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जिला अस्पताल गेट से आधे घंटे में इमरजेंसी पहुंची एंबुलेंस
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गोंडा। जिला अस्पताल की अव्यवस्थाओं से अब मरीजों की जान पर बन आई है। अस्पताल के गेट पर लगने वाला लंबा जाम गंभीर मरीजों के लिए आफत बन रहा है। सोमवार को जिला अस्पताल के गेट पर लगे जाम की वजह से सैकड़ों मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। एंबुलेंस को गेट से इमरजेंसी तक पहुंचने में करीब आधा घंटा लग गया।
होली के तीन दिन की छुट्टी के बाद जब सोमवार को जिला अस्पताल में सभी सेवाएं शुरू हुईं तो सुबह से ही जाम की स्थित बनने लगी। दोपहर तक पूरा अस्पताल गाड़ियों से भर गया। गेट से ओपीडी तक पहुंचने में मरीजों की सांसें अटकने लगीं। आम लोगों के साथ एंबुलेंस को भी रास्ता नहीं मिल सका। जिससे उसमें लाये गए मरीज की जान पर आफत बनी रही।
जिला अस्पताल में वाहनों को खड़ा करने की कोई व्यवस्था नहीं है। वाहन कहीं पर भी आड़े-तिरछे खड़े कर दिए जाते हैं। इससे आए दिन जाम की स्थिति बनती है। इस अव्यवस्था पर अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में गंभीर मरीजों के लिए एक सेकंड भी बहुत भारी होता है लेकिन जाम में फंसने के कारण एंबुलेंस को घंटों इंतजार करना पड़ता है।
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अस्पताल प्रशासन दावा कर रहा है कि उसकी ओर से हर व्यवस्था पर पैनी नजर रखी जाती है लेकिन जब बात वाहनों को व्यवस्थित रखने की हो तो वहां उनकी चुप्पी साधने से सवालिया निशान लग रहे हैं। डॉक्टरों को भी रोजाना अस्पताल में आना-जाना लगा रहता है लेकिन वे रोज जाम देखने के बाद भी अपनी आंखें बद कर लेते हैं जिससे इसका खामियाजा गंभीर मरीजों को भुगतना पड़ता है।
अस्पताल प्रशासन की ओर से पार्किंग की समुचित व्यवस्था न होने के कारण लोग वाहनों को बीच सड़क पर खड़ा कर देते हैं जिससे आए दिन अस्पताल परिसर में जाम लगता है। सोमवार की सुबह मरीजों को जाम में फंसने के कारण परिजन मरीजों को कंधे के सहारे तो कोई टांग कर बाहर तक ले जाते देखे गए।
अस्पताल परिसर में दोपहर करीब एक बजे बड़ा जाम लग गया जिससे मरीजों को घंटों जूझना पड़ा। वहीं अस्पताल परिसर में बाहर से गंभीर मरीज लेकर आ रही एंबुलेंस आधे घंटे तक फंसी रही जिससे 108 एंबुलेंस में घायल मरीज तड़पते रहे। यहीं हालत परिसर के अंदर रोजाना देखने को मिलती है।
जिला अस्पताल में हर रोज सुबह नौ बजे से दोपहर एक बजे तक जाम लग जाता है जिससे मरीजों के साथ अस्पताल व सीएमओ कार्यालय पर आने वाले अधिकारी व कर्मचारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ाता है। सीएमओ कार्यालय के कर्मचारियों का कहना है कि यदि जिला अस्पताल परिसर के गार्ड को निर्देश दिए जाएं कि नौ बजे से एक बजे तक वाहनों को सही ढंग से खड़ा करवाएं तो शायद सुबह से लगने वाले जाम से निजात मिल सके।
जब 108 एंबुलेंस के चालक आते हैं तो उन्हें जल्द से जल्द लौटकर अन्य मरीजों को लेने घटनास्थल पर पहुंचना पड़ता है। यदि यही आलम रहा तो शायद फिर समय से इलाज न मिलने से मरीज की जान भी जा सकती है।
जिला अस्पताल में जल्द ही वाहन पार्किंग की समुचित व्यवस्था करवा दी जाएगी। सोमवार को तीन दिन बाद ओपीडी शुरू हुई है जिससे भीड़ अधिक बढ़ गई। अस्पताल में सुरक्षा गार्ड की भी व्यवस्था है लेकिन ज्यादा भीड़ होने से समस्या हो जाती है। जल्दी व्यवस्थाएं ठीक हो जाएंगी।
- डॉ. एसके रावत, प्रमुख अधीक्षक, जिला अस्पताल
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होली के तीन दिन की छुट्टी के बाद जब सोमवार को जिला अस्पताल में सभी सेवाएं शुरू हुईं तो सुबह से ही जाम की स्थित बनने लगी। दोपहर तक पूरा अस्पताल गाड़ियों से भर गया। गेट से ओपीडी तक पहुंचने में मरीजों की सांसें अटकने लगीं। आम लोगों के साथ एंबुलेंस को भी रास्ता नहीं मिल सका। जिससे उसमें लाये गए मरीज की जान पर आफत बनी रही।
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जिला अस्पताल में वाहनों को खड़ा करने की कोई व्यवस्था नहीं है। वाहन कहीं पर भी आड़े-तिरछे खड़े कर दिए जाते हैं। इससे आए दिन जाम की स्थिति बनती है। इस अव्यवस्था पर अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में गंभीर मरीजों के लिए एक सेकंड भी बहुत भारी होता है लेकिन जाम में फंसने के कारण एंबुलेंस को घंटों इंतजार करना पड़ता है।
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अस्पताल प्रशासन दावा कर रहा है कि उसकी ओर से हर व्यवस्था पर पैनी नजर रखी जाती है लेकिन जब बात वाहनों को व्यवस्थित रखने की हो तो वहां उनकी चुप्पी साधने से सवालिया निशान लग रहे हैं। डॉक्टरों को भी रोजाना अस्पताल में आना-जाना लगा रहता है लेकिन वे रोज जाम देखने के बाद भी अपनी आंखें बद कर लेते हैं जिससे इसका खामियाजा गंभीर मरीजों को भुगतना पड़ता है।
अस्पताल प्रशासन की ओर से पार्किंग की समुचित व्यवस्था न होने के कारण लोग वाहनों को बीच सड़क पर खड़ा कर देते हैं जिससे आए दिन अस्पताल परिसर में जाम लगता है। सोमवार की सुबह मरीजों को जाम में फंसने के कारण परिजन मरीजों को कंधे के सहारे तो कोई टांग कर बाहर तक ले जाते देखे गए।
अस्पताल परिसर में दोपहर करीब एक बजे बड़ा जाम लग गया जिससे मरीजों को घंटों जूझना पड़ा। वहीं अस्पताल परिसर में बाहर से गंभीर मरीज लेकर आ रही एंबुलेंस आधे घंटे तक फंसी रही जिससे 108 एंबुलेंस में घायल मरीज तड़पते रहे। यहीं हालत परिसर के अंदर रोजाना देखने को मिलती है।
जिला अस्पताल में हर रोज सुबह नौ बजे से दोपहर एक बजे तक जाम लग जाता है जिससे मरीजों के साथ अस्पताल व सीएमओ कार्यालय पर आने वाले अधिकारी व कर्मचारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ाता है। सीएमओ कार्यालय के कर्मचारियों का कहना है कि यदि जिला अस्पताल परिसर के गार्ड को निर्देश दिए जाएं कि नौ बजे से एक बजे तक वाहनों को सही ढंग से खड़ा करवाएं तो शायद सुबह से लगने वाले जाम से निजात मिल सके।
जब 108 एंबुलेंस के चालक आते हैं तो उन्हें जल्द से जल्द लौटकर अन्य मरीजों को लेने घटनास्थल पर पहुंचना पड़ता है। यदि यही आलम रहा तो शायद फिर समय से इलाज न मिलने से मरीज की जान भी जा सकती है।
जिला अस्पताल में जल्द ही वाहन पार्किंग की समुचित व्यवस्था करवा दी जाएगी। सोमवार को तीन दिन बाद ओपीडी शुरू हुई है जिससे भीड़ अधिक बढ़ गई। अस्पताल में सुरक्षा गार्ड की भी व्यवस्था है लेकिन ज्यादा भीड़ होने से समस्या हो जाती है। जल्दी व्यवस्थाएं ठीक हो जाएंगी।
- डॉ. एसके रावत, प्रमुख अधीक्षक, जिला अस्पताल