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जाति छुपाकर प्रमाण पत्र बनवाया और बने गये जिपं सदस्य
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गोंडा। अपनी जाति छुपाकर पिछड़ी जाति का प्रमाण पत्र जारी कराया और फिर जिला पंचायत सदस्य भी चुन लिये गए। शिकायत के बाद जांच हुई तो पूरे मामले का खुलासा हुआ। इस मामले में सिर्फ लेखपाल को निलंबित किया गया है। अभी तक जिला पंचायत सदस्य पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
सदर तहसील के लक्ष्मनपुर लालनगर की सकीना पत्नी इरफान ने बीते 4 अप्रैल 2021 को पिछड़ी जाति का प्रमाण पत्र जारी करा लिया। इसके बाद इटियाथोक द्वितीय जिला पंचायत सदस्य सीट से बीते त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में चुनाव लड़ गईं। चुनाव जीत गईं।
इसी दौरान मामले की शिकायत हुई और नायब तहसीलदार खरगूपुर ने जांच किया। सकीना पत्नी इरफान के पिता खालिक पुत्र हसमत अली जीतपुर तहसील तुलसीपुर बलरामपुर के रहने वाले हैं।
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वहां से जांच कराने पर पता चला कि यह भांट जाति की है जो अनुसूचित जाति या पिछड़ी जाति की श्रेणी में नहीं आता है। इस खुलासे के बाद सीआरओ ने फिर से जांच कराई और मामले की पुष्टि हुई कि भांट मुस्लिम जाति पिछड़े वर्ग में नहीं आते हैं, यह सामान्य जाति की श्रेणी में आते है।
ऐसे में जारी किया गया प्रमाण पत्र 24 जुलाई को ही निरस्त कर दिया गया। इसके साथ ही उस समय लेखपाल रजवंत कुमार को निलंबित कर दिया गया। बाद में बीते 8 अक्टूबर को लेखपाल के निलंबन की जांच में यह तथ्य उजागर हुआ कि सकीना बानो ने फकीर जाति लिखकर पिछड़ी जाति के प्रमाण पत्र जारी करने की मांग किया था। जिससे लेखपाल ने आंशिक गलती की थी। फिर भी लेखपाल को विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि देकर बहाल कर दिया। लेकिन जिला पंचायत सदस्य के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
जिला पंचायत सदस्य के लिए सकीना ने जाति प्रमाण पत्र अपने पति की जाति के आधार पर जारी कराया था। यही नहीं उनकी ओर से अपनी वास्तविक जाति छुपाई गई थी। पूरी जांच में यह बात तो पुष्ट हो गई, लेकिन जिला पंचायत सदस्य का निर्वाचन भी हो गया और चुनाव में उनकी ओर प्रतिभाग भी किया जा रहा है। अब मामला तूल पकड़ रहा है। माना जा रहा है कि मामले में एक पक्ष की गलतियों की अनदेखी गई। अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
जिले में जाति प्रमाण पत्र जारी कराने का खेल नया नहीं है। जिले की दो पंचायतों का मामला पूर्व में उजागर हो चुका है। इसके अलावा साल 2006 में मुजेहना ब्लाक प्रमुख पद का चुनाव भी जाति प्रमाण पत्र के दांवपेंच में निरस्त हुआ।
वरिष्ठ पत्रकार तेज प्रताप सिंह कहते हैं कि ब्लाक प्रमुख पद पर मंजू कसौंधन ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवा लिया था और प्रमुख भी चुन ली गईं थीं। उस समय निर्वाचन आयोग ने चुनाव रद्द कर दिया था। तब से आज भी मुजेहना का ब्लाक प्रमुख का चुनाव देर से होता है। अभी भी जिले में 16 ब्लाक प्रमुख में 15 ब्लाकों का ही निर्वाचन हुआ है। मुजेहना का एक साल बाद निर्वाचन होगा। इस तरह पंचायत चुनावों में जाति प्रमाण पत्र का दांव हर बार खेला जाता है।
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सदर तहसील के लक्ष्मनपुर लालनगर की सकीना पत्नी इरफान ने बीते 4 अप्रैल 2021 को पिछड़ी जाति का प्रमाण पत्र जारी करा लिया। इसके बाद इटियाथोक द्वितीय जिला पंचायत सदस्य सीट से बीते त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में चुनाव लड़ गईं। चुनाव जीत गईं।
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इसी दौरान मामले की शिकायत हुई और नायब तहसीलदार खरगूपुर ने जांच किया। सकीना पत्नी इरफान के पिता खालिक पुत्र हसमत अली जीतपुर तहसील तुलसीपुर बलरामपुर के रहने वाले हैं।
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वहां से जांच कराने पर पता चला कि यह भांट जाति की है जो अनुसूचित जाति या पिछड़ी जाति की श्रेणी में नहीं आता है। इस खुलासे के बाद सीआरओ ने फिर से जांच कराई और मामले की पुष्टि हुई कि भांट मुस्लिम जाति पिछड़े वर्ग में नहीं आते हैं, यह सामान्य जाति की श्रेणी में आते है।
ऐसे में जारी किया गया प्रमाण पत्र 24 जुलाई को ही निरस्त कर दिया गया। इसके साथ ही उस समय लेखपाल रजवंत कुमार को निलंबित कर दिया गया। बाद में बीते 8 अक्टूबर को लेखपाल के निलंबन की जांच में यह तथ्य उजागर हुआ कि सकीना बानो ने फकीर जाति लिखकर पिछड़ी जाति के प्रमाण पत्र जारी करने की मांग किया था। जिससे लेखपाल ने आंशिक गलती की थी। फिर भी लेखपाल को विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि देकर बहाल कर दिया। लेकिन जिला पंचायत सदस्य के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
जिला पंचायत सदस्य के लिए सकीना ने जाति प्रमाण पत्र अपने पति की जाति के आधार पर जारी कराया था। यही नहीं उनकी ओर से अपनी वास्तविक जाति छुपाई गई थी। पूरी जांच में यह बात तो पुष्ट हो गई, लेकिन जिला पंचायत सदस्य का निर्वाचन भी हो गया और चुनाव में उनकी ओर प्रतिभाग भी किया जा रहा है। अब मामला तूल पकड़ रहा है। माना जा रहा है कि मामले में एक पक्ष की गलतियों की अनदेखी गई। अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
जिले में जाति प्रमाण पत्र जारी कराने का खेल नया नहीं है। जिले की दो पंचायतों का मामला पूर्व में उजागर हो चुका है। इसके अलावा साल 2006 में मुजेहना ब्लाक प्रमुख पद का चुनाव भी जाति प्रमाण पत्र के दांवपेंच में निरस्त हुआ।
वरिष्ठ पत्रकार तेज प्रताप सिंह कहते हैं कि ब्लाक प्रमुख पद पर मंजू कसौंधन ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवा लिया था और प्रमुख भी चुन ली गईं थीं। उस समय निर्वाचन आयोग ने चुनाव रद्द कर दिया था। तब से आज भी मुजेहना का ब्लाक प्रमुख का चुनाव देर से होता है। अभी भी जिले में 16 ब्लाक प्रमुख में 15 ब्लाकों का ही निर्वाचन हुआ है। मुजेहना का एक साल बाद निर्वाचन होगा। इस तरह पंचायत चुनावों में जाति प्रमाण पत्र का दांव हर बार खेला जाता है।