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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   CRO absence of the trial to hanging 306 suits

सीआरओ के न होने से 306 वादों की सुनवाई लटकी

Fri, 11 Dec 2015 11:20 PM IST
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 11 Dec 2015 11:20 PM IST
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कलेक्ट्रेट में चीफ रेवेन्यू अफसर (सीआरओ) के  कार्यालय में 306 वादों की सुनवाई लटकी है। सीआरओ की कुर्सी आठ माह से खाली चल रही है। चीफ रेवेन्यू अफसर के न होने से 306 वादकारियों को जहां सिर्फ तारीख पर तारीख मिल रही है, वहीं राजस्व से संबंधित कई तरह के कार्य ठप पड़े हैं।
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कलेक्ट्रेट में इससे पहले सीआरओ की पोस्ट पर अनिल कुमार तैनात थे। बीती 31 मार्च को शासन ने उनका गैर जनपद तबादला कर दिया।

तब से आज तक करीब आठ माह होने को हैं, शासन ने इस पद के लिए न तो किसी अधिकारी को भेजने की सुधि ली और न ही इस ओर लोकल स्तर पर ही ठोस प्रयास किए गए।

कार्यालय में आवासीय, बागवानी व कृषि पट्टा निरस्तीकरण, नक्शा दुरुस्ती व एससी-एसटी भूमि बिक्री के प्रमीशन के अलावा भू-लेख से संबंधित अन्य कार्य प्रभावित हैं।
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कार्यालय में करीब 306 वादों के निस्तारण की फाइलें लटकी पड़ी हैं। वादकारियों को सिर्फ तारीख दी जा रही है।

मुख्य राजस्व अधिकारी के न होने से वादकारी को कार्यालय से सिर्फ तारीख मिल रही है। उनके मामलों की सुनवाई नहीं हो पा रही है।

इस बाबत वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि वादकारी सुनील कुमार की ओर से उन्होंने सीआरओ के कार्यालय में एक नक्शा दुरुस्ती का वाद दायर किया था।
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फाइल आदेश में लगी थी, लेकिन सीआरओ का इसी बीच में तबादला हो गया। तब से मामला कोर्ट में लटका हुआ है। ऐसे में वादकारी दौड़ कर आता है और फिर उसे खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।

वहीं, बीते दिन तरबगंज के रमेश कुमार सीआरओ से पट्टे की जमीन के बाबत शिकायत करने आये थे, लेकिन अधिकारी के न होने पर उन्हें मायूस लौटना पड़ा।

सीआरओ के न होने से वादकारियों के साथ अधिवक्ताओं को भी दिक्कतें हो रही हैं। अधिवक्ता अशोक कुमार का कहना है कि वकीलों की अपने वादकारी को समय से न्याय दिलाने की जवाबदेही होती है।

जब अधिकारी ही नही होंगे तो अधिवक्ता वादों की क्या पैरवी करेंगे। अधिवक्ता चंद्र प्रकाश का कहना है कि कलेक्ट्रेट में वादकारियों की सुनवाई के लिए लंबे समय तक अधिकारियों की तैनाती न किया जाना गंभीर समस्या है।


मुख्य राजस्व अधिकारी के न्यायालय से जुड़े कुछ मामलों की सुनवाई उनके (एडीएम) न्यायालय व डीडीसी के न्यायालय पर की जाती है।

कुछ मामले हैं जिन्हें केवल सीआरओ के न्यायालय से ही निपटाया जा सकता है। सीआरओ की कुर्सी खाली होने की सूचना जिलाधिकारी की ओर से शासन को भेजी जा चुकी है।
-त्रिलोकी सिंह, अपर जिलाधिकारी गोंडा
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