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मादक पदार्थों के तीन अंतरराष्ट्रीय तस्कर गिरफ्तार

Sun, 30 Oct 2022 11:22 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 30 Oct 2022 11:22 PM IST
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गोंडा में गिरफ्तार आरोपियों के बारे में जानकारी देते एसपी आकाश तोमर। -संवाद - फोटो : GONDA
गोंडा। स्काइप एप के जरिए यूके, यूएसए समेत अन्य देशों में प्रतिबंधित नशीली दवाएं बेचने के अंतरराष्ट्रीय रैकेट का भंडाफोड़ करके पुलिस ने शनिवार देर रात लखनऊ रोड से सरगना समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से नशीली दवा अल्प्रासेफ 540 टैबलेट, कार व अन्य काफी सामान बरामद हुआ है।
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एसपी आकाश तोमर ने बताया कि मादक पदार्थों का ऑनलाइन कारोबार करने वालों की धरपकड़ के लिए एएसपी शिवराज के निर्देशन में साइबर, सर्विलांस व कोतवाली नगर की टीम को लगाया गया था। सर्विलांस टीम की मदद से शनिवार देर रात लखनऊ रोड पर एक एजेंसी के पास से कार सवार अब्दुल हादी व अब्दुल बारी निवासी खान कॉलोनी निकट जिगर इंटर कॉलेज व विशाल श्रीवास्तव निवासी रिसिहा पुरवा विभूतिखंड लखनऊ को पुलिस ने दबोच लिया। एसपी ने बताया कि अब्दुल हादी के पास से नशीली दवाओं का जखीरा बरामद हुआ। इसके अलावा नशीली दवा अल्प्रासेफ 540 टैबलेट, एक लैपटॉप, चार एंड्राइड मोबाइल फोन, एक हार्ड डिस्क, चार एटीएम कार्ड, एक पैन कार्ड, एक आधार कार्ड, एक ड्राइविंग लाइसेंस, दो वोटर आईडीकार्ड, 3800 रुपये नकदी व एक कार बरामद हुई।
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एसपी ने बताया कि अब्दुल हादी नशीली दवाओं को बतौर सैंपल अपने पास रखकर उनकी फोटो स्काइप एप के जरिए ग्राहकों को भेजता था। एसपी ने बताया कि बरामद लैपटॉप की जांच में पता चला कि गिरोह के सदस्य यूएसए व यूके में ऑनलाइन नशीली दवाओं का कारोबार करते हैं। अब्दुल हादी के पकड़े जाने से नशीली गोलियों के अंतरराष्ट्रीय साइबर रैकेट की महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। जिस पर पुलिस काम कर रही है। पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ कोतवाली नगर में एनडीपीएस एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
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पांच करोड़ का कारोबार कर दो करोड़ कमाया मुनाफा
पूछताछ में खुलासा हुआ कि अब्दुल हादी ने तीन साल पहले अमेरिका व यूरोपीय देशों में प्रतिबंधित नशीली दवाओं के बिक्री के लिए स्काइप एप पर अपना अकाउंट बनाकर ड्रग्स बायर और पिल्स प्रोवाइडर से संपर्क कर ऑनलाइन कारोबार शुरू किया था। एसपी के मुताबिक पूछताछ में तीनों अभियुक्तों ने बताया कि तीन साल में पांच करोड़ रुपये की प्रतिबंधित नशीली दवाओं की बिक्री ऑनलाइन की गई। जिससे उन्हें दो करोड़ रुपये मुनाफा हुआ है।

इस तरह से करते थे ऑनलाइन कारोबार
गिरोह के सदस्य विभिन्न एप्स से वर्चुअल नंबर क्रिएट कर अपनी मूल पहचान छिपाकर उन वर्चुअल नंबरों से व्हाट्सएप एकाउंट बनाकर व्हाइट पेज वेबसाइट से विदेशी कस्टमर्स का डाटा प्राप्त करते लेते थे। इस डाटा के माध्यम से कस्टमर्स/प्रोवाइडर से चैट/बात करके मांग के अनुसार लोकल वेंडर से कस्टमर को प्रतिबंधित नशीली दवाओं की आपूर्ति वहां के स्थानीय वेंडर से कराते थे। इस तरह से गिरोह के सदस्यों ने ऐसे विदेशी नागरिकों व लोकल वेंडर्स जिनका प्रतिबंधित नशीली दवाओं का स्टाक अमेरिका में उपलब्ध था। उनका डाटाबेस तैयार कर लिया था। वे गिरोह के सदस्यों के नियमित ग्राहक व विक्रेता बन गए थे। जिससे प्रतिबंधित नशीली दवाओं का ऑनलाइन व्यापार फल-फूल रहा था। विदेशी ग्राहक गिरोह के सदस्यों को पेपॉल, मनीग्राम, वेस्टर्न यूनियन व क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से ऑनलाइन ट्रांजक्शन करते थे।
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