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इंदिरा आवास योजना में 3.74 करोड़ रुपये का गोलमाल
अमर उजाला ब्यूरो/गोंडा
Updated Thu, 20 Apr 2017 11:34 PM IST
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सरकार भले ही हर गरीब को पक्का मकान उपलब्ध कराने का दावा करे लेकिन इस दावे को क्रियान्वित कराने वाले अफसर सरकार के मंसूबों पर पानी फेर रहे हैं। अफसरों की इसी लापरवाही का खामियाजा जिले के गरीब परिवारों को भुगताना पड़ रहा है।
वित्तीय वर्ष 2013-14 से लेकर 2015-16 तक इंदिरा आवास का लाभ पाने वाले 1069 लाभार्थियों को सत्यापन के अभाव में आवास की दूसरी किश्त चार साल बाद भी नहीं जारी की जा सकी और आवास के लिए भेजी गई 3.74 करोड़ रुपये की राशि का गोलमाल कर ली गई। अफसरों के कारनामे के चलते गरीबों के आवास को छत नहीं मयस्सर हो सकी और पक्के मकान में रहने का उनका सपना बिखर गया।
गरीब परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के लिए इंदिरा आवास योजना के अतंर्गत वित्तीय वर्ष 2013-14 में 5988, वित्तीय वर्ष 2014-15 में 10833 व वित्तीय वर्ष 2015-16 में 8954 पात्रों समेत कुल 25785 परिवारों को आवास का आवंटन किया गया था। इसके तहत आवास का लाभ पाने वाले परिवारों को आवास निर्माण के लिए 70 हजार रुपये की राशि दिए जाने का प्रावधान था।
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नियमों के अनुसार पहली किश्त के रूप में मिलने वाले 35 हजार रुपये से लाभार्थी परिवारों को दीवार स्तर तक का काम पूरा कराना था। इसके बाद ब्लॉक स्तरीय अफसरों को इस आवास के निर्माण की जांच कर उसकी सत्यापन रिपोर्ट मुख्यालय को भेजनी थी।
तब जाकर आवास की दूसरी किश्त के रूप में छत लगाने के लिए लाभार्थी को 35 हजार रुपये दिए जाने थे लेकिन आवास की दूसरी किश्त अफसरों के सत्यापन के फेर में फंस गई। अफसरों ने 24717 आवासों की सत्यापन कर उसकी रिपोर्ट तो भेज दी लेकिन 1069 इंदिरा आवास का सत्यापन नहीं हो सका। जिम्मेदार अफसरों ने न तो इन आवासों का सत्यापन किया और न ही इसके लाभार्थियों को छत लगाने के लिए आवास की दूसरी किश्त का आवंटन किया गया।
ऐसे में यह 1069 इंदिरा आवास आज भी बिना छत के अधूरे खड़े हैं। जबकि इन आवासों के रूप में जिले को आवंटित की गई 3.74 करोड़ रुपये की धनराशि को गोलमाल कर लिया गया। अफसरों की इस लापरवाही से आवास का लाभ पाने वाले गरीब परिवारों का पक्के मकान में रहने का सपना बिखर कर चकनाचूर हो गया।
90 दिन की मजदूरी भी हड़पी
इंदिरा आवास पाने वाले परिवार को आवास निर्माण के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी योजना के अतंर्गत 90 दिन का रोजगार भी उपलब्ध कराया जाना था। लेकिन अधिकांश लाभार्थियों की 90 दिन की मजदूरी भी जिम्मेदारों ने हड़प ली और उनके अवास अधूरे रह गए।
वित्तीय वर्ष 2013-14 से 2015-16 तक अपूर्ण आवासों की ब्लॉकवार स्थिति
विकासखंड स्वीकृत आवास पूर्ण आवास अपूर्ण आवास
तरबगंज 1720 1563 157
बेलसर 1565 1446 119
वजीरगंज 1573 1461 112
इटियाथोक 1658 1554 104
नवाबगंज 1305 1227 78
रुपईडीह 2916 2743 173
हलधरमऊ 1826 1735 98
मुजेहना 810 772 38
बभनजोत 362 346 16
छपिया 1350 1292 58
पंडरीकृपाल 808 778 30
मनकापुर 1897 1838 59
करनैलगंज 1339 1329 10
कटरा बाजार 2702 2688 14
झंझरी 2347 2337 10
परसपुर 1607 1600 07
योग- 25785 24716 1069
तीन वित्तीय वर्षों में जिले के 16 विकास खंडों में 25785 इंदिरा आवास का आवंटन किया था जिसमें से 24716 आवासों के पूर्ण होने की रिपोर्ट साफ्टवेयर पर फीड कराई गई है। शेष 1069 आवास अब भी अधूरे हैं। इसकी जांच कराई जा रही है। -वीरपाल, परियोजना निदेशक डीआरडीए
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वित्तीय वर्ष 2013-14 से लेकर 2015-16 तक इंदिरा आवास का लाभ पाने वाले 1069 लाभार्थियों को सत्यापन के अभाव में आवास की दूसरी किश्त चार साल बाद भी नहीं जारी की जा सकी और आवास के लिए भेजी गई 3.74 करोड़ रुपये की राशि का गोलमाल कर ली गई। अफसरों के कारनामे के चलते गरीबों के आवास को छत नहीं मयस्सर हो सकी और पक्के मकान में रहने का उनका सपना बिखर गया।
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गरीब परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के लिए इंदिरा आवास योजना के अतंर्गत वित्तीय वर्ष 2013-14 में 5988, वित्तीय वर्ष 2014-15 में 10833 व वित्तीय वर्ष 2015-16 में 8954 पात्रों समेत कुल 25785 परिवारों को आवास का आवंटन किया गया था। इसके तहत आवास का लाभ पाने वाले परिवारों को आवास निर्माण के लिए 70 हजार रुपये की राशि दिए जाने का प्रावधान था।
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नियमों के अनुसार पहली किश्त के रूप में मिलने वाले 35 हजार रुपये से लाभार्थी परिवारों को दीवार स्तर तक का काम पूरा कराना था। इसके बाद ब्लॉक स्तरीय अफसरों को इस आवास के निर्माण की जांच कर उसकी सत्यापन रिपोर्ट मुख्यालय को भेजनी थी।
तब जाकर आवास की दूसरी किश्त के रूप में छत लगाने के लिए लाभार्थी को 35 हजार रुपये दिए जाने थे लेकिन आवास की दूसरी किश्त अफसरों के सत्यापन के फेर में फंस गई। अफसरों ने 24717 आवासों की सत्यापन कर उसकी रिपोर्ट तो भेज दी लेकिन 1069 इंदिरा आवास का सत्यापन नहीं हो सका। जिम्मेदार अफसरों ने न तो इन आवासों का सत्यापन किया और न ही इसके लाभार्थियों को छत लगाने के लिए आवास की दूसरी किश्त का आवंटन किया गया।
ऐसे में यह 1069 इंदिरा आवास आज भी बिना छत के अधूरे खड़े हैं। जबकि इन आवासों के रूप में जिले को आवंटित की गई 3.74 करोड़ रुपये की धनराशि को गोलमाल कर लिया गया। अफसरों की इस लापरवाही से आवास का लाभ पाने वाले गरीब परिवारों का पक्के मकान में रहने का सपना बिखर कर चकनाचूर हो गया।
90 दिन की मजदूरी भी हड़पी
इंदिरा आवास पाने वाले परिवार को आवास निर्माण के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी योजना के अतंर्गत 90 दिन का रोजगार भी उपलब्ध कराया जाना था। लेकिन अधिकांश लाभार्थियों की 90 दिन की मजदूरी भी जिम्मेदारों ने हड़प ली और उनके अवास अधूरे रह गए।
वित्तीय वर्ष 2013-14 से 2015-16 तक अपूर्ण आवासों की ब्लॉकवार स्थिति
विकासखंड स्वीकृत आवास पूर्ण आवास अपूर्ण आवास
तरबगंज 1720 1563 157
बेलसर 1565 1446 119
वजीरगंज 1573 1461 112
इटियाथोक 1658 1554 104
नवाबगंज 1305 1227 78
रुपईडीह 2916 2743 173
हलधरमऊ 1826 1735 98
मुजेहना 810 772 38
बभनजोत 362 346 16
छपिया 1350 1292 58
पंडरीकृपाल 808 778 30
मनकापुर 1897 1838 59
करनैलगंज 1339 1329 10
कटरा बाजार 2702 2688 14
झंझरी 2347 2337 10
परसपुर 1607 1600 07
योग- 25785 24716 1069
तीन वित्तीय वर्षों में जिले के 16 विकास खंडों में 25785 इंदिरा आवास का आवंटन किया था जिसमें से 24716 आवासों के पूर्ण होने की रिपोर्ट साफ्टवेयर पर फीड कराई गई है। शेष 1069 आवास अब भी अधूरे हैं। इसकी जांच कराई जा रही है। -वीरपाल, परियोजना निदेशक डीआरडीए