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Gonda News: युवाओं को भी जकड़ रहा सीओपीडी
Wed, 19 Nov 2025 12:32 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Wed, 19 Nov 2025 12:32 AM IST
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गोंडा। 19 नवंबर को विश्व सीओपीडी दिवस मनाया जाता है। सीओपीडी यानी क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज—यह एक ऐसी गंभीर फेफड़ों की बीमारी है, जिसमें सांस की नलियां धीरे-धीरे संकरी होती जाती हैं और फेफड़ों की क्षमता लगातार घटती जाती है। अब चिंता की बात यह है कि यह बीमारी सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि तेजी से युवाओं में भी दस्तक दे रही है।
चिकित्सकों के अनुसार पहले ओपीडी में सीओपीडी के मरीजों में युवा बेहद कम होते थे, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। मेडिकल कॉलेज के चेस्ट फिजीशियन डॉ. रमेश पांडेय ने बताया कि 100 मरीजों की ओपीडी में 80 मरीज सांस की समस्या के आ रहे हैं। इसमें 40 युवा मरीज सीओपीडी जैसी लक्षणों के साथ पहुंच रहे हैं। बताया कि युवाओं की लाइफ स्टाइल में बदलाव इसका सबसे बड़ा कारण है। ऐसे मेें युवाओं को सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
युवाओं में बीमारी के बढ़ने के मुख्य कारण
– तंबाकू, बीड़ी-सिगरेट व वेपिंग का बढ़ता प्रयोग
– प्रदूषण और धूल-धुएं के संपर्क में रहना
– किचन में धुएं का अधिक संपर्क (विशेषकर महिलाओं में)
– बार-बार फेफड़ों में संक्रमण
– अस्थमा या एलर्जी का लंबा इतिहास
ये हैं लक्षण
– लगातार खांसी रहना
– सांस फूलना
– सीने में जकड़न
– बलगम का बढ़ना
– थोड़ी सी मेहनत में भी थकावट
हल्के में न लें सांस फूलने की समस्या
नीमा के जनरल सेक्रेटरी डॉ. महमूद आलम का कहना है कि सांस लेना जीवन है। इसे हल्के में न लें। लगातार खांसी या सांस फूलने को सामान्य न समझें, यह सीओपीडी की शुरुआत हो सकती है। समय रहते जांच और उपचार शुरू कर देने से बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए धूम्रपान छोड़ना और प्रदूषण से बचाव सबसे जरूरी है।
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चिकित्सकों के अनुसार पहले ओपीडी में सीओपीडी के मरीजों में युवा बेहद कम होते थे, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। मेडिकल कॉलेज के चेस्ट फिजीशियन डॉ. रमेश पांडेय ने बताया कि 100 मरीजों की ओपीडी में 80 मरीज सांस की समस्या के आ रहे हैं। इसमें 40 युवा मरीज सीओपीडी जैसी लक्षणों के साथ पहुंच रहे हैं। बताया कि युवाओं की लाइफ स्टाइल में बदलाव इसका सबसे बड़ा कारण है। ऐसे मेें युवाओं को सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
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युवाओं में बीमारी के बढ़ने के मुख्य कारण
– तंबाकू, बीड़ी-सिगरेट व वेपिंग का बढ़ता प्रयोग
– प्रदूषण और धूल-धुएं के संपर्क में रहना
– किचन में धुएं का अधिक संपर्क (विशेषकर महिलाओं में)
– बार-बार फेफड़ों में संक्रमण
– अस्थमा या एलर्जी का लंबा इतिहास
ये हैं लक्षण
– लगातार खांसी रहना
– सांस फूलना
– सीने में जकड़न
– बलगम का बढ़ना
– थोड़ी सी मेहनत में भी थकावट
हल्के में न लें सांस फूलने की समस्या
नीमा के जनरल सेक्रेटरी डॉ. महमूद आलम का कहना है कि सांस लेना जीवन है। इसे हल्के में न लें। लगातार खांसी या सांस फूलने को सामान्य न समझें, यह सीओपीडी की शुरुआत हो सकती है। समय रहते जांच और उपचार शुरू कर देने से बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए धूम्रपान छोड़ना और प्रदूषण से बचाव सबसे जरूरी है।
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