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खाद्यान्न के त्रिस्तरीय सत्यापन टीम की निगरानी में फेल रहा प्रशासन
Updated Thu, 07 Jun 2018 11:48 PM IST
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त्रिस्तरीय सत्यापन टीम की निगरानी में फेल रहा प्रशासन
गोंडा। जिला प्रशासन की ओर से अनाज के डायवर्जन को रोकने के लिए गठित त्रिस्तरीय पहरेदारी में ही छेद है। करोड़ों रुपये के अनाज का डायवर्जन होने की घटना ने जिला प्रशासन के त्रिस्तरीय सत्यापन पहरेदारी पर सवाल खड़ा कर दिया है।
लोग भी सवाल कर रहे हैं कि जब जिला प्रशासन की ओर से तीन स्तर पर अनाज की सत्यापन व निगहबानी के लिए अधिकारियों की फौज लगी है इस बीच में इतनी बड़ी मात्रा में अनाज कालाबाजारी के लिए कैसे निकल जा रहा है।
अनाज वितरण व्यवस्था दुरुस्त करने के नाम पर अपने अधीनस्थों को कार्य सौंपने वाले जिलाधिकारी जेबी सिंह ने अधिकारियों की वास्तविक कार्यशैली को कभी गंभीरता से लेकर कसौटी पर नही कसा।
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इस त्रिस्तरीय सत्यापन की रिपोर्ट हर माह समय से जिलाधिकारी को भेजी जाती है। जिलाधिकारी उसकी मानीटरिंग कर अधिकारियों को निर्देश देते हैं। रिपोर्ट में खामियों पर डीएम की ओर से समय समय पर समीक्षा की जाती है।
वजीरगंज ब्लाक के ग्राम बंधवा स्थिति निजी गोदाम में डम्प सरकारी अनाज एक दिन का नही है। बताया जाता है कि वह काफी दिनों से सरकारी अनाज के अनलोडिंग लोडिंग का हब बना हुआ था।
इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी अनाज डम्प कर उसे कालाबाजारी में बेचने के लिए खाद्यान्न माफियाओं की ओर बड़ा एंपायर खड़ा किया गया था। इसके अनाज माफियाओं का एक बड़ा गैंग काम कर रहा था।
अनाज माफियाओं के पास इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी अनाज कैसे पहुंचा यह बड़ा सवाल है। लेकिन व्यवस्था में लगे लोगों ने गोदाम संचालक व दो पूर्व के आरोपियों को नामजद कर अपना पहले की तरह फर्ज पूरा कर लिया है।
इसमें इस बात की भी जांच होनी चाहिए कि अनाज जो पकड़ा गया यह किस गोदाम व ग्राम पंचायत के उचित दर विक्रेता की है जो गांवों में नही वितरण किया गया। ऐसे कई सवाल है जिसका जवाब कोई विभाग व अधिकारी नही दे रहे हैं। जिलाधिकारी अपनी टीम की निगरानी व उनपर नियंत्रण करने में भी फेल रहे।
विभाग के लोगों के परिचित हैं आरोपी
सूत्रों के अनुसार बंधवा में जिस धर्म प्रकाश व सुहेल अहमद को नामजद किया गया है वह दोनों खाद्य रसद विभाग व पूर्ति विभाग के अधिकारियों के पूर्व के परिचितों में से हैं। दो साल पहले शहर से सटे झंझरी व पण्डरी कृपाल के ब्लाक गोदाम पर भी बड़ा अनाज घोटाला पकड़ा गया था।
तत्कालीन डीएम के निर्देश पर तत्कालीन एसडीएम सदर विनोद कुमार सिंह की अगुवाई में की गई छापेमारी में खाद्य रसद विभाग के गोदाम प्रभारियों की ओर से बड़ी मात्रा में अनाज का डायवर्जन कालाबाजारी के लिए किये जाने का भंडाफोड़ हुआ था।
बयान में गोदाम प्रभारी ने मौके पर लोड कराई गई डीसीएम को सुहेल नाम के व्यक्ति की बतायी थी। लेकिन पूर्ति विभाग व खाद्य रसद विभाग के अधिकारियों ने उस मामले में सुहेल को नामजद नही किया था।
इस मामले में भी धर्म प्रकाश का नाम सामने आया था। यह रिश्ता क्या कहलाता है इस पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं। इस मामले में जांच के दौरान मौजूद रहे डिप्टी आरएमओ अजय विक्रम सिंह भी माना था कि कि उस बार पूर्ति विभाग ने सुहेल के नाम से तहरीर नही ।
इन सब बातों से यह स्पष्ट है कि अनाज से जुड़े घपलेबाजों का खाद्य रसद विभाग व आपूर्ति विभाग के लोगों से याराना है। मामले में आरोपी सुहेल अहमद अक्सर आकर आपूर्ति विभाग के सदर कार्यालय में बैठ कर कई कई घण्टे बाबू से गुपचुप तरीके से बात करता रहता है। वह अभी हाल में ही मामला दर्ज होने के बाद से भूमिगत हो गया है।
अनाज सत्यापन व जांच की क्या है व्यवस्था
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत वितरण किये जाने वाले खाद्यान्न का तीन स्तर पर जिलाधिकारी की ओर से नामित अधिकारियों की टीम सत्यापित करती है।
प्रथम स्तर पर खाद्य रसद विभाग के ब्लाक स्तर पर अनाज गोदाम पर आमद के समय ट्रक लोड का सत्यापन जिलाधिकारी की ओर से नामित नगर मजिस्ट्रेट,उप जिलाधिकारी या अन्य राजपत्रित अधिकारी की ओर से किया जाता है।
सत्यापन के बाद ही अनाज लदे ट्रक को अनलोड किया जाना है। दूसरे स्तर पर अनाज की गोदाम से उचित दर विक्रेताओं की ओर से निकासी के समय सत्यापन का काम आपूर्ति निरीक्षक, विपणन निरीक्षक व गोदाम प्रभारी की ओर से किया जाता है।
तीसरे स्तर पर उचित दर विक्रेता की दुकान पर अनाज की पहुंच पर एक से चार तारीख तक ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी और लेखपाल और शहरी क्षेत्र में पूर्ति निरीक्षकों की ओर से सत्यापन किया जाता है।
यही नही प्रथम स्तर के सत्यापन अधिकारी की ओर से प्रत्येक माह 30/31 तारीख को निकासी पूर्ण हो जाने के बाद गोदामों का भौतिक सत्यापन भी किया जाएगा।
गोदाम सत्यापन की आख्या हर माह 03 तारीख को डीएम को भी उपलब्ध करायी जाती है। जबकि गोदाम प्रभारी संबंधित उचित दर विक्रेता की पत्रावलियों को लेकर उसमें समिति के सदस्यों व विक्रेता के हस्ताक्षर की मिलान कर अपने पास सुरक्षित रखेगा।
कोटा कार्ड आदि की कापी लेकर अनाज तौल कर देगा। द्वितीय स्तर के अधिकारी कर्मचारी अनाज निकासी की सूचना संबन्धित एसडीएम को भी देंगे। गोदाम प्रभारी निर्गत अनाज का नमूना भी देगा। विक्रेता स्टाक सत्यापन के बाद प्रवेक्षणीय अधिकारी की मौजूदगी में खाद्यान्न का वितरण करेगा।
हर स्तर के सत्यापन में होता है खेल
खाद्य रसद व पूर्ति विभाग के सूत्रों की माने तो सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत कार्डधारकों में बंटने वाले अनाज के उठान, गोदाम में अनलोड, गोदाम में सुरक्षित रखने से लेकर उचित दर विक्रेता के घर/दुकान पर पहुंचने व वितरण करने तक के सत्यापन में बड़ा खेल किया जाता है।
सत्यापन में लगे अधिकतर अधिकारी व कर्मचारी मौके पर जाते ही नही है। घर बैठे सेवा सत्कार के साथ पत्रावली दस्तखत करने को मिल जाती है वहीं पर वे चिड़िया बैठा कर अपना फर्ज पूरा समझ लेते हैं।
इसी में अनाज माफियाओं को अनाज डायवर्जन कराने का मौका मिलता है जिसका वह पूरा फायदा उठाते हैं। यदि ऐसा न हो रहा होता त्रिस्तरीय सत्यापन व निगरानी घेरा तोड़कर करोड़ों रुपये के अनाज का डायवर्जन कै से हो जाता ।
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गोंडा। जिला प्रशासन की ओर से अनाज के डायवर्जन को रोकने के लिए गठित त्रिस्तरीय पहरेदारी में ही छेद है। करोड़ों रुपये के अनाज का डायवर्जन होने की घटना ने जिला प्रशासन के त्रिस्तरीय सत्यापन पहरेदारी पर सवाल खड़ा कर दिया है।
लोग भी सवाल कर रहे हैं कि जब जिला प्रशासन की ओर से तीन स्तर पर अनाज की सत्यापन व निगहबानी के लिए अधिकारियों की फौज लगी है इस बीच में इतनी बड़ी मात्रा में अनाज कालाबाजारी के लिए कैसे निकल जा रहा है।
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अनाज वितरण व्यवस्था दुरुस्त करने के नाम पर अपने अधीनस्थों को कार्य सौंपने वाले जिलाधिकारी जेबी सिंह ने अधिकारियों की वास्तविक कार्यशैली को कभी गंभीरता से लेकर कसौटी पर नही कसा।
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इस त्रिस्तरीय सत्यापन की रिपोर्ट हर माह समय से जिलाधिकारी को भेजी जाती है। जिलाधिकारी उसकी मानीटरिंग कर अधिकारियों को निर्देश देते हैं। रिपोर्ट में खामियों पर डीएम की ओर से समय समय पर समीक्षा की जाती है।
वजीरगंज ब्लाक के ग्राम बंधवा स्थिति निजी गोदाम में डम्प सरकारी अनाज एक दिन का नही है। बताया जाता है कि वह काफी दिनों से सरकारी अनाज के अनलोडिंग लोडिंग का हब बना हुआ था।
इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी अनाज डम्प कर उसे कालाबाजारी में बेचने के लिए खाद्यान्न माफियाओं की ओर बड़ा एंपायर खड़ा किया गया था। इसके अनाज माफियाओं का एक बड़ा गैंग काम कर रहा था।
अनाज माफियाओं के पास इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी अनाज कैसे पहुंचा यह बड़ा सवाल है। लेकिन व्यवस्था में लगे लोगों ने गोदाम संचालक व दो पूर्व के आरोपियों को नामजद कर अपना पहले की तरह फर्ज पूरा कर लिया है।
इसमें इस बात की भी जांच होनी चाहिए कि अनाज जो पकड़ा गया यह किस गोदाम व ग्राम पंचायत के उचित दर विक्रेता की है जो गांवों में नही वितरण किया गया। ऐसे कई सवाल है जिसका जवाब कोई विभाग व अधिकारी नही दे रहे हैं। जिलाधिकारी अपनी टीम की निगरानी व उनपर नियंत्रण करने में भी फेल रहे।
विभाग के लोगों के परिचित हैं आरोपी
सूत्रों के अनुसार बंधवा में जिस धर्म प्रकाश व सुहेल अहमद को नामजद किया गया है वह दोनों खाद्य रसद विभाग व पूर्ति विभाग के अधिकारियों के पूर्व के परिचितों में से हैं। दो साल पहले शहर से सटे झंझरी व पण्डरी कृपाल के ब्लाक गोदाम पर भी बड़ा अनाज घोटाला पकड़ा गया था।
तत्कालीन डीएम के निर्देश पर तत्कालीन एसडीएम सदर विनोद कुमार सिंह की अगुवाई में की गई छापेमारी में खाद्य रसद विभाग के गोदाम प्रभारियों की ओर से बड़ी मात्रा में अनाज का डायवर्जन कालाबाजारी के लिए किये जाने का भंडाफोड़ हुआ था।
बयान में गोदाम प्रभारी ने मौके पर लोड कराई गई डीसीएम को सुहेल नाम के व्यक्ति की बतायी थी। लेकिन पूर्ति विभाग व खाद्य रसद विभाग के अधिकारियों ने उस मामले में सुहेल को नामजद नही किया था।
इस मामले में भी धर्म प्रकाश का नाम सामने आया था। यह रिश्ता क्या कहलाता है इस पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं। इस मामले में जांच के दौरान मौजूद रहे डिप्टी आरएमओ अजय विक्रम सिंह भी माना था कि कि उस बार पूर्ति विभाग ने सुहेल के नाम से तहरीर नही ।
इन सब बातों से यह स्पष्ट है कि अनाज से जुड़े घपलेबाजों का खाद्य रसद विभाग व आपूर्ति विभाग के लोगों से याराना है। मामले में आरोपी सुहेल अहमद अक्सर आकर आपूर्ति विभाग के सदर कार्यालय में बैठ कर कई कई घण्टे बाबू से गुपचुप तरीके से बात करता रहता है। वह अभी हाल में ही मामला दर्ज होने के बाद से भूमिगत हो गया है।
अनाज सत्यापन व जांच की क्या है व्यवस्था
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत वितरण किये जाने वाले खाद्यान्न का तीन स्तर पर जिलाधिकारी की ओर से नामित अधिकारियों की टीम सत्यापित करती है।
प्रथम स्तर पर खाद्य रसद विभाग के ब्लाक स्तर पर अनाज गोदाम पर आमद के समय ट्रक लोड का सत्यापन जिलाधिकारी की ओर से नामित नगर मजिस्ट्रेट,उप जिलाधिकारी या अन्य राजपत्रित अधिकारी की ओर से किया जाता है।
सत्यापन के बाद ही अनाज लदे ट्रक को अनलोड किया जाना है। दूसरे स्तर पर अनाज की गोदाम से उचित दर विक्रेताओं की ओर से निकासी के समय सत्यापन का काम आपूर्ति निरीक्षक, विपणन निरीक्षक व गोदाम प्रभारी की ओर से किया जाता है।
तीसरे स्तर पर उचित दर विक्रेता की दुकान पर अनाज की पहुंच पर एक से चार तारीख तक ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी और लेखपाल और शहरी क्षेत्र में पूर्ति निरीक्षकों की ओर से सत्यापन किया जाता है।
यही नही प्रथम स्तर के सत्यापन अधिकारी की ओर से प्रत्येक माह 30/31 तारीख को निकासी पूर्ण हो जाने के बाद गोदामों का भौतिक सत्यापन भी किया जाएगा।
गोदाम सत्यापन की आख्या हर माह 03 तारीख को डीएम को भी उपलब्ध करायी जाती है। जबकि गोदाम प्रभारी संबंधित उचित दर विक्रेता की पत्रावलियों को लेकर उसमें समिति के सदस्यों व विक्रेता के हस्ताक्षर की मिलान कर अपने पास सुरक्षित रखेगा।
कोटा कार्ड आदि की कापी लेकर अनाज तौल कर देगा। द्वितीय स्तर के अधिकारी कर्मचारी अनाज निकासी की सूचना संबन्धित एसडीएम को भी देंगे। गोदाम प्रभारी निर्गत अनाज का नमूना भी देगा। विक्रेता स्टाक सत्यापन के बाद प्रवेक्षणीय अधिकारी की मौजूदगी में खाद्यान्न का वितरण करेगा।
हर स्तर के सत्यापन में होता है खेल
खाद्य रसद व पूर्ति विभाग के सूत्रों की माने तो सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत कार्डधारकों में बंटने वाले अनाज के उठान, गोदाम में अनलोड, गोदाम में सुरक्षित रखने से लेकर उचित दर विक्रेता के घर/दुकान पर पहुंचने व वितरण करने तक के सत्यापन में बड़ा खेल किया जाता है।
सत्यापन में लगे अधिकतर अधिकारी व कर्मचारी मौके पर जाते ही नही है। घर बैठे सेवा सत्कार के साथ पत्रावली दस्तखत करने को मिल जाती है वहीं पर वे चिड़िया बैठा कर अपना फर्ज पूरा समझ लेते हैं।
इसी में अनाज माफियाओं को अनाज डायवर्जन कराने का मौका मिलता है जिसका वह पूरा फायदा उठाते हैं। यदि ऐसा न हो रहा होता त्रिस्तरीय सत्यापन व निगरानी घेरा तोड़कर करोड़ों रुपये के अनाज का डायवर्जन कै से हो जाता ।