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समय से नहीं मिला इलाज, बालिका ने तोड़ा दम
amar ujala gonda
Updated Fri, 21 Jul 2017 10:19 PM IST
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गोंडा के मसकनवां में सपर्दश से मौत पर सीएचसी के सामने प्रदर्शन करते ग्रामीण।
- फोटो : amar ujala
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घर में सो रही एक बालिका को गुरुवार की रात सांप ने काट लिया। उसके पीएचसी मसकनवां ले जाया गया। जहां इलाज न मिलने पर परिवार के लोग उसे सीएचसी छपिया ले गए। मगर यहां से उन्हें निराश लौटना पड़ा। परिवार के लोग बाद में उसे मनकापुर सीएचसी ले गए। जहां पहुंचते उसकी हालत बिगड़ गई।
चिकित्सक ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। मगर उसने यहां दम तोड़ दिया। बालिका की मौत से गुस्साए परिवार व कस्बे के लोगों ने पीएचसी मसकनवां पर शुक्रवार को प्रदर्शन कर यहां इमरजेंसी सेवा की मांग की।
थाना छपिया क्षेत्र के रानीजोत गांव की रहने वाली फरजाना खातून की बेटी सुफीना (13) अपने घर में अपनी मां व बहनों के साथ गुरुवार की रात सो रही थी तभी देर रात उसे सांप ने काट लिया। परिवार के लोग सुफीना को पहले पीएचसी मसकनवा ले गए। मगर वहां इलाज न मिलने पर उसे सीएचसी छपिया ले जाया गया।
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सुफीना की मां फरजाना खातून ने आरोप लगाते हुए बताया कि पीएचसी व सीएचसी में चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मी नदारद थे, इसलिए सुफीना को सीएचसी मनकापुर ले जाया गया। इस बीच इलाज न मिलने के कारण सुफीना की हालत बिगड़ गई। उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। मगर वहां ले जाने से पहले सुफीना ने दम तोड़ दिया।
बालिका की मौत से गुस्साए परिवार व कस्बे के लोगों ने पीएचसी मसकनवां में शुक्रवार को प्रदर्शन कर इमरजेंसी सेवा की मांग की। प्रदर्शनकारियों में मैनुद्दीन, रमजान, दयाशंकर जायसवाल, मो. आलम, शाहिद, रज्जन शामिल रहे। सीएचसी छपिया के चिकित्सा अधीक्षक डा. उमेश चंद्रा ने बताया कि वह सीएचसी पर रात विश्राम करते हैं, नदारद रहने का आरोप निराधार है।
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चिकित्सक ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। मगर उसने यहां दम तोड़ दिया। बालिका की मौत से गुस्साए परिवार व कस्बे के लोगों ने पीएचसी मसकनवां पर शुक्रवार को प्रदर्शन कर यहां इमरजेंसी सेवा की मांग की।
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थाना छपिया क्षेत्र के रानीजोत गांव की रहने वाली फरजाना खातून की बेटी सुफीना (13) अपने घर में अपनी मां व बहनों के साथ गुरुवार की रात सो रही थी तभी देर रात उसे सांप ने काट लिया। परिवार के लोग सुफीना को पहले पीएचसी मसकनवा ले गए। मगर वहां इलाज न मिलने पर उसे सीएचसी छपिया ले जाया गया।
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सुफीना की मां फरजाना खातून ने आरोप लगाते हुए बताया कि पीएचसी व सीएचसी में चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मी नदारद थे, इसलिए सुफीना को सीएचसी मनकापुर ले जाया गया। इस बीच इलाज न मिलने के कारण सुफीना की हालत बिगड़ गई। उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। मगर वहां ले जाने से पहले सुफीना ने दम तोड़ दिया।
बालिका की मौत से गुस्साए परिवार व कस्बे के लोगों ने पीएचसी मसकनवां में शुक्रवार को प्रदर्शन कर इमरजेंसी सेवा की मांग की। प्रदर्शनकारियों में मैनुद्दीन, रमजान, दयाशंकर जायसवाल, मो. आलम, शाहिद, रज्जन शामिल रहे। सीएचसी छपिया के चिकित्सा अधीक्षक डा. उमेश चंद्रा ने बताया कि वह सीएचसी पर रात विश्राम करते हैं, नदारद रहने का आरोप निराधार है।