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डेंगू के प्रकोप से पांच गुना बढ़ी प्लेटलेट्स की मांग
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गोंडा। जिले में बढ़ रहे डेंगू व मौसम जनित बीमारियों के चलते सामान्य से पांच गुना प्लेटलेट्स की मांग बढ़ गई है। सामान्य दिनों में जहां हर रोज औसतन 2-3 यूनिट प्लेटलेट्स की जरूरत पड़ती थी, वहीं इन दिनों 15 से 18 यूनिट प्लेटलेट्स की हर रोज मांग हो रही है।
बारिश के चलते जल-जमाव और उससे उपजी स्थितियों के चलते जिले में डेंगू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जिले में डेंगू के 20 मरीज मिल चुके हैं। इनके इलाज में प्लेटलेट्स की मांग पांच गुना तक बढ़ गई है। सामान्य दिनों में जिला अस्पताल के ब्लड बैंक से हर रोज औसतन दो से तीन यूनिट तक प्लेटलेट्स की मांग हुआ करती थी।
वहीं वर्तमान में यह 8 से 10 यूनिट तक पहुंच गई है। एक निजी अस्पताल में ब्लड बैंक से 5 से 8 यूनिट प्लेटलेट्स की मांग हो रही है। दरअसल, जगह-जगह जमा पानी में पनप रहे लार्वा ने समस्या बढ़ा दी है। जिले में 20 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है तथा रैपिड टेस्ट में अब तक सैकड़ों संदिग्ध मरीज मिल चुके हैं।
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जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. समीर गुप्ता ने बताया कि डेंगू वायरस के चलते प्लेटलेट काउंट कम जरूर हो जाता है। यह जरूरी नहीं कि सभी मरीजों को प्लेटलेट चढ़ाया ही जाए। शरीर स्वयं रोग से लड़ता है और प्लेटलेट काउंट को काफी हद तक कवर कर लेता है।
डेंगू के मामले में प्लेटलेट्स चढ़ाने को कोई मतलब नहीं है। बीस हजार से नीचे काउंट होने पर एहतियात के लिए प्लेटलेट्स चढ़ाया जाता है। वहीं ब्लीडिंग होने पर प्लेटलेट्स काउंट चाहे कितना भी हो प्लेटलेट्स चढ़ाया जाता है। प्लेटलेट्स से अधिक मरीज को ब्लड चढ़ाने की जरूरत पड़ती है।
चिकित्सकों का मानना है कि बुखार होने पर हमेशा इस बात का ख्याल रखें कि मरीज के शरीर में पानी की कमी न होने पाए। मरीज को बराबर पानी पिलाते रहें। बकरी के दूध, पपीते के पत्ते और कीवी फल को उन्होंने लोगों को भ्रम बताया। कहा इससे कोई फायदा नहीं होता। कई बार इसे लेने पर गैस्ट्राइटिस यानी उल्टी आना, मिचली आना जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
जिला अस्पताल ब्लड बैंक के प्रभारी इंचार्ज राम सिंह विसेन ने बताया कि हमारे यहां ब्लड बैंक में पर्याप्त मात्रा में प्लेटलेट्स उपलब्ध है। डॉक्टरों के निर्देश पर मरीजो को प्लेटलेट्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं। डेंगू का संक्रमण बढ़ने से हर रोज 8-10 यूनिट प्लेटलेट्स की मांग होती है। हमारे पास 24 यूनिट प्लेटलेट्स उपलब्ध है। अच्छी गुणवत्ता वाले एक यूनिट खून के 15 से 20 हजार तक प्लेटलेट्स पाए जाते हैं।
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बारिश के चलते जल-जमाव और उससे उपजी स्थितियों के चलते जिले में डेंगू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जिले में डेंगू के 20 मरीज मिल चुके हैं। इनके इलाज में प्लेटलेट्स की मांग पांच गुना तक बढ़ गई है। सामान्य दिनों में जिला अस्पताल के ब्लड बैंक से हर रोज औसतन दो से तीन यूनिट तक प्लेटलेट्स की मांग हुआ करती थी।
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वहीं वर्तमान में यह 8 से 10 यूनिट तक पहुंच गई है। एक निजी अस्पताल में ब्लड बैंक से 5 से 8 यूनिट प्लेटलेट्स की मांग हो रही है। दरअसल, जगह-जगह जमा पानी में पनप रहे लार्वा ने समस्या बढ़ा दी है। जिले में 20 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है तथा रैपिड टेस्ट में अब तक सैकड़ों संदिग्ध मरीज मिल चुके हैं।
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जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. समीर गुप्ता ने बताया कि डेंगू वायरस के चलते प्लेटलेट काउंट कम जरूर हो जाता है। यह जरूरी नहीं कि सभी मरीजों को प्लेटलेट चढ़ाया ही जाए। शरीर स्वयं रोग से लड़ता है और प्लेटलेट काउंट को काफी हद तक कवर कर लेता है।
डेंगू के मामले में प्लेटलेट्स चढ़ाने को कोई मतलब नहीं है। बीस हजार से नीचे काउंट होने पर एहतियात के लिए प्लेटलेट्स चढ़ाया जाता है। वहीं ब्लीडिंग होने पर प्लेटलेट्स काउंट चाहे कितना भी हो प्लेटलेट्स चढ़ाया जाता है। प्लेटलेट्स से अधिक मरीज को ब्लड चढ़ाने की जरूरत पड़ती है।
चिकित्सकों का मानना है कि बुखार होने पर हमेशा इस बात का ख्याल रखें कि मरीज के शरीर में पानी की कमी न होने पाए। मरीज को बराबर पानी पिलाते रहें। बकरी के दूध, पपीते के पत्ते और कीवी फल को उन्होंने लोगों को भ्रम बताया। कहा इससे कोई फायदा नहीं होता। कई बार इसे लेने पर गैस्ट्राइटिस यानी उल्टी आना, मिचली आना जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
जिला अस्पताल ब्लड बैंक के प्रभारी इंचार्ज राम सिंह विसेन ने बताया कि हमारे यहां ब्लड बैंक में पर्याप्त मात्रा में प्लेटलेट्स उपलब्ध है। डॉक्टरों के निर्देश पर मरीजो को प्लेटलेट्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं। डेंगू का संक्रमण बढ़ने से हर रोज 8-10 यूनिट प्लेटलेट्स की मांग होती है। हमारे पास 24 यूनिट प्लेटलेट्स उपलब्ध है। अच्छी गुणवत्ता वाले एक यूनिट खून के 15 से 20 हजार तक प्लेटलेट्स पाए जाते हैं।