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Gonda News: विदेशों में मिली ख्याति, अपने ही घर में उपेक्षित हैं योग के जनक

Fri, 21 Jun 2024 01:36 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Fri, 21 Jun 2024 01:36 AM IST
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Found fame abroad, the founder of yoga is neglected in his own home
कोंड़र गांव ​स्थित मह​र्षि पतंजलि जन्मभूमि पर बना चबूतरा
वजीरगंज ब्लॉक के कोंड़र गांव में है महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली, महर्षि पतंजलि ने दुनिया को दिया योग
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वजीरगंज (गोंडा)। विश्व को योग, आयुर्वेद एवं व्याकरण शास्त्र का संदेश देने वाले महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली कोंड़र की स्थिति जस की तस है। महर्षि पतंजलि की याद केवल योग दिवस 21 जून तक सीमित होकर रह गई है। जबकि विश्व के 177 देशों ने योग को मान्यता व महत्ता दी है।
पतंजलि अंजलयोअस्मिन इति पतंजलि: अर्थात जिस महापुरुष के लिए प्राणिमात्र श्रद्धा से नतमस्तक हो उसे पतंजलि कहते हैं। वे शेषावतार थे। पौराणिक कथनानुसार भगवान शेष ने शेषशायी नारायण से अपने अमूल्य ज्ञान की सार्थकता के लिए प्रार्थना की। उनकी प्रार्थना के अनुसार भगवान श्रीहरि ने उन्हें वचन दिया कि तुम द्वापर एवं कलि के संध्याकाल में गोनर्द देश में अवतार लेकर शास्त्रों का प्रचार करोगे।
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आयुर्वेद पर महर्षि पतंजलि ने जिस ग्रंथ की रचना की, उस ग्रंथ का नाम पातंजल तंत्र है। ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार पतंजलि पर्दे के अंदर से शिष्यों को ज्ञानोपदेश देते थे। नवें दिन शिष्यों ने पर्दे के कोने से झांका। तब सर्पाकार पतंजलि अदृश्य हो गये। महर्षि पतंजलि जहां अदृश्य हो गए थे वह पवित्र स्थल कोंडर नाम से आज भी वजीरगंज के निकट प्रसिद्ध है। (संवाद)
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आयुष चिकित्सालय का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में
महर्षि पतंजलि जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष डाॅ. स्वामी भगवदाचार्य ने संयुक्त राष्ट्र संघ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित केंद्र व राज्य सरकार के संबंधित मंत्रियों को पत्र लिखकर महर्षि पतंजलि जन्मभूमि के विकास की मांग की थी। उन्होंने यहां पर मूर्ति की स्थापना, योग विश्वविद्यालय का निर्माण, आयुष चिकित्सालय, योगशाला, पतंजलि घाट सहित पर्यटन स्थल बनाने की मांग की थी। वर्ष 2018 में केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने न्यास अध्यक्ष को पत्र भेज कर 10-20 या 50 शैया का अस्पताल बनाने के लिए प्रस्ताव मांगा था। जिस पर आवश्यक प्रपत्रों सहित 50 शैया के अस्पताल का प्रस्ताव भेजा गया था। मामला ठंडे बस्ते में चला गया।


पतंजलि आश्रम भूमि पर अतिक्रमण
नौ वर्ग किमी क्षेत्रफल वाली कोंड़र झील के तट पर देव स्थान के नाम से स्थित पतंजलि आश्रम का कुल क्षेत्रफल लगभग ढाई बीघा है। इस पर अतिक्रमण भी है। इस भूमि पर एक कमरे में रामजानकी मंदिर बना है। दूसरी तरफ सम्मय माता मंदिर व भगवान भोले नाथ का मंदिर है। उसी के बगल महर्षि पतंजलि का चबूतरा है। पुजारी रमेश दास उर्फ पवन दास के रहने के लिए एक कमरा व श्रद्धालुओं के लिए एक कमरा बना है। गांव के युवा यहां पर मंगल मीटिंग करते हैं। यदा-कदा भक्त भंडारे भी करते रहते हैं। गांव के युवा रवि शंकर दूबे व विपिन सिंह यहां प्रातः इच्छुक लोगों को योग सिखाते हैं।
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