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Gonda News: नवजात का पहला प्राकृतिक टीका है कोलोस्ट्रम
Fri, 31 Jul 2026 11:13 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Fri, 31 Jul 2026 11:13 PM IST
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गोंडा। विश्व स्तनपान दिवस (1 अगस्त) के अवसर पर स्वास्थ्य विभाग ने जन्म के पहले घंटे में स्तनपान कराने की उपलब्धि को रेखांकित करते हुए अब छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने पर विशेष जोर दिया है। देवीपाटन मंडल में बीते वित्तीय वर्ष के दौरान जन्मे 3.26 लाख से अधिक नवजातों में से 3.18 लाख बच्चों को जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान कराया गया।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मंडल में कुल 3,26,040 शिशुओं का जन्म हुआ। इनमें गोंडा के 1,05,212, बहराइच के 98,959, बलरामपुर के 74,622 और श्रावस्ती के 39,810 नवजातों को जन्म के पहले घंटे में मां का दूध पिलाया गया। डीसीपीएम डॉ. आरपी सिंह ने बताया कि जन्म के बाद पहले छह माह तक शिशु को केवल मां का दूध ही दिया जाना चाहिए। मां का दूध शिशु को संपूर्ण पोषण देने के साथ दस्त, निमोनिया और कुपोषण जैसी बीमारियों से भी बचाता है।
सीएमओ डॉ. संतलाल पटेल ने बताया कि जन्म के तुरंत बाद निकलने वाला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) नवजात के लिए प्राकृतिक वैक्सीन की तरह कार्य करता है। इसमें मौजूद प्रतिरक्षा तत्व शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मंडलीय प्रबंधक राहुल पटेल ने बताया कि संस्थागत प्रसव के बाद तत्काल स्तनपान सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है। आशा कार्यकर्ता भी घर-घर जाकर माताओं को पहले छह माह तक केवल स्तनपान कराने और सही तकनीक की जानकारी दे रही हैं। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य प्रत्येक शिशु को जीवन के शुरुआती छह माह तक केवल मां का दूध उपलब्ध कराना है।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मंडल में कुल 3,26,040 शिशुओं का जन्म हुआ। इनमें गोंडा के 1,05,212, बहराइच के 98,959, बलरामपुर के 74,622 और श्रावस्ती के 39,810 नवजातों को जन्म के पहले घंटे में मां का दूध पिलाया गया। डीसीपीएम डॉ. आरपी सिंह ने बताया कि जन्म के बाद पहले छह माह तक शिशु को केवल मां का दूध ही दिया जाना चाहिए। मां का दूध शिशु को संपूर्ण पोषण देने के साथ दस्त, निमोनिया और कुपोषण जैसी बीमारियों से भी बचाता है।
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सीएमओ डॉ. संतलाल पटेल ने बताया कि जन्म के तुरंत बाद निकलने वाला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) नवजात के लिए प्राकृतिक वैक्सीन की तरह कार्य करता है। इसमें मौजूद प्रतिरक्षा तत्व शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मंडलीय प्रबंधक राहुल पटेल ने बताया कि संस्थागत प्रसव के बाद तत्काल स्तनपान सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है। आशा कार्यकर्ता भी घर-घर जाकर माताओं को पहले छह माह तक केवल स्तनपान कराने और सही तकनीक की जानकारी दे रही हैं। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य प्रत्येक शिशु को जीवन के शुरुआती छह माह तक केवल मां का दूध उपलब्ध कराना है।