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Gonda News: 43 साल बाद मई में ही बढ़ने लगा सरयू का जलस्तर
Sun, 01 Jun 2025 11:21 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sun, 01 Jun 2025 11:21 PM IST
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गोंडा के एल्गिन-चरसड़ी बांध की रविवार की तस्वीर। स्रोत-विभाग
करनैलगंज (गोंडा)। सरयू नदी के कटान और बांध की सुरक्षा के लिए बनाए जा रहे स्पर का निर्माण पूरा होने के पहले ही बाढ़ की सुगबुगाहट तेज हो गई है। मई के आखिरी दो-तीन दिन में सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने लगा। इससे ग्रामीण हैरान हैं। बताया जा रहा है कि 43 वर्ष बाद मई में जलस्तर बढ़ा है।ऐसे में इस वर्ष सितंबर माह तक बाढ़ रहने का अनुमान लगाया जा रहा है।
जानकारों की मानें तो वर्ष 1982 में भी बरसात और गर्मी अधिक होने के कारण पहाड़ों पर बर्फ पिघलने और पहाड़ी नालों से लगातार पानी छोड़े जाने से सरयू नदी का जलस्तर बढ़ गया था। उस समय एल्गिन-चरसड़ी बांध का निर्माण नहीं हुआ था। तब बाढ़ की विभीषिका इतनी जबरदस्त थी कि सरयू (उस समय का नाम घाघरा) नदी के पानी ने 700 से अधिक गांवों तथा करनैलगंज कस्बे को भी जलमग्न कर दिया था। ट्रेनों के साथ ही लखनऊ मार्ग पर यातायात बंद करना पड़ा था। उसके बाद लगातार तीन बार एल्गिन-चरसड़ी बांध कटने से बाढ़ के हालात खराब हुए थे। जिससे करनैलगंज व परसपुर ब्लाॅक के करीब 93 गांव प्रभावित हुए थे। हालांकि मौजूदा समय में उस विभीषिका से बचने के एल्गिन-चरसड़ी तथा जरवल कस्बा के पास कटी बांध के बनने से करनैलगंज तहसील में बाढ़ जैसी आपदा मात्र कुछ गांवों तक सीमित रह गई है। बांध कटने पर बाढ़ के हालात बदतर होते हैं।
इस बार 27 मई से ही सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने लगा। ग्राम बहुवन मदार माझा के पास बांध को कटान से बचाने के लिए करीब तीन करोड़ की लागत से तीन स्परों का निर्माण कराया जा रहा है। मगर नदी में जलस्तर बढ़ने से स्पर का निर्माण बाधित हो सकता है। उधर जलस्तर बढ़ने की संभावना को देखते हुए स्पर की नोज बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
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बाढ़ खंड के सहायक अभियंता पंकज आर्य व अवर अभियंता रवि वर्मा का कहना है कि नदी का जलस्तर बढ़ता देख स्पर निर्माण के पहले उसके नोज को तैयार किया जा रहा है। बाकी काम बाद में भी होता रहेगा। तीनों स्परों के नोज लगभग तैयार हैं। जलस्तर इस बार जल्दी बढ़ने लगा है।
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जानकारों की मानें तो वर्ष 1982 में भी बरसात और गर्मी अधिक होने के कारण पहाड़ों पर बर्फ पिघलने और पहाड़ी नालों से लगातार पानी छोड़े जाने से सरयू नदी का जलस्तर बढ़ गया था। उस समय एल्गिन-चरसड़ी बांध का निर्माण नहीं हुआ था। तब बाढ़ की विभीषिका इतनी जबरदस्त थी कि सरयू (उस समय का नाम घाघरा) नदी के पानी ने 700 से अधिक गांवों तथा करनैलगंज कस्बे को भी जलमग्न कर दिया था। ट्रेनों के साथ ही लखनऊ मार्ग पर यातायात बंद करना पड़ा था। उसके बाद लगातार तीन बार एल्गिन-चरसड़ी बांध कटने से बाढ़ के हालात खराब हुए थे। जिससे करनैलगंज व परसपुर ब्लाॅक के करीब 93 गांव प्रभावित हुए थे। हालांकि मौजूदा समय में उस विभीषिका से बचने के एल्गिन-चरसड़ी तथा जरवल कस्बा के पास कटी बांध के बनने से करनैलगंज तहसील में बाढ़ जैसी आपदा मात्र कुछ गांवों तक सीमित रह गई है। बांध कटने पर बाढ़ के हालात बदतर होते हैं।
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इस बार 27 मई से ही सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने लगा। ग्राम बहुवन मदार माझा के पास बांध को कटान से बचाने के लिए करीब तीन करोड़ की लागत से तीन स्परों का निर्माण कराया जा रहा है। मगर नदी में जलस्तर बढ़ने से स्पर का निर्माण बाधित हो सकता है। उधर जलस्तर बढ़ने की संभावना को देखते हुए स्पर की नोज बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
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बाढ़ खंड के सहायक अभियंता पंकज आर्य व अवर अभियंता रवि वर्मा का कहना है कि नदी का जलस्तर बढ़ता देख स्पर निर्माण के पहले उसके नोज को तैयार किया जा रहा है। बाकी काम बाद में भी होता रहेगा। तीनों स्परों के नोज लगभग तैयार हैं। जलस्तर इस बार जल्दी बढ़ने लगा है।