{"_id":"5c8fd71cbdec221425446329","slug":"youth-immolates-self","type":"story","status":"publish","title_hn":"आर्थिक तंगी से परेशान शिक्षामित्र ने खुद को जिंदा जलाया","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
आर्थिक तंगी से परेशान शिक्षामित्र ने खुद को जिंदा जलाया
Mon, 18 Mar 2019 11:06 PM IST
रमेश रमेश
amar ujala
amar ujala
Published by: रमेश रमेश
Updated Mon, 18 Mar 2019 11:06 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आर्थिक तंगी से परेशान एक और शिक्षामित्र ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। हलधरमऊ ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय मलौना प्रथम में कार्यरत शिक्षामित्र ने रविवार की रात में खुद को आग लगाकर जान दे दी। बताया जा रहा है कि समायोजन निरस्त होने के बाद वह लगातार अवसाद का शिकार था।
करनैलगंज कोतवाली क्षेत्र के हलधरमऊ ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय मलौना प्रथम में प्रताप नरायण देव पांडेय शिक्षामित्र के पद पर कार्यरत थे। समायोजन होने के दौरान प्रताप नारायण को कटरा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय देवापसिया में सहायक अध्यापक पद पर तैनाती मिली थी।
बाद में समायोजन निरस्त होने के बाद वह फिर से अपने मूल विद्यालय में वापस पहुंच गए थे। बताया जा रहा है कि समायोजन निरस्त होने के बाद से ही प्रताप नरायण अवसाद का शिकार थे। दस हजार रुपये मानदेय में परिवार का भरण पोषण करना उनके लिए मुश्किल होने लगा।
विज्ञापन
परिवार में उनकी माता जय देवी, पिता रामसेवक पांडेय, पत्नी उमादेवी, बेटा आकाश 12 वर्ष, बेटी आंचल 8 वर्ष व प्रांजल 3 वर्ष थीं। समायोजन निरस्त होने के बाद अवसाद से ग्रस्त शिक्षामित्र को साथियों ने काफी समझाने बुझाने का प्रयास किया।
मगर प्रताप नरायण नौकरी जाने के गम को भुला नहीं पाए थे। परिवारीजनों के मुताबिक रविवार की देर रात जब सब लोग खाना खाने के बाद सोने चले गए तो प्रताप नरायण ने अपने कमरे में खुद पर केरोसिन डालकर आग के हवाले कर दिया।
कमरे से धुंआ उठता देख जब परिवार के लोग दौड़े तो प्रताप नरायण को पूरी तरह से आग की लपटों से घिरा पाया। जब तक आग बुझाने का प्रयास किया जाता तब तक प्रताप नरायण की मौत हो गई। परिवारीजनों ने पोस्टमार्टम कराने के बजाय अंतिम संस्कार कर दिया।
हलधरमऊ शिक्षामित्र संघ के श्याम बाबा भारती ने मृतक शिक्षामित्र के परिवार को आर्थिक सहायता की पहल करते हुए संगठन की तरफ से उनके परिवार को सहायता देने की बात कही है तथा शिक्षामित्रों से सहयोग की अपील की है।
जुलाई 2017 में समायोजन निरस्त होने के बाद से ही शिक्षामित्र अवसाद से मौत को गले लगा रहे हैं। अब तक 16 शिक्षामित्रों की मौत विभिन्न कारणों से हो चुकी है, यह अलग बात है कि किसी को अभी तक कोई आर्थिक मदद नही मिली है।
जुलाई 2017 में समायोजन निरस्त होने के बाद रुपईडीह ब्लाक के रवि प्रकाश सिंह, हलधरमऊ शिवनरेश पांडे, रुपईडीह के संजू कनौजिया, झंझरी की प्रतिभा शुक्ला, रुपईडीह के विष्णु कुमार, झंझरी की गीता सिंह, करनैलगंज की मनोरमा सिंह, बेलसर की उमा देवी चौबे, परसपुर के आनंद कुमार, वजीरगंज के दानबहादुर, नवाबगंज के भरतलाल जायसवाल, वजीरगंज के विवेक कुमार, इंटियाथोक के राम भवन यादव, रुपईडीह के आनंद प्रकाश व हलधरमऊ के गौरव प्रताप पांडे की मौत हो चुकी है। इसमें तीन लोगों की मौत आत्महत्या से, दस लोगों की मौत हार्टअटैक से मौत हुई है। दो लोग हादसे के शिकार हुए।
विज्ञापन
करनैलगंज कोतवाली क्षेत्र के हलधरमऊ ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय मलौना प्रथम में प्रताप नरायण देव पांडेय शिक्षामित्र के पद पर कार्यरत थे। समायोजन होने के दौरान प्रताप नारायण को कटरा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय देवापसिया में सहायक अध्यापक पद पर तैनाती मिली थी।
विज्ञापन
बाद में समायोजन निरस्त होने के बाद वह फिर से अपने मूल विद्यालय में वापस पहुंच गए थे। बताया जा रहा है कि समायोजन निरस्त होने के बाद से ही प्रताप नरायण अवसाद का शिकार थे। दस हजार रुपये मानदेय में परिवार का भरण पोषण करना उनके लिए मुश्किल होने लगा।
विज्ञापन
परिवार में उनकी माता जय देवी, पिता रामसेवक पांडेय, पत्नी उमादेवी, बेटा आकाश 12 वर्ष, बेटी आंचल 8 वर्ष व प्रांजल 3 वर्ष थीं। समायोजन निरस्त होने के बाद अवसाद से ग्रस्त शिक्षामित्र को साथियों ने काफी समझाने बुझाने का प्रयास किया।
मगर प्रताप नरायण नौकरी जाने के गम को भुला नहीं पाए थे। परिवारीजनों के मुताबिक रविवार की देर रात जब सब लोग खाना खाने के बाद सोने चले गए तो प्रताप नरायण ने अपने कमरे में खुद पर केरोसिन डालकर आग के हवाले कर दिया।
कमरे से धुंआ उठता देख जब परिवार के लोग दौड़े तो प्रताप नरायण को पूरी तरह से आग की लपटों से घिरा पाया। जब तक आग बुझाने का प्रयास किया जाता तब तक प्रताप नरायण की मौत हो गई। परिवारीजनों ने पोस्टमार्टम कराने के बजाय अंतिम संस्कार कर दिया।
हलधरमऊ शिक्षामित्र संघ के श्याम बाबा भारती ने मृतक शिक्षामित्र के परिवार को आर्थिक सहायता की पहल करते हुए संगठन की तरफ से उनके परिवार को सहायता देने की बात कही है तथा शिक्षामित्रों से सहयोग की अपील की है।
जुलाई 2017 में समायोजन निरस्त होने के बाद से ही शिक्षामित्र अवसाद से मौत को गले लगा रहे हैं। अब तक 16 शिक्षामित्रों की मौत विभिन्न कारणों से हो चुकी है, यह अलग बात है कि किसी को अभी तक कोई आर्थिक मदद नही मिली है।
जुलाई 2017 में समायोजन निरस्त होने के बाद रुपईडीह ब्लाक के रवि प्रकाश सिंह, हलधरमऊ शिवनरेश पांडे, रुपईडीह के संजू कनौजिया, झंझरी की प्रतिभा शुक्ला, रुपईडीह के विष्णु कुमार, झंझरी की गीता सिंह, करनैलगंज की मनोरमा सिंह, बेलसर की उमा देवी चौबे, परसपुर के आनंद कुमार, वजीरगंज के दानबहादुर, नवाबगंज के भरतलाल जायसवाल, वजीरगंज के विवेक कुमार, इंटियाथोक के राम भवन यादव, रुपईडीह के आनंद प्रकाश व हलधरमऊ के गौरव प्रताप पांडे की मौत हो चुकी है। इसमें तीन लोगों की मौत आत्महत्या से, दस लोगों की मौत हार्टअटैक से मौत हुई है। दो लोग हादसे के शिकार हुए।