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दूसरे की खतौती व फोटो लगाकर बैंक से निकाल लिए केसीसी के 3. 70 लाख रूपए
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गोंडा। दूसरे की खतौनी और फोटो लगाकर बैंक से केसीसी के तीन लाख 70 हजार निकाल लिए गए। बकाएदार ने ऋण भी चुकता नहीं किया। जिसे ब्याज की रकम बढ़कर 79047 रुपये हो गई। बैंक अधिकारियों की ऑडिट में इसका खुलासा होने पर एसबीआई के शाखा प्रबंधक ने जेएम प्रथम की अदालत में एफआईआर दर्ज कराने की याचना की। जिस पर जेएम प्रथम ने कोतवाल देहात को मामले में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
स्टेट बैंक के अधिवक्ता विवेकमणि श्रीवास्तव ने बताया कि एसबीआई की शाखा बनघुसरा के शाखा प्रबंधक अनिल श्रीवास्तव ने जेएम प्रथम की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर केसीसी के बकायेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की याचना की थी।
जिसमें कहा गया कि तहसील करनैलगंज के चांदपुर गांव के रहने वाले रामकुमार ने अपने हिस्से की भूमि को बंधक करने का प्रस्ताव केसीसी के लिए 04 फरवरी 2016 को प्रार्थना पत्र दिया था। 03 मई 2016 को केसीसी स्वीकृत किया गया। केसीसी खाता से 3 लाख 70 हजार रामकुमार ने निकाल लिया।
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निकासी के बाद से अब तक ऋण अदा नहीं किया। ब्याज समेत 79047 रुपये बकाया है। ऑडिट के दौरान ऑडिट टीम ने संदेह किया तो बैंक अधिकारी रामकुमार के घर पहुंचे। वहां रामकुमार ने अधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड प्रार्थना पत्र के साथ दिया।
बताया कि उसने कोई ऋण नहीं लिया है। ऋण की पत्रावली में लगे वोटर आईडी कार्ड का नंबर रामकुमार के वोटरआईडी कार्ड से भिन्न पाया गया और फोटो में भी अंतर पाया गया। यानि खतौनी किसी अन्य व्यक्ति की और फोटो किसी अन्य का लगाकर किसी अज्ञात व्यक्ति ने केसीसी प्राप्त कर लिया। जेएम प्रथम ने याची को सुना और पत्रावली का अवलोकन कर कोतवाल देहात को मामले में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
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स्टेट बैंक के अधिवक्ता विवेकमणि श्रीवास्तव ने बताया कि एसबीआई की शाखा बनघुसरा के शाखा प्रबंधक अनिल श्रीवास्तव ने जेएम प्रथम की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर केसीसी के बकायेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की याचना की थी।
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जिसमें कहा गया कि तहसील करनैलगंज के चांदपुर गांव के रहने वाले रामकुमार ने अपने हिस्से की भूमि को बंधक करने का प्रस्ताव केसीसी के लिए 04 फरवरी 2016 को प्रार्थना पत्र दिया था। 03 मई 2016 को केसीसी स्वीकृत किया गया। केसीसी खाता से 3 लाख 70 हजार रामकुमार ने निकाल लिया।
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निकासी के बाद से अब तक ऋण अदा नहीं किया। ब्याज समेत 79047 रुपये बकाया है। ऑडिट के दौरान ऑडिट टीम ने संदेह किया तो बैंक अधिकारी रामकुमार के घर पहुंचे। वहां रामकुमार ने अधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड प्रार्थना पत्र के साथ दिया।
बताया कि उसने कोई ऋण नहीं लिया है। ऋण की पत्रावली में लगे वोटर आईडी कार्ड का नंबर रामकुमार के वोटरआईडी कार्ड से भिन्न पाया गया और फोटो में भी अंतर पाया गया। यानि खतौनी किसी अन्य व्यक्ति की और फोटो किसी अन्य का लगाकर किसी अज्ञात व्यक्ति ने केसीसी प्राप्त कर लिया। जेएम प्रथम ने याची को सुना और पत्रावली का अवलोकन कर कोतवाल देहात को मामले में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।