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बसपा नेता के तीन हत्यारों को उम्रकैद
बलरामपुर/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 17 Feb 2016 11:21 PM IST
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अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय ने हत्या के तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वर्ष 2007 में उतरौला के ग्राम पचौथा स्थित चाय की दुकान पर बसपा के उतरौला विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष की प्रधानी चुनाव की रंजिश को लेकर हत्या कर दी गई थी। सजा पाने वाले तीनों अभियुक्त इसी हत्या के मामले में आरोपी थे।
उतरौला कोतवाली क्षेत्र के ग्राम पचौथा निवासी विनोद कुमार ने 25 नवंबर 2007 को कोतवाली में रिपोर्ट लिखाई थी। वादी मुकदमा का कहना था कि प्रधानी चुनाव की रंजिश को लेकर उसके पिता बसपा के उतरौला विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष जगराम को सुबह 8 बजे गांव की प्रधान बदरुलनिशां उर्फ नजमा के पुत्र हलीम द्वारा ललकारने पर लाल बहादुर ने पकड़ लिया और तनवीर ने चाकू से गोद डाला।
इन लोगों ने उसके पिता को जातिसूचक गालियां भी दीं। पुलिस ने हत्या के प्रयास की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। इलाज के दौरान जगराम की मौत हो गई।
पुलिस ने हत्या की धारा की बढ़ोतरी करते हुए आरोपियों के एक अन्य सहयोगी ग्राम पिपरी कोल्हुई निवासी पुल्लन पुत्र बेचू को भी आरोपी मानते हुए चारों के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
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मुकदमा के परीक्षण के दौरान वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी ओम प्रकाशमणि त्रिपाठी व सरकारी अधिवक्ता रवींद्र यादव ने 10 गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया।
दोनों पक्षों की दलील सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद न्यायाधीश सुनील कुमार ने हलीम, लाल बहादुर व तनवीर को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास व 20-20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर आरोपियों को एक-एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
साक्ष्यों के अभाव में न्यायाधीश ने पुल्लन को दोषमुक्त कर दिया। इस मामले में एक आरोपी हलीम ने 95 प्रतिशत लकवा ग्रस्त होने पर इलाज के लिए प्रार्थना पत्र दिया, जिस पर न्यायाधीश ने आरोपी को समुचित इलाज मुहैया कराने का आदेश जेल अधीक्षक को दिया है।
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उतरौला कोतवाली क्षेत्र के ग्राम पचौथा निवासी विनोद कुमार ने 25 नवंबर 2007 को कोतवाली में रिपोर्ट लिखाई थी। वादी मुकदमा का कहना था कि प्रधानी चुनाव की रंजिश को लेकर उसके पिता बसपा के उतरौला विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष जगराम को सुबह 8 बजे गांव की प्रधान बदरुलनिशां उर्फ नजमा के पुत्र हलीम द्वारा ललकारने पर लाल बहादुर ने पकड़ लिया और तनवीर ने चाकू से गोद डाला।
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इन लोगों ने उसके पिता को जातिसूचक गालियां भी दीं। पुलिस ने हत्या के प्रयास की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। इलाज के दौरान जगराम की मौत हो गई।
पुलिस ने हत्या की धारा की बढ़ोतरी करते हुए आरोपियों के एक अन्य सहयोगी ग्राम पिपरी कोल्हुई निवासी पुल्लन पुत्र बेचू को भी आरोपी मानते हुए चारों के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
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मुकदमा के परीक्षण के दौरान वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी ओम प्रकाशमणि त्रिपाठी व सरकारी अधिवक्ता रवींद्र यादव ने 10 गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया।
दोनों पक्षों की दलील सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद न्यायाधीश सुनील कुमार ने हलीम, लाल बहादुर व तनवीर को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास व 20-20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर आरोपियों को एक-एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
साक्ष्यों के अभाव में न्यायाधीश ने पुल्लन को दोषमुक्त कर दिया। इस मामले में एक आरोपी हलीम ने 95 प्रतिशत लकवा ग्रस्त होने पर इलाज के लिए प्रार्थना पत्र दिया, जिस पर न्यायाधीश ने आरोपी को समुचित इलाज मुहैया कराने का आदेश जेल अधीक्षक को दिया है।