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दीन दयाल शोध संस्थान एनसीसी समष्टि सेवा से सम्मानित
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गोंडा के जयप्रभा ग्राम स्थित दीनदयाल शोध संस्थान को हैदराबाद में प्रतिष्ठित एनसीसी समष्टि सेवा
- फोटो : GONDA
गोंडा। भारत रत्न नानाजी देशमुख के प्रयास से स्थापित दीनदयाल शोध संस्थान को प्रतिष्ठित एनसीसी समष्टि सेवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। शनिवार को हैदराबाद में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत व एनसीसी फाउंडेशन के अध्यक्ष पद्मश्री एवीएस राजू ने यह पुरस्कार प्रदान किया। संस्थान की ओर से उसके संगठन सचिव अभय महाजन ने पुरस्कार स्वीकार किया। प्रशस्ति पत्र ीके साथ एक करोड़ रुपये की राशि भी पुरस्कार स्वरूप दी गई है।
समारोह में डॉ. मोहन राव भागवत ने पुरस्कार प्रदान करते हुए संस्थान के संस्थापक राष्ट्रऋषि नानाजी को भावभीनी श्रद्धांजली दी और कहा कि उन्होंने देश में सेवा व विकास के नए प्रतिमान गढ़े। सरसंघचालक ने नानाजी के जीवट व्यक्तित्व को रेखांकित करते हुए उनके शुरुआती जीवन का एक उद्धरण सुनाया। उन्होंने बताया कि एक बार संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार नानाजी के निवास पर गए।
वहां एक स्वतंत्रता सेनानी की तस्वीर के नीचे एक पंक्ति लिखी थी - मैं अपने देश के लिए कैसे मर सकता हूं? इस पर डॉक्टर ने नानाजी से कहा कि इस पंक्ति को बदल दो और स्वयं से पूछो कि मैं देश के लिए कैसे जी सकता हूं। बस, वहीं से नानाजी ने देश के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया था। नानाजी की पुण्यतिथि पर संस्थान के कार्यक्रम में चित्रकूट में आम गांव वासियों की जो सहभागिता रहती है वही नानाजी के प्रति उनके सम्मान का एक जीता जागता उदाहरण है।
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एनसीसी कंपनी व फाउंडेशन के अध्यक्ष व मुखिया एवीएस राजू ने डीआरआई के कामकाज की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी टीम ने संस्थान का चयन देशभर में बहुत से संगठनों की समीक्षा करने के बाद किया है। नानाजी के नेतृत्व में संस्थान ने जिस तरह ग्राम विकास का मॉडल विकसित किया और उसके आधार पर विकास किया, वह अनुकरणीय है।
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समारोह में डॉ. मोहन राव भागवत ने पुरस्कार प्रदान करते हुए संस्थान के संस्थापक राष्ट्रऋषि नानाजी को भावभीनी श्रद्धांजली दी और कहा कि उन्होंने देश में सेवा व विकास के नए प्रतिमान गढ़े। सरसंघचालक ने नानाजी के जीवट व्यक्तित्व को रेखांकित करते हुए उनके शुरुआती जीवन का एक उद्धरण सुनाया। उन्होंने बताया कि एक बार संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार नानाजी के निवास पर गए।
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वहां एक स्वतंत्रता सेनानी की तस्वीर के नीचे एक पंक्ति लिखी थी - मैं अपने देश के लिए कैसे मर सकता हूं? इस पर डॉक्टर ने नानाजी से कहा कि इस पंक्ति को बदल दो और स्वयं से पूछो कि मैं देश के लिए कैसे जी सकता हूं। बस, वहीं से नानाजी ने देश के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया था। नानाजी की पुण्यतिथि पर संस्थान के कार्यक्रम में चित्रकूट में आम गांव वासियों की जो सहभागिता रहती है वही नानाजी के प्रति उनके सम्मान का एक जीता जागता उदाहरण है।
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एनसीसी कंपनी व फाउंडेशन के अध्यक्ष व मुखिया एवीएस राजू ने डीआरआई के कामकाज की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी टीम ने संस्थान का चयन देशभर में बहुत से संगठनों की समीक्षा करने के बाद किया है। नानाजी के नेतृत्व में संस्थान ने जिस तरह ग्राम विकास का मॉडल विकसित किया और उसके आधार पर विकास किया, वह अनुकरणीय है।