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हर्षोल्लास से मनाई देवोत्थानी एकादशी
बलरामपुर/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 22 Nov 2015 11:39 PM IST
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बलरामपुर। लोगों ने रविवार को वैदिक विधि विधान से भगवान विष्णु की पूजा अर्चना कर सुख समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। घरों में शालिग्राम-तुलसी विवाहोत्सव भी मनाया।
लोगों ने व्रत रखकर नये गन्ने व सिंघाडे आदि का प्रसाद ग्रहण किया। शाम के समय अलाई बलाई जलाकर दुख व दरिद्रता का नाश भी किया।
ऐसी मान्यता है कि वर्षा ऋतु में चार माह तक शयन करने वाले भगवान विष्णु की निद्रा कार्तिक मास शुक्ल पक्ष एकादशी को टूटती है।
इस दिन को देवोत्थानी एकादशी भी कहा जाता है। इसी दिन भगवान विष्णु की प्रिय तुलसी का शालिग्राम से विवाह भी हुआ था। आज के दिन लोग घरों में तुलसी विवाहोत्सव भी मनाते हैं।
रविवार को लोगों ने देवोत्थानी एकादशी का व्रत रखकर भगवान विष्णु व तुलसी की पूजा अर्चना की। अलाई बलाई जलाकर दुख व दरिद्रता का नाश किया।
लोगों ने फलाहार के रूप में नया गन्ना व सिंघाडा आदि ग्रहण कर सुख समृद्धिका आशीर्वाद मांगा।
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लोगों ने व्रत रखकर नये गन्ने व सिंघाडे आदि का प्रसाद ग्रहण किया। शाम के समय अलाई बलाई जलाकर दुख व दरिद्रता का नाश भी किया।
ऐसी मान्यता है कि वर्षा ऋतु में चार माह तक शयन करने वाले भगवान विष्णु की निद्रा कार्तिक मास शुक्ल पक्ष एकादशी को टूटती है।
इस दिन को देवोत्थानी एकादशी भी कहा जाता है। इसी दिन भगवान विष्णु की प्रिय तुलसी का शालिग्राम से विवाह भी हुआ था। आज के दिन लोग घरों में तुलसी विवाहोत्सव भी मनाते हैं।
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रविवार को लोगों ने देवोत्थानी एकादशी का व्रत रखकर भगवान विष्णु व तुलसी की पूजा अर्चना की। अलाई बलाई जलाकर दुख व दरिद्रता का नाश किया।
लोगों ने फलाहार के रूप में नया गन्ना व सिंघाडा आदि ग्रहण कर सुख समृद्धिका आशीर्वाद मांगा।