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Kushinagar News: चारों तरफ तबाही का मंजर... आंखों के सामने बह गए अपने

Sat, 29 Aug 2026 01:56 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 29 Aug 2026 01:56 AM IST
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A scene of devastation all around... watched helplessly as loved ones were swept away.
कुशीनगर। नेपाल में तीन दिन पहले आए भीषण सैलाब ने कुशीनगर के सुधियानी और पिपराइच के लोगों के लिए ऐसी त्रासदी छोड़ दी है, जिसे वे चाहकर भी भुला नहीं पा रहे हैं। पानी का सैलाब देखते ही देखते प्लांट और उसके आसपास के इलाकों में घुस गया। कुछ ही देर में चीख-पुकार और अफरातफरी मच गई,जो जहां था, वहीं जान बचाने की जद्दोजहद में जुट गया। प्लांट में ड्यूटी कर रहे कर्मचारी तो किसी तरह सुरक्षित निकल आए, लेकिन प्लांट के पास बने आवास में काम कर रहे कई लोग पानी के तेज बहाव में कहां बह गए, इसका अब तक पता नहीं चल सका है।
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काठमांडो के एक होटल में ठहरे पिपराइच निवासी आशुतोष मणि उपाध्याय ने शुक्रवार को व्हाट्सएप कॉल पर आपबीती सुनाई। उनकी आवाज में खौफ साफ महसूस हो रहा था। बोले, 26 अगस्त की सुबह करीब 9:30 बजे जो हुआ, उसे दिल और दिमाग से निकाल पाना मुश्किल है। चारों तरफ पानी ही पानी था। देखते ही देखते हालात बेकाबू हो गए। ऐसा लगा कि अब जान बचना मुश्किल है।’ आशुतोष ने बताया कि वह आठ लोग एक साथ नेपाल आए थे। सैलाब के बाद कंपनी ने कर्मचारियों को सुरक्षित निकालने की कवायद शुरू की। सेना के हेलीकॉप्टर की मदद से काठमांडो लाया गया और एक होटल में ठहराया गया है,लेकिन साथियों से बिछड़ने का दर्द उनको झकझोर रहा है। ‘मेरे तीन साथी अभी भी लापता हैं। उनका कोई पता नहीं चल पा रहा। यह सोचकर ही मन कांप जाता है कि आखिर वे कहां होंगे।’
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चारों तरफ तबाही का मंजर है। जो कुछ आंखों के सामने देखा, उसे जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे।
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घर पहुंचने की बेचैनी, लेकिन रास्ते बंद
-काठमांडो के होटल में सुरक्षित पहुंचने के बाद भी आशुतोष और उनके साथियों की चिंता कम नहीं हुई है। घर पहुंचने की बेचैनी है, लेकिन फिलहाल नेपाल से निकलने का रास्ता नहीं बन पा रहा है। परिवार के लोग लगातार उनकी सलामती को लेकर परेशान हैं। दो दिन बाद घरवालों से संपर्क हो पाया तो उनकी चिंता कुछ कम हुई। होटल में कंपनी की ओर से भोजन-पानी की व्यवस्था की गई है। इसके बावजूद सैलाब की भयावह तस्वीरें उनकी आंखों के सामने घूम रही हैं। बोले, ‘कंपनी ने हमारे रहने और खाने की व्यवस्था की है। लेकिन मन किसी चीज में नहीं लग रहा। अपने साथियों के बिछड़ने का दुख बहुत बड़ा है। जिस मंजर को देखा है,
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