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कस्तूरबा स्कूलों में अनियमितता का मामला फिर गरमाया
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गोंडा। कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों में 96 लाख के बजट में अनियमितता का मामला फिर से तूल पकड़ रहा है। बीते दिनों इस मामले में दो फर्मों को ब्लैकलिस्टेड करने के साथ ही कई कार्रवाईयां हुईं थीं जिसमें जिला समन्वयक बालिका शिक्षा रजनी श्रीवास्तव के खिलाफ भी कार्रवाई तय हुई थी।
अब उनकी ओर से आयुक्त को हर बिंदु की रिपोर्ट के साथ प्रार्थना पत्र सौंपा गया है। इस पर आयुक्त एसवीएस रंगाराव ने जिलाधिकारी को जांच कराने का निर्देश दिया है। उन्होंने पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है। माना जा रहा है अब नए सिरे से जांच हुई तो कई और मामले सामने आ सकते हैं। इससे एक बार फिर विभाग में रार ठन गई है।
बीते दिनों कस्तूरबा गांधी स्कूलों में बोर्नवीटा, च्यवनप्राश, चादर व तौलिया आदि की खरीद में गोलमाल के मामले का शोर राजधानी तक पहुंचा था। कस्तूरबा स्कूलों के लिए आवंटित 96 लाख रुपये के बजट में बड़े स्तर पर अनियमित भुगतान की बात सामने आई थी। रिपोर्ट में तत्कालीन बीएसए समेत वित्त एवं लेखाधिकारी व दो आपूर्तिकर्त्ता फर्मों को दोषी करार दिया गया।
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बीएसए के खिलाफ तो विभागीय कार्रवाई नहीं हुई और तत्कालीन वित्त एवं लेखाधिकारी से सिर्फ प्रभार ले लिया गया। केवल दो फर्मों को ही ब्लैक लिस्टेड किया गया। इसके साथ ही जिला समन्वयक बालिका शिक्षा रजनी श्रीवास्तव का भी प्रभार ले लिया गया। अब उन्होंने आयुक्त को सौंपे प्रार्थना पत्र के जरिए साफ कहा है कि वह किसी भी स्तर से दोषी नहीं हैं।
उन्होंने आरोप लगाया है कि जिस भुगतान के मामले में उन्हें दोषी करार दिया गया है, उस भुगतान की फाइल पर हस्ताक्षर भी नहीं है। उन्होंने बताया कि वित्तीय कार्य से उन्हें दूर रखा गया था और जो आदेश नये वित्तीय वर्ष शुरू होने पर जारी होना चाहिए था, वह 31 मार्च को जारी हुुआ जिसमें यह कहा गया कि वह भुगतान के लिए सत्यापन कर हस्ताक्षर करें।
यही नहीं उन्होंने कई मामलों को उजागर करके पूरे मामले की जांच की मांग की है। कहा है कि जिन कार्यों में उनकी कोई भूमिका ही नहीं है, उसे उन पर छोड़ा जा रहा है। आरोप है कि महिला होने के कारण जानबूझकर उनका उत्पीड़न हो रहा है।
कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूूलों में नियुक्तियों के मामले में आए प्रार्थना पत्रों से बड़ा खुलासा हुआ है। भर्ती प्रक्रिया के दौरान जब फाइल तैयार हो रही थी तो पूर्व सीएम कल्याण सिंह के निधन पर हुई छुट्टी के दिन 551 आवेदन पत्रों को उठा लिये जाने की बात जिला समन्वयक ने कही।
उनका सीधा आरोप है कि आवेदन पत्रों को ऑफिस से ले जाना उचित नहीं था, उसमें कुछ गोलमाल की तैयारी थी। इस तरह नियुक्तियों के मामले में भी दांवपेच की बात सामने आने पर आयुक्त ने कड़ा रुख अपनाया है।
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अब उनकी ओर से आयुक्त को हर बिंदु की रिपोर्ट के साथ प्रार्थना पत्र सौंपा गया है। इस पर आयुक्त एसवीएस रंगाराव ने जिलाधिकारी को जांच कराने का निर्देश दिया है। उन्होंने पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है। माना जा रहा है अब नए सिरे से जांच हुई तो कई और मामले सामने आ सकते हैं। इससे एक बार फिर विभाग में रार ठन गई है।
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बीते दिनों कस्तूरबा गांधी स्कूलों में बोर्नवीटा, च्यवनप्राश, चादर व तौलिया आदि की खरीद में गोलमाल के मामले का शोर राजधानी तक पहुंचा था। कस्तूरबा स्कूलों के लिए आवंटित 96 लाख रुपये के बजट में बड़े स्तर पर अनियमित भुगतान की बात सामने आई थी। रिपोर्ट में तत्कालीन बीएसए समेत वित्त एवं लेखाधिकारी व दो आपूर्तिकर्त्ता फर्मों को दोषी करार दिया गया।
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बीएसए के खिलाफ तो विभागीय कार्रवाई नहीं हुई और तत्कालीन वित्त एवं लेखाधिकारी से सिर्फ प्रभार ले लिया गया। केवल दो फर्मों को ही ब्लैक लिस्टेड किया गया। इसके साथ ही जिला समन्वयक बालिका शिक्षा रजनी श्रीवास्तव का भी प्रभार ले लिया गया। अब उन्होंने आयुक्त को सौंपे प्रार्थना पत्र के जरिए साफ कहा है कि वह किसी भी स्तर से दोषी नहीं हैं।
उन्होंने आरोप लगाया है कि जिस भुगतान के मामले में उन्हें दोषी करार दिया गया है, उस भुगतान की फाइल पर हस्ताक्षर भी नहीं है। उन्होंने बताया कि वित्तीय कार्य से उन्हें दूर रखा गया था और जो आदेश नये वित्तीय वर्ष शुरू होने पर जारी होना चाहिए था, वह 31 मार्च को जारी हुुआ जिसमें यह कहा गया कि वह भुगतान के लिए सत्यापन कर हस्ताक्षर करें।
यही नहीं उन्होंने कई मामलों को उजागर करके पूरे मामले की जांच की मांग की है। कहा है कि जिन कार्यों में उनकी कोई भूमिका ही नहीं है, उसे उन पर छोड़ा जा रहा है। आरोप है कि महिला होने के कारण जानबूझकर उनका उत्पीड़न हो रहा है।
कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूूलों में नियुक्तियों के मामले में आए प्रार्थना पत्रों से बड़ा खुलासा हुआ है। भर्ती प्रक्रिया के दौरान जब फाइल तैयार हो रही थी तो पूर्व सीएम कल्याण सिंह के निधन पर हुई छुट्टी के दिन 551 आवेदन पत्रों को उठा लिये जाने की बात जिला समन्वयक ने कही।
उनका सीधा आरोप है कि आवेदन पत्रों को ऑफिस से ले जाना उचित नहीं था, उसमें कुछ गोलमाल की तैयारी थी। इस तरह नियुक्तियों के मामले में भी दांवपेच की बात सामने आने पर आयुक्त ने कड़ा रुख अपनाया है।