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अंग्रेजों के आगे नहीं झुके सेनानी रमेश्वर सिंह

Thu, 13 Aug 2015 11:08 PM IST
बलरामपुर/अमर उजाला ब्यूरो
बलरामपुर/अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 13 Aug 2015 11:08 PM IST
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देश की आजादी की जंग में अपना सब कुछ न्यौछावर कर देने वाले देश के अमर सपूतों की उपेक्षा का मलाल उनके परिवारीजनों को है। वर्तमान राजनीतिक परिवेश में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की हो रही उपेक्षा से उनके परिजन परेशान हैं।
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देश को आजादी दिलाने के लिए पहले तो स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने परिवार की परवाह नहीं की और अब सरकार भी उनके परिवारीजनों पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। अंग्रेजी हुकूमत को घुटने टेकने पर मजबूर कर देने वाले रण बांकुरों ने यह कभी नहीं सोचा होगा कि आजादी मिलने के बाद उनके ही देश के लोग उन्हें भुला देंगे।
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कुछ इसी तरह का मलाल स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रहे स्वर्गीय रमेश्वर सिंह के परिवारीजनों को भी है। रामेश्वर सिंह के परिवारीजन अपने पूर्वज द्वारा देश की आजादी के लिए दी गई कुर्बानी पर गर्व महसूस करते हैं। रेहरा बाजार ब्लॉक के ग्राम उदयपुर निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय रमेश्वर सिंह 1941 में महात्मा गांधी से प्रेरित होकर स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े थे।
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परिवारीजन बताते हैं कि रमेश्वर सिंह गांव-गांव घूमकर लोगों को आजादी की जंग में शामिल होने के लिए प्रेरित करते थे। अंग्रेजी हुकूमत रमेश्वर सिंह के जुनून से परेशान रहती थी। रमेश्वर सिंह के पुत्र भानु प्रताप सिंह, रतिभान सिंह व अशोक सिंह बताते हैं कि 17 अप्रैल 1941 को केराडीह गांव में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ उनके पिता ने चौपाल लगाई थी।

इसी बीच मुखबिरों की सूचना पर अंग्रेज अफसरों ने केराडीह पहुंचकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उन्हें अंग्रेज पैदल मनकापुर ले जाना चाहते थे लेकिन रमेश्वर सिंह अपनी जिद पर अड़ गए कि वह पैदल नहीं जाएंगे। हारकर अंग्रेजों को घोड़े की बग्घी मंगानी पड़ी।

आजादी की जंग में रमश्वर सिंह को गोंडा तथा बस्ती जिला जेल में करीब 8 महीने तक बंद रखा गया। जेल से छूटने के बाद भी रमेश्वर सिंह ने हिम्मत नहीं हारी और अंग्रेजों के खिलाफ दो गुने उत्साह से लड़ते रहे। एक बार अंग्रेजों ने रमेश्वर सिंह की गिरफ्तारी पर कहा कि वह अपने किए के लिए माफी मांग ले तो उन्हें रिहा कर दिया जाएगा।


इस पर वे माफी मांगने के बजाए भारत माता की जय के नारे लगाने लगे। वर्ष 1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रमेश्वर सिंह को आजादी की लड़ाई में उनके योगदान के लिए फैजाबाद में सम्मानित भी किया था। रमेश्वर सिंह द्वारा किए गए शिष्टाचार की झलक आज भी उनके परिवार में देखने को मिलती है।
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