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मंदिरों में उमड़े श्रद्धालु
अमर उजाला/बलरामपुर
Updated Thu, 14 Apr 2016 11:56 PM IST
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पूजा करते भक्त
- फोटो : अमर उजाला
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नवरात्र अष्टमी पर देवी मंदिरों में महागौरी की पूजा विधि-विधान से की गई। गुरुवार को महागौरी की आराधना के लिए आस्था का सैलाब उमड़ा। विवाहिताओं ने महागौरी की आराधना कर अखंड सौभाग्य व धन संपदा का आशीर्वाद मांगा। शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर में अष्टमी के दिन भक्तों की भारी भीड़ जुटी। जत्थों में पदयात्रा करते हुए भक्त देवीपाटन पहुंचे और देवी का दर्शन कर परिवार के लिए आशीर्वाद मांगा।
मां भगवती की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है। नवरात्र अष्टमी के दिन माता के इसी स्वरुप की पूजा-अर्चना की जाती है। देवी पुराण के अनुसार असुरों का संहार करने के बाद भगवान शिव ने काली जी पर गंगाजल छिड़का तो वह गौरवर्णा हो गई। गौर वर्ण के कारण ही देवी को महागौरी कहा गया। महागौरी को सृष्टि का आधार माना गया है। महागौरी अक्षत सुहाग की प्रतीक है।
महागौरी को ही सौभाग्य, धन-संपदा, सौंदर्य तथा स्त्री जनित गुणों की अधिष्ठात्री देवी कहा गया है। ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से देवी की पूजा-अर्चना करने पर वह विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। इसी मान्यता को लेकर नवरात्र अष्टमी के दिन देवी मंदिरों के साथ-साथ घरों में भी महिलाओं ने विधि-विधान के साथ महागौरी की पूजा-अर्चना की।
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शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर में अष्टमी के दिन पुरुष श्रद्धालुओं के साथ-साथ भारी संख्या में महिलाएं भी जुटी। मंदिर में भोर से देर रात तक देवी की आराधना की गई। महिलाओं ने महागौरी एवं मां पाटेश्वरी की पूजा कर अखंड सुहाग का आशीर्वाद मांगा।
अष्टमी तिथि को मंदिर में मुंडन, कर्ण छेदन व जनेऊ संस्कार कराने वालों की भीड़ के चलते परिसर में तिल रखने की जगह नहीं थी। बिजलीपुर स्थित बिजलेश्वरी देवी मंदिर में भी श्रद्धालुओं के साथ मुंडन कराने वालों की भारी भीड़ जुटी। लोगों ने श्रीयंत्र से सिद्ध बिजलेश्वरी देवी की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद मांगा।
नवरात्र अष्टमी के दिन तुलसीपुर स्थित नई देवी मंदिर, जरवा स्थित रहिया देवी मंदिर, पेहर स्थित दुर्गा देवी मंदिर, उतरौला स्थित ज्वाला देवी मंदिर, महुआ स्थित करिया दुर्गा मंदिर तथा नगर स्थित झारखंडी मंदिर, कालीथान, समय माता मंदिर एवं बड़की बहिनी मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने पूरे दिन देवी की पूजा-अर्चना की।
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मां भगवती की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है। नवरात्र अष्टमी के दिन माता के इसी स्वरुप की पूजा-अर्चना की जाती है। देवी पुराण के अनुसार असुरों का संहार करने के बाद भगवान शिव ने काली जी पर गंगाजल छिड़का तो वह गौरवर्णा हो गई। गौर वर्ण के कारण ही देवी को महागौरी कहा गया। महागौरी को सृष्टि का आधार माना गया है। महागौरी अक्षत सुहाग की प्रतीक है।
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महागौरी को ही सौभाग्य, धन-संपदा, सौंदर्य तथा स्त्री जनित गुणों की अधिष्ठात्री देवी कहा गया है। ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से देवी की पूजा-अर्चना करने पर वह विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। इसी मान्यता को लेकर नवरात्र अष्टमी के दिन देवी मंदिरों के साथ-साथ घरों में भी महिलाओं ने विधि-विधान के साथ महागौरी की पूजा-अर्चना की।
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शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर में अष्टमी के दिन पुरुष श्रद्धालुओं के साथ-साथ भारी संख्या में महिलाएं भी जुटी। मंदिर में भोर से देर रात तक देवी की आराधना की गई। महिलाओं ने महागौरी एवं मां पाटेश्वरी की पूजा कर अखंड सुहाग का आशीर्वाद मांगा।
अष्टमी तिथि को मंदिर में मुंडन, कर्ण छेदन व जनेऊ संस्कार कराने वालों की भीड़ के चलते परिसर में तिल रखने की जगह नहीं थी। बिजलीपुर स्थित बिजलेश्वरी देवी मंदिर में भी श्रद्धालुओं के साथ मुंडन कराने वालों की भारी भीड़ जुटी। लोगों ने श्रीयंत्र से सिद्ध बिजलेश्वरी देवी की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद मांगा।
नवरात्र अष्टमी के दिन तुलसीपुर स्थित नई देवी मंदिर, जरवा स्थित रहिया देवी मंदिर, पेहर स्थित दुर्गा देवी मंदिर, उतरौला स्थित ज्वाला देवी मंदिर, महुआ स्थित करिया दुर्गा मंदिर तथा नगर स्थित झारखंडी मंदिर, कालीथान, समय माता मंदिर एवं बड़की बहिनी मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने पूरे दिन देवी की पूजा-अर्चना की।