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एसआईटी करेगी जमीन घोटाले की जांच
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गोंडा सदर का उपनिबंधक कार्यालय। -संवाद
- फोटो : GONDA
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गोंडा। फर्जीवाड़ा कर करोड़ों कीमत की जमीन हथियाने के मामले की जांच एसआईटी से कराने की संस्तुति डीआईजी देवीपाटन परिक्षेत्र ने शासन से की है। फर्जी बैनामा से जुड़े इस मामले की जांच में अब तक 47 मामले सामने आ चुके हैं। इसमें निबंधन कार्यालय के कर्मचारियों की मिलीभगत से बिना बैनामा कराए ही कूट रचित बैनामा के सहारे रजिस्ट्री कर जमीन कब्जा ली गई। एआईजी निबंधन की जांच के बाद अब तक इस मामले में 20 मुकदमे भी दर्ज हो चुके है, जिनकी विवेचना का कार्य पुलिस की अपराध शाखा कर रही है। विवेचना के लगातार बढ़ते घेरे को देखते हुए ही अब सभी मुकदमों की जांच एसआईटी से कराने की जरूरत जताई गई है।
फर्जी बैनामा की शिकायत सामने आने पर सहायक महानिरीक्षक निबंधन मनोज कुुमार श्रीवास्तव के स्तर से हुई जांच के बाद फर्जी रजिस्ट्री से जुड़े एक के बाद एक 47 मामले पकड़ में आए थे। जांच में सामने आया कि कई मामलों में तो बैनामा करने वाले व कराने वाले के साथ ही गवाहों की मौत भी हो चुकी है। इसे लेकर अब तक 20 मुकदमे पुलिस में दर्ज हो चुके हैं। सभी मुकदमों का पर्यवेक्षण देवीपाटन मंडल के डीआईजी स्वयं कर रहे हैं।
1998 से 2000 के बीच में 47 फर्जी रजिस्ट्री
वर्ष 2006 से पहले निबंधन कार्यालयों में भूमि व संपत्ति का बैनामा मैनुअल प्रक्रिया के तहत होता था। ऐसे में निबंधन कार्यालय के कर्मचारियों की मिलीभगत से खूब खेल हुआ। भूमि घोटाले से जुड़े लोगों ने कर्मचारियों को मिलाकर करोड़ों कीमत की भूमि का फर्जी बैनामा कराकर निबंधन कार्यालय में इसका पंजीकरण भी करा दिया। इसी आधार पर जमीन पर कब्जा जमाया जाता था। इस खेल में हुआ पहला फर्जी बैनामा 09 दिसंबर 1998 को पकड़ में आया था। इसके बाद से अब तक जांच के दौरान फर्जी बैनामा के 47 मामले सामने आ चुके हैं। वर्ष 2006 में निबंधन कार्य पूरी तरह से ऑन लाइन हुआ था। (संवाद)
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निबंधन कार्यालय की जांच में भूमि घोटाले के अब तक 47 मामले में पकड़े गए हैं। इसमें 20 एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। सभी मामलों की जांच अपराध शाखा से कराई जा रही है। भूमि घोटाले से जुड़े इस मामले के बढ़ते दायरे को देखते हुए ही अब इसकी जांच एसआईटी से कराने की संस्तुति शासन को भेजी गई है। शासन से निर्देश मिलते ही सभी मुकदमों की पत्रावलियां एसआईटी को भेज दी जाएगी।
उपेंद्र अग्रवाल, डीआईजी देवीपाटन परिक्षेत्र
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फर्जी बैनामा की शिकायत सामने आने पर सहायक महानिरीक्षक निबंधन मनोज कुुमार श्रीवास्तव के स्तर से हुई जांच के बाद फर्जी रजिस्ट्री से जुड़े एक के बाद एक 47 मामले पकड़ में आए थे। जांच में सामने आया कि कई मामलों में तो बैनामा करने वाले व कराने वाले के साथ ही गवाहों की मौत भी हो चुकी है। इसे लेकर अब तक 20 मुकदमे पुलिस में दर्ज हो चुके हैं। सभी मुकदमों का पर्यवेक्षण देवीपाटन मंडल के डीआईजी स्वयं कर रहे हैं।
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1998 से 2000 के बीच में 47 फर्जी रजिस्ट्री
वर्ष 2006 से पहले निबंधन कार्यालयों में भूमि व संपत्ति का बैनामा मैनुअल प्रक्रिया के तहत होता था। ऐसे में निबंधन कार्यालय के कर्मचारियों की मिलीभगत से खूब खेल हुआ। भूमि घोटाले से जुड़े लोगों ने कर्मचारियों को मिलाकर करोड़ों कीमत की भूमि का फर्जी बैनामा कराकर निबंधन कार्यालय में इसका पंजीकरण भी करा दिया। इसी आधार पर जमीन पर कब्जा जमाया जाता था। इस खेल में हुआ पहला फर्जी बैनामा 09 दिसंबर 1998 को पकड़ में आया था। इसके बाद से अब तक जांच के दौरान फर्जी बैनामा के 47 मामले सामने आ चुके हैं। वर्ष 2006 में निबंधन कार्य पूरी तरह से ऑन लाइन हुआ था। (संवाद)
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निबंधन कार्यालय की जांच में भूमि घोटाले के अब तक 47 मामले में पकड़े गए हैं। इसमें 20 एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। सभी मामलों की जांच अपराध शाखा से कराई जा रही है। भूमि घोटाले से जुड़े इस मामले के बढ़ते दायरे को देखते हुए ही अब इसकी जांच एसआईटी से कराने की संस्तुति शासन को भेजी गई है। शासन से निर्देश मिलते ही सभी मुकदमों की पत्रावलियां एसआईटी को भेज दी जाएगी।
उपेंद्र अग्रवाल, डीआईजी देवीपाटन परिक्षेत्र