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कोहरे ने दी दस्तक, ठंड से बचने के नहीं इंतजाम
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गोंडा में छाया रहा कोहरा।
- फोटो : GONDA
गोंडा। इस बार सर्दी का मौसम थोड़ा पहले आ गया है। नवंबर के शुरुआत में ही मौसम में भारी बदलाव दिखने लगा है। शनिवार को सुबह हलका कोहरा था तो दिन में धुंध थी। लेकिन रविवार की सुबह चार बजे से कोहरे का प्रकोप बढ़ गया। पांच बजते ही कोहरा इतना घना हो गया कि विजिबिलिटी पांच मीटर की रह गई। इस दौरान वाहन रेंगते हुए नजर आए। यह कोहरा सुबह आठ बजे तक छाया रहा। सुबह पांच बजे तापमान में भी गिरावट देखी गई। बीते तीनों तक न्यूनतम तापमान 15-16 डिग्री तक रुका रहा। लेकिन रविवार को तापमान एक डिग्री और लुढ़क गया। तो दिन के तापमान में भी दो डिग्री की कमी दिखी। दिन का तापमान 30 डिग्री था जो रविवार को 28 डिग्री पर पहुंच गया। वहीं ठंड बढ़ने के साथ सार्वजनिक स्थानों पर लोग कांपते नजर आए।
बस स्टॉप चौराहे पर लोग साधन के इंतजार में थे लेकिन मौके पर उन्हें बैठने के लिए कोई व्यवस्था नहीं मिली। राजकीय परिवहन निगम परिसर में यात्री निवास के लिए एक बरामदा बना है लेकिन गंदगी होने के कारण तथा वहां बैठने के लिए बेंच न होने के कारण लोग सड़कों पर खड़े रहे। साथ ही जिला अस्पताल व महिला अस्पताल में बने रैन बसेरे का ताला ही नहीं खुला था। मरीजों को भर्ती कराने वाले तीमारदार रात भर ठिठुरते रहे। रेलवे स्टेशन के बाहर कोई रैन बसेरा ही नहीं बना है। मुख्यमंत्री ने एक दिन पहले ही राहत आयुक्त को निर्देश दिया है कि तीन दिनों के अंदर सभी रैन बसेरों की व्यवस्था दुरुस्त कर लिया जाए। लेकिन यहां अधिकारियों ने अभी किसी प्रकार की पहल नहीं की है। ग्रामीण क्षेत्रों व कस्बों में कोई रैन बसेरा ही नहीं बना है।
व्यवस्था दुरुस्त करने के दिए गए निर्देश
सभी उप जिलाधिकारियों, सीएमओ, सिटी मजिस्ट्रेट को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में भ्रमण कर ठंड से बचाव के उपाय अभी से कर लें। साथ ही सुबह व रात में निरीक्षण के भी निर्देश दिए गए हैं। नगर निकायों को निर्देश दिए हैं कि अलाव, रैन बसेरे को दुरुस्त करें, लकड़ियों की व्यवस्था कर लें। -डॉ. नितिन बंसल, जिलाधिकारी गोंडा
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बस स्टॉप चौराहे पर लोग साधन के इंतजार में थे लेकिन मौके पर उन्हें बैठने के लिए कोई व्यवस्था नहीं मिली। राजकीय परिवहन निगम परिसर में यात्री निवास के लिए एक बरामदा बना है लेकिन गंदगी होने के कारण तथा वहां बैठने के लिए बेंच न होने के कारण लोग सड़कों पर खड़े रहे। साथ ही जिला अस्पताल व महिला अस्पताल में बने रैन बसेरे का ताला ही नहीं खुला था। मरीजों को भर्ती कराने वाले तीमारदार रात भर ठिठुरते रहे। रेलवे स्टेशन के बाहर कोई रैन बसेरा ही नहीं बना है। मुख्यमंत्री ने एक दिन पहले ही राहत आयुक्त को निर्देश दिया है कि तीन दिनों के अंदर सभी रैन बसेरों की व्यवस्था दुरुस्त कर लिया जाए। लेकिन यहां अधिकारियों ने अभी किसी प्रकार की पहल नहीं की है। ग्रामीण क्षेत्रों व कस्बों में कोई रैन बसेरा ही नहीं बना है।
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व्यवस्था दुरुस्त करने के दिए गए निर्देश
सभी उप जिलाधिकारियों, सीएमओ, सिटी मजिस्ट्रेट को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में भ्रमण कर ठंड से बचाव के उपाय अभी से कर लें। साथ ही सुबह व रात में निरीक्षण के भी निर्देश दिए गए हैं। नगर निकायों को निर्देश दिए हैं कि अलाव, रैन बसेरे को दुरुस्त करें, लकड़ियों की व्यवस्था कर लें। -डॉ. नितिन बंसल, जिलाधिकारी गोंडा
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