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तीन अरब से बनेगी शहर में सीवर लाइन
amar ujala
Updated Wed, 14 Jun 2017 11:18 PM IST
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देश भर से आई स्वच्छता अभियान की सर्वे रिपोर्ट में हमारा गोंडा जिला सबसे गंदा है। यह बात पूरा देश जान चुका है। लेकिन अब इस दाग के धुलने की उम्मीद जगी है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा गोंडा में सीवर लाइन के लिए 325 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाकर नीति आयोग के पास भेजी गई थी।
सूत्रों के मुताबिक इस प्रोजेक्ट पर अगले कुछ दिनों नीति आयोग फैसला कर सकता है। बावजूद इसके इस प्रोजेक्ट को लेकर न तो अधिकारी संजीदा हैं, न ही हमारे जिले के जनप्रतिनिधि। यही वजह है कि सीवर लाइन प्रोजेक्ट की फाइल की न तो कोई पैरवी हो रही है न ही इसे भारत सरकार के नीति आयोग से पास करवाए जाने की कोई पहल।
एक महीने से ऊपर बीतने को हैं और इसकी फाइल भारत सरकार के नीति आयोग में पड़ी है। लेकिन अभी तक न तो भारत सरकार से इस परियोजना के लिए नियुक्ति किए गए कंसल्टेंट ही यहां झांकने आए हैं न ही नीति विभाग के लोग।
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ऐसे में गोंडा शहर सीवर लाइन से कभी जुड़ पाएगा या नहीं, इसे लेकर सिर्फ अटकलें ही लगाई जा रही हैं, क्योंकि भारत सरकार के नीति आयोग से जिन 10 बड़ी परियोजनाओं को हरी झंडी दी जानी है, उसमें गोंडा की सीवर लाइन भी है। जिसके भविष्य का फैसला अब सीधे भारत सरकार के नीति आयोग को करना है।
गोंडा में सीवर लाइन डाले जाने की जो परियोजना भारत सरकार के नीति आयोग में लंबित है, उसकी कुल लागत 332 करोड़ रुपये है। जिसमें 25 एमएलडी (मिलियन लीटर पर डे) क्षमता का एक ट्रीटमेंट प्लांट, 232.697 किलोमीटर की सीवरेज लाइन, एक अदद इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन (आईपीएस), 1 अदद एमपीएस, 325 मीटर की राइजिंग मेंस, 3 स्टाफ क्वार्टर, 270.50 मीटर की बाउंड्रीवाल, 60 मीटर की एप्रोच रोड, पंपिंग प्लांट, पावर कनेक्शन और जनरेटर इत्यादि शामिल है। जबकि इसमें जमीन की कीमत तकरीबन 5 करोड़ और पांच साल तक इसकी रिपेयरिंग की कीमत सवा पांच करोड़ रुपये शामिल नहीं है।
नीति आयोग में लंबित गोंडा सीवर लाइन का पूरा प्रोजेक्ट निदेशक/स्टेट कोआर्डिनेटर दीपिका लोहिया एरन व ज्वाइंट सेक्रेट्री/स्टेट कोआर्डिनेटर (डिवीजन व डीपी सेक्सन) विक्रम सिंह गौर देख रहे हैं। जबकि इसे लेकर नीति आयोग से जिस कंपनी को कंसल्टेंट नियुक्त किया गया है, उसका नाम है ईवाईएलएलपी। जिसमें अल्पना जैन, गुंजन जैन, अखिल सहगल और नृपेश कुमार को इसकी पैरवी करनी है।
तीन साल पहले सपा सरकार में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जिस समय गोंडा शहर में पड़ने वाली सीवर लाइन की घोषणा एक खुले मंच पर की थी। उस समय शायद उन्हें नहीं पता था कि जिस सीवर लाइन की घोषणा वह अपने ड्रीम प्रोजेक्ट के तौर पर कर रहे हैं, उसके लिए उनकी सरकार के पास पैसा ही नहीं है। जिसके बाद इस प्रोजेक्ट की फाइल डेवलॅपमेंट सपोर्ट की ओर से अवस्थापना निर्माण से सम्बंधित परियोजनाओं (डी3एस)के तहत भारत सरकार को भेज दी गई।
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सूत्रों के मुताबिक इस प्रोजेक्ट पर अगले कुछ दिनों नीति आयोग फैसला कर सकता है। बावजूद इसके इस प्रोजेक्ट को लेकर न तो अधिकारी संजीदा हैं, न ही हमारे जिले के जनप्रतिनिधि। यही वजह है कि सीवर लाइन प्रोजेक्ट की फाइल की न तो कोई पैरवी हो रही है न ही इसे भारत सरकार के नीति आयोग से पास करवाए जाने की कोई पहल।
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एक महीने से ऊपर बीतने को हैं और इसकी फाइल भारत सरकार के नीति आयोग में पड़ी है। लेकिन अभी तक न तो भारत सरकार से इस परियोजना के लिए नियुक्ति किए गए कंसल्टेंट ही यहां झांकने आए हैं न ही नीति विभाग के लोग।
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ऐसे में गोंडा शहर सीवर लाइन से कभी जुड़ पाएगा या नहीं, इसे लेकर सिर्फ अटकलें ही लगाई जा रही हैं, क्योंकि भारत सरकार के नीति आयोग से जिन 10 बड़ी परियोजनाओं को हरी झंडी दी जानी है, उसमें गोंडा की सीवर लाइन भी है। जिसके भविष्य का फैसला अब सीधे भारत सरकार के नीति आयोग को करना है।
गोंडा में सीवर लाइन डाले जाने की जो परियोजना भारत सरकार के नीति आयोग में लंबित है, उसकी कुल लागत 332 करोड़ रुपये है। जिसमें 25 एमएलडी (मिलियन लीटर पर डे) क्षमता का एक ट्रीटमेंट प्लांट, 232.697 किलोमीटर की सीवरेज लाइन, एक अदद इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन (आईपीएस), 1 अदद एमपीएस, 325 मीटर की राइजिंग मेंस, 3 स्टाफ क्वार्टर, 270.50 मीटर की बाउंड्रीवाल, 60 मीटर की एप्रोच रोड, पंपिंग प्लांट, पावर कनेक्शन और जनरेटर इत्यादि शामिल है। जबकि इसमें जमीन की कीमत तकरीबन 5 करोड़ और पांच साल तक इसकी रिपेयरिंग की कीमत सवा पांच करोड़ रुपये शामिल नहीं है।
नीति आयोग में लंबित गोंडा सीवर लाइन का पूरा प्रोजेक्ट निदेशक/स्टेट कोआर्डिनेटर दीपिका लोहिया एरन व ज्वाइंट सेक्रेट्री/स्टेट कोआर्डिनेटर (डिवीजन व डीपी सेक्सन) विक्रम सिंह गौर देख रहे हैं। जबकि इसे लेकर नीति आयोग से जिस कंपनी को कंसल्टेंट नियुक्त किया गया है, उसका नाम है ईवाईएलएलपी। जिसमें अल्पना जैन, गुंजन जैन, अखिल सहगल और नृपेश कुमार को इसकी पैरवी करनी है।
तीन साल पहले सपा सरकार में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जिस समय गोंडा शहर में पड़ने वाली सीवर लाइन की घोषणा एक खुले मंच पर की थी। उस समय शायद उन्हें नहीं पता था कि जिस सीवर लाइन की घोषणा वह अपने ड्रीम प्रोजेक्ट के तौर पर कर रहे हैं, उसके लिए उनकी सरकार के पास पैसा ही नहीं है। जिसके बाद इस प्रोजेक्ट की फाइल डेवलॅपमेंट सपोर्ट की ओर से अवस्थापना निर्माण से सम्बंधित परियोजनाओं (डी3एस)के तहत भारत सरकार को भेज दी गई।