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Gonda News: बाढ़ पीड़ित हर साल बनाते आशियाना, नहीं मिली मदद

Mon, 19 May 2025 11:59 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Mon, 19 May 2025 11:59 PM IST
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Flood victims build shelters every year but do not get any help
करनैलगंज के ए​ल्गिन-चरसड़ी बांध पर बनाया गया स्पर। - संवाद
करनैलगंज (गोंडा)। बाढ़ की विनाश लीला में घर-बार छोड़ने वाले लोगों को कोई मदद नहीं मिल पाई है, जिससे पीड़ित बांध पर शरण लेने को मजबूर हैं। एक तरफ बाढ़ की कटान से बांध को बचाने की जद्दोजहद बाढ़ खंड के अधिकारी कर रहे हैं तो दूसरी तरफ बांध के आसपास तथा दो बांधों के बीच बसे हर साल बाढ़ का प्रकोप झेलने वाले ग्रामीण बांध पर ही अपना आशियाना बनाने में जुट गए हैं।
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बरसात का मौसम और बाढ़ आने में कुल एक माह का समय अवशेष है। जून के मध्य से अंत तक घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने लगता है। दो बांधों के बीच बसे ग्राम परसावल, मांझा रायपुर, नकहरा के ग्रामीण एल्गिन चरसड़ी बांध पर अपना आशियाना बनाने में जुट गए हैं। बांध पर हर साल ग्रामीण अपना-अपना आशियाना नए सिरे से बनाते हैं। खर, फूस, सेठा, बांस, बल्ली के सहारे कच्चा घर बनाते हैं। गांव के मनोरथ, श्यामलाल, राम तीरथ, संतोष, बुधराम, अलखराम, सोमनाथ आदि का कहना है कि हर साल आशियाना तैयार करना पड़ता है। घर पक्का बना है मगर तीन माह तक उसमें पानी भरा रहता है। इसलिए बाढ़ आने के पहले बांध पर आ जाते हैं। चूल्हा, चौका, घर की गृहस्थी का सामान रखने के लिए छप्पर का घर बनाना पड़ता है। तमाम ऐसे लोग हैं जो बांध पर ही घर बनाकर रह रहे हैं। यह आशियाना आंधियों में बर्बाद हो जाता है इसलिए हर साल बनाना पड़ता है। बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता जय सिंह का कहना है कि तटबंध की मजबूती के लिए तेजी से कार्य कराया जा रहा है।
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ऊंचे स्थान पर मिले आवास की सुविधा
बाढ़ पीड़ित फौजदार ने बताया कि ऊंचे स्थान पर उनके लिए आवास बनाने की जरूरत है, ताकि वह हमेशा के लिए आराम से रह सकें। मिथलेश का कहना है कि वादे तो हैं लेकिन, उस पर अमल नहीं होता। जिसका दंश उन लोगों को हर साल झेलना पड़ता है। दृगपाल का कहना है कि महिलाओं व बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। संदीप ने बताया कि बाढ़ के दौरान पढ़ाई बाधित हो जाती है। बाढ़ प्रभावित गांवों के विद्यार्थियों की मुसीबतें बढ़ जाती हैं।
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