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जल निगम से बाहर नहीं आ पाई 300 करोड़ की योजना
Updated Mon, 24 Sep 2018 10:16 PM IST
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कहां चले गए सीवर लाइन के लिए मिले 300 करोड़ रुपये
गोंडा। शहर में सीवर लाइन व पेयजल परियोजना के लिए जलनिगम को केंद्र सरकार की तरफ से 300 करोड़ का बजट मिला था। वर्ष 2017 में तत्कालीन डीएम आशुतोष निरंजन ने जल निगम दफ्तर का औचक निरीक्षण किया तो 300 करोड़ का बजट डंप पाया गया।
उस समय जिलाधिकारी ने जांच कराई तो पता चला कि पूरा पैसा 18 अलग अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया गया है। इस पर डीएम ने परियोजना की पूरी डिटेल मांगते हुए जांच कमेटी का गठन किया था।
लेकिन उनके तबादले के बाद जांच किसी दबाव में रोक दी गई। करोड़ों की इस परियोजना से पर्दा कब उठेगा और जनता के लिए बजट कब खर्च होगा, इसका सभी सवाल कर रहे हैं।
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शहर में सीवर लाइन न होने जल निकासी की व्यवस्था नही है, सैकड़ों गांव ऐसे हैं जहां लोग दूषित पानी पी रहे हैं। 36 गांवों के लिए परियोजनाएं भी तैयार हुईं और लागू करने की कवायद भी हुई।
लेकिन पानी की सप्लाई अभी तक लोगों को नही मिल पाया है। इन परिस्थितियों के बाद भी जलनिगम आम जनता के बजट पर कुंडली मारे बैठा है। कई सालों से शहर हो या पेयजल की सुविधा के लिए परियोजनाओं पर समय से सही ढंग से कार्य नही हो पा रहे हैं।
आज भी सभी के बीच सवाल है कि जलनिगम की 300 करोड़ की योजनाओं का क्या हुआ है और अब क्या स्थिति है। वर्ष 2017 में जिलाधिकारी कीे ओर से किए गए खुलासे की रिपोर्ट सार्वजनिक तो की गई लेकिन मामले में कोई कार्रवाई अब तक नही हुई है। अभी भी समस्याएं जस की तस हैं और विभाग के पास बजट है और कार्य न होना चौंकाने वाला है।
आखिर फिर क्यों पीछे खींच लिए प्रशासन ने कदम
जलनिगम में करोड़ों का बजट होने के बाद भी कार्य न होने के मामले की बात तो सामने आई। कार्रवाई की तैयारी भी शुरू हुई लेकिन फिर अचानक कार्रवाई रुक गई। आज तक बजट के खर्च की जानकारी भी किसी को नही हो पाई।
जहां जो कार्य हो रहे थे उनकी स्थिति को भी अंतिम रुप नही दिया गया। विभागीय सूत्रों का कहना है कि परियोजनाओं की स्थलीय छानबीन नही की गई। इससे आज भी सही स्थिति से लोग अंजान हैं।
जल निगम की परियोजनाओं को नियमित निगरानी में संचालित किया जा रहा है। जिलाधिकारी के छापे की कार्रवाई के बारे में जानकारी नही है। पता करके जानकारी करेंगे कि जिलाधिकारी की ओर से क्या कार्रवाई की गई थी और क्या निर्देश दिए गए थे।
- मुकीम अहमद, अधिशाषी अभियंता जलनिगम
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गोंडा। शहर में सीवर लाइन व पेयजल परियोजना के लिए जलनिगम को केंद्र सरकार की तरफ से 300 करोड़ का बजट मिला था। वर्ष 2017 में तत्कालीन डीएम आशुतोष निरंजन ने जल निगम दफ्तर का औचक निरीक्षण किया तो 300 करोड़ का बजट डंप पाया गया।
उस समय जिलाधिकारी ने जांच कराई तो पता चला कि पूरा पैसा 18 अलग अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया गया है। इस पर डीएम ने परियोजना की पूरी डिटेल मांगते हुए जांच कमेटी का गठन किया था।
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लेकिन उनके तबादले के बाद जांच किसी दबाव में रोक दी गई। करोड़ों की इस परियोजना से पर्दा कब उठेगा और जनता के लिए बजट कब खर्च होगा, इसका सभी सवाल कर रहे हैं।
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शहर में सीवर लाइन न होने जल निकासी की व्यवस्था नही है, सैकड़ों गांव ऐसे हैं जहां लोग दूषित पानी पी रहे हैं। 36 गांवों के लिए परियोजनाएं भी तैयार हुईं और लागू करने की कवायद भी हुई।
लेकिन पानी की सप्लाई अभी तक लोगों को नही मिल पाया है। इन परिस्थितियों के बाद भी जलनिगम आम जनता के बजट पर कुंडली मारे बैठा है। कई सालों से शहर हो या पेयजल की सुविधा के लिए परियोजनाओं पर समय से सही ढंग से कार्य नही हो पा रहे हैं।
आज भी सभी के बीच सवाल है कि जलनिगम की 300 करोड़ की योजनाओं का क्या हुआ है और अब क्या स्थिति है। वर्ष 2017 में जिलाधिकारी कीे ओर से किए गए खुलासे की रिपोर्ट सार्वजनिक तो की गई लेकिन मामले में कोई कार्रवाई अब तक नही हुई है। अभी भी समस्याएं जस की तस हैं और विभाग के पास बजट है और कार्य न होना चौंकाने वाला है।
आखिर फिर क्यों पीछे खींच लिए प्रशासन ने कदम
जलनिगम में करोड़ों का बजट होने के बाद भी कार्य न होने के मामले की बात तो सामने आई। कार्रवाई की तैयारी भी शुरू हुई लेकिन फिर अचानक कार्रवाई रुक गई। आज तक बजट के खर्च की जानकारी भी किसी को नही हो पाई।
जहां जो कार्य हो रहे थे उनकी स्थिति को भी अंतिम रुप नही दिया गया। विभागीय सूत्रों का कहना है कि परियोजनाओं की स्थलीय छानबीन नही की गई। इससे आज भी सही स्थिति से लोग अंजान हैं।
जल निगम की परियोजनाओं को नियमित निगरानी में संचालित किया जा रहा है। जिलाधिकारी के छापे की कार्रवाई के बारे में जानकारी नही है। पता करके जानकारी करेंगे कि जिलाधिकारी की ओर से क्या कार्रवाई की गई थी और क्या निर्देश दिए गए थे।
- मुकीम अहमद, अधिशाषी अभियंता जलनिगम