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बाढ़ के खतरे से ग्रामीणों में खौफ
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गोंडा। सरयू का जलस्तर सोमवार को खतरे के निशान से 17 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच कर स्थिर हो गया। दोपहर बाद जब पानी घटने लगा तो बांध व नदी के बीच में खाली पड़ी जमीन में कटान शुरू हो गई। जहां नदी बांध के किनारे बह रही है वहां कटान की स्थिति बन गई है। जहां नदी बांध से कुछ दूरी पर है वहां खाली पड़ी जमीनों को तेजी से काटकर नदी में समाहित करती जा रही है।
बांध के किनारे बसे गांव माझा रायपुर, काशीपुर, पारा, बेहटा, परसावल एवं चंदापुर किटौली गांव के किनारे बांध से सट कर नदी की धारा तेजी से प्रवाहित हो रही है। पानी के बहाव से कटान कम, मगर नदी की तेज धारा से कटान तेजी से हो रही है। सोमवार को घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 17 सेंटीमीटर ऊपर तक पहुंच गया था। दोपहर बाद जलस्तर में गिरावट शुरू हो गई। इसके बाद कटान की स्थिति हो गई। हालांकि बांध के आसपास वाले कछार इलाकों से ग्रामीणों का पलायन कर चुके हैं।
ग्रामीण एल्गिन चरसड़ी बांध पर अपना आशियाना बना चुके हैं। कुछ ग्रामीण अपना आशियाना बनाने के साथ-साथ गांव को खाली कर चुके हैं। सोमवार को नदी का डिस्चार्ज भी घटकर 3 लाख 20 हजार क्यूसेक से तीन लाख क्यूसेक पर आ गया। बाढ़ खंड के अवर अभियंता रवि वर्मा बताते हैं कि नदी का जलस्तर घटने की ओर रुख कर चुका है। डिस्चार्ज भी घटा है जिससे जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आने की उम्मीद है।
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बांध के किनारे बसे गांव माझा रायपुर, काशीपुर, पारा, बेहटा, परसावल एवं चंदापुर किटौली गांव के किनारे बांध से सट कर नदी की धारा तेजी से प्रवाहित हो रही है। पानी के बहाव से कटान कम, मगर नदी की तेज धारा से कटान तेजी से हो रही है। सोमवार को घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 17 सेंटीमीटर ऊपर तक पहुंच गया था। दोपहर बाद जलस्तर में गिरावट शुरू हो गई। इसके बाद कटान की स्थिति हो गई। हालांकि बांध के आसपास वाले कछार इलाकों से ग्रामीणों का पलायन कर चुके हैं।
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ग्रामीण एल्गिन चरसड़ी बांध पर अपना आशियाना बना चुके हैं। कुछ ग्रामीण अपना आशियाना बनाने के साथ-साथ गांव को खाली कर चुके हैं। सोमवार को नदी का डिस्चार्ज भी घटकर 3 लाख 20 हजार क्यूसेक से तीन लाख क्यूसेक पर आ गया। बाढ़ खंड के अवर अभियंता रवि वर्मा बताते हैं कि नदी का जलस्तर घटने की ओर रुख कर चुका है। डिस्चार्ज भी घटा है जिससे जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आने की उम्मीद है।
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