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दुराचारी को आजीवन कारावास

Fri, 15 Jul 2016 11:32 PM IST
अमर उजाला/बलरामपुर
अमर उजाला/बलरामपुर Updated Fri, 15 Jul 2016 11:32 PM IST
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life imprisonment of the Vicious
Jail
एफटीसी प्रथम ने दुराचार के आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश ने आरोपी को 50 हजार रुपये जुर्माना अदा करने का आदेश भी दिया है। जुर्माने की आधी रकम पीड़िता को प्रतिकर के रूप में दी जाएगी।
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देहात कोतवाली क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति ने थाने पर प्रार्थना पत्र दिया था कि उसकी विवाहिता लड़की को रामरुचि व उनके दो पुत्र राकेश व पेशकार 13 जुलाई 2006 को अगवा कर ले गए। थाने पर मुकदमा न लिखे जाने पर वादी ने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज हुआ, लेकिन विवेचक ने फाइनल रिपोर्ट न्यायालय में लगा दी।
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फाइनल रिपोर्ट का विरोध करते हुए वादी ने पीड़िता व अपना शपथ पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। गवाहों के बयान के आधार पर न्यायिक मजिस्ट्रेट ने राकेश व पेशकार को दुराचार व अगवा करने के आरोप में न्यायालय में तलब किया। राकेेश के गैर हाजिर होने पर उसकी पत्रावली अलग कर दी गई।
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पेशकार के विरुद्ध 14 मई 2010 को मामला परीक्षण के लिए सत्र न्यायालय भेजा गया। सरकारी अधिवक्ता रवींद्र यादव ने पांच गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद एफटीसी प्रथम सुनील कुमार ने पेशकार को दुराचार व महिला को अगवा करने का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास व 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।


जुर्माना अदा न करने पर आरोपी को 30 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेेगा। न्यायाधीश ने अर्थदंड में से आधी रकम 25 हजार रुपये पीड़िता को प्रतिकर के रूप में देने का आदेश दिया है।
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