किसानों को डीबीटी योजना के तहत मिलेगी खाद
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जिले में पांच लाख किसान खेती के काम से जुड़े हैं। हर साल खरीफ, रवी व जायद फसलों के लिए करीब 25 हजार मीट्रिक टन डीएपी, डेढ़ लाख मीट्रिक टन यूरिया तथा करीब 75 हजार मीट्रिक टन एनपीके उर्वरकों का प्रयोग किया जाता है।
पोटास सहित अन्य उर्वरक भी करीब 30 हजार मीट्रिक टन की खपत होती है। मौजूदा समय आर्गेनिक व कंपोस्ट उर्वरकों की कमी के चलते अधिकतर किसान रासायनिक खादों पर निर्भर हैं। ऐसे में सभी फसलों में अधिक उपज लेने के लिए किसानों में अलग-अलग रासायनिक उर्वरकों की डिमांड रहती है।
कृषि विशेषज्ञ डा. उपेंद्र नाथ सिंह का कहना है कि किसानों को मृदा संरक्षण के लिए आर्गेनिक व कंपोस्ट खादों पर अधिक जोर देना चाहिए। इससे खाद की होने वाली कालाबाजारी पर रोक लगेगी। कालाबाजारी से खाद की अक्सर किल्लत होती है और किसानों को समय से खाद नहीं मिल पाती। इसमें किसानों आनलाइन रजिस्ट्रेशन कराकर उर्वरक खरीदना होगा इससे कालाबाजारी पर रोक लगेगी और सब्सिडी का लाभ सीधे किसानों को मिलेगी।
जिला कृषि अधिकारी विनय सिंह ने कहा कि खाद बिक्री के लिए डीबीटी योजना अप्रैल से लागू होने के संकेत हैं। डीबीटी योजना लागू होने से किसानों को कुल कीमत पर खाद खरीदनी होगी। अनुदान की रकम कंपनी के बजाए सीधे किसानों के खाते में भेजी जाएगी।
रासायनिक उर्वरकों पर खर्च होने वाली सब्सिडी व अनुमानित लागत
उर्वरक मूल्य(रुपए) सब्सिडी
डीएपी 1050 436
यूरिया 320 200
एनपीके 850 300
सुपरफास्ट 370 150
पोटास 550 200