 मीटर हिस्सा धड़ाधड़ कटकर नदी में समाता गया और बचाव कार्य में लगे अधिकारी-कर्मचारी निरीह बनकर देखते रहे।
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घाघरा ने बांध के साथ नकहरा गांव को जाने वाले बांध के रुप में बने रास्ते को भी काटकर नदी की धारा प्रवाहित कर दिया। एल्गिन-चरसड़ी बांध के एक किलोमीटर हिस्से में कटान शुरू हो गई है। अब तक किसानों का करीब 6 सौ बीघा खेत भी घाघरा में समा चुका है।
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सोमवार की सुबह घाघरा खतरे के निशान को पार कर गई। देर शाम तक घाघरा का जलस्तर 106.126 पर आ गया।  दूसरी ओर चरसड़ी बांध का हिस्सा लगातार घाघरा में समाता जा रहा है। कट-वन का नोज दो दिन पूर्व ही नदी में कटकर समा चुुुका है।
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उसके बाद से करीब 45 मीटर बांध का हिस्सा पूरी तरह से नदी में समा चुका है। अधिकारियों को कैम्प करने के लिए जहां छप्पर का अस्थाई कार्यालय बनाया गया था वह भी कटान की जद में आ गया है। छप्पर तक घाघरा ने बांध में दरार लेकर काटना शुरू कर दिया है।

बेहटा गांव तक करीब एक किलो मीटर से अधिक दायरे में नदी अभी भी कटान कर रही है। दूसरी ओर ग्राम काशीपुर के सामने कट टू की तरफ रिंग बांध व उसके आस-पास किसानों की कृषि योग्य भूमि करीब 600 बीघा नदी कटान करके भूमि को निगलती जा रही है। किसानों की फसलें पूरी तरह से चौपट हो चुकी हैं। घाघरा अपनी धारा को करनैलगंज की ओर पूरी तरह से मोड़ने में कामयाब साबित हुई है। जिससे बाढ़ का दूसरा दौर तेजी से आने की संभावना प्रबल हो गई है। 

बांध को बचाने के लिए अब परखोपाइन का भी सहारा लेना शुरु हो गया है। अभी तक महज ब्रिक रोरा, लोहे के तार के जाल में बालू भरी बोरियां, पेड़ की डाल, को नदी में छोड़कर कटान रोका जाता रहा। मगर सोमवार को बांध के किनारे परखोपाइन भी उतार दिया गया। जिसमें सीमेंट के तीन छड़ को एक में जोड़कर उसमें खरपतवार डाला जा रहा था, जबकि प्रतिवर्ष परखोपाइन पर विभाग लाखों रुपये व्यय दिखाता रहा। 

मौके पर मौजूद रहे अधिशाषी अभियंता विश्वनाथ शुक्ल व सहायक अभियंता अमरेश सिंह के साथ अवर अभियंता एमके सिंह, सहित आधा दर्जन अधिकारी बांध पर कैंप कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि नदी कटान कर रही है। जिसे रोकने व बांध को बचाने के लिए प्रयास चल रहा है। 


घाघरा की बांध एवं नकहरा के सामने हो रही तेज कटान को देखते हुए एसडीएम के निर्देश पर बांध पर पहुंचे तहसीलदार रमेश बाबू ने बताया कि बांध में कटान को देखते हुए बचाव कार्य संभव नहीं हो पा रहा है। बांध का हिस्सा तेजी से नदी में समाता जा रहा है। जिससे करनैलगंज तहसील क्षेत्र के गांवों में बाढ़ की संभावना भी तेज हो गई है। फिलहाल पूरी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। 
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