{"_id":"5b7af05842c79246452de9fb","slug":"51534783576-gonda-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"घाघरा खतरे के निशान से फिर 70 सेंटीमीटर हुई ऊपर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घाघरा खतरे के निशान से फिर 70 सेंटीमीटर हुई ऊपर
Updated Mon, 20 Aug 2018 10:16 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
घाघरा खतरे के निशान से 70 सेंटीमीटर ऊपर
गोंडा। घाघरा की विनाश लीला तेज होती जा रही है। घाघरा का जलस्तर घटने पर तबाही और बढ़ने पर भीषण तबाही का दौर चल रहा है। बीते 24 घंटे में घाघरा 18 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच कर पिछले रिकॉर्ड को तोड़ने में लगी है।
जानकारी के मुताबिक पहाड़ों पर हो रही लगातार बरसात से घाघरा का जलस्तर अभी और बढ़ने की संभावनाएं हैं। घाघरा के तेजी से बढ़ रहे जलस्तर से जिन गांवों में अभी बाढ़ का पानी नहीं पहुंचा है। उन ग्रामीणों की धड़कन तेज हो गई है।
सोमवार की सुबह से घाघरा नदी का जलस्तर फिर से बढ़ने लगा। शनिवार की शाम को 4 बजे तक घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान 106.07 के सापेक्ष 106.606 पर पहुंचकर 53 सेंटीमीटर ऊपर था तो सोमवार को घाघरा का जलस्तर बढ़ कर 106.786 पहुंच गया जो खतरे के निशान से 70 सेंटीमीटर ऊपर है।
विज्ञापन
जलस्तर घटने बढ़ने का सिलसिला लगातार जारी है। मगर इससे क्षेत्र में पानी के फैलाव में कमी नहीं आ रही है। लगातार बाढ़ का पानी क्षेत्र में तेजी से फैल रहा है। जिससे चारों तरफ पानी ही पानी दिखाई दे रहा है।
एक तरफ घाघरा तो दूसरी तरफ सरयू नदी का पानी क्षेत्र की ग्राम पंचायतों के मजरों को अपने आगोश में लेता जा रहा है। जिससे बाढ़ से प्रभावित पीड़ितों की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं।
अधिकतर लोगों के घरों में पानी भरा है। जिससे कुछ लोगों का छप्पर का घर गिर चुका है, कुछ लोगों का गिरने के कगार पर है। जिससे पीड़ितों का सामान बर्बाद हो रहा है, ईंधन न होने से भोजन बनाने की समस्या उत्पन्न हो गई है।
बाढ़ पीड़ितों को न तो सोने की जगह है न ही भोजन बनाने के लिए संशाधन हैं। लगातार पानी में रहने से पीड़ितों के पैर सड़ चुके हैं। विषैले जंतुओं और मच्छरों से बीमारी भी बढ़ती जा रही है। घाघरा व सरयू नदी से निकल रहे बाढ़ के पानी से अब तक क्षेत्र की 42 ग्राम पंचायतों के 160 से अधिक मजरे प्रभावित हो चुके हैं।
जिसमे गौरासिंहपुर, नकहरा, काशीपुर, नकार, वैदपुर, चन्द्रहरिया, बसेरिया, मोहम्मदपुर गड़वार एवं सरैंया, घरकुइयाँ, प्रतापपुर, दिवली, भटपुरवा, सहित अन्य ग्राम पंचायतें घाघरा के पानी से प्रभावित हैं।
वहीं मलौना, नरायनपुर माझा, हीरापुर कमियार, अल्लीपुर गोकुला, सकरौरा ग्रामीण, बसेहिया, लालेमउ, कचनापुर एवं फत्तेपुर कोटहना, मलौना, मलौली, परसोली, कैथौली सहित कई अन्य ग्राम पंचायतें सरयू नदी के पानी से प्रभावित है। प्रशासन ने इन गांवों में 82 नावें लगाई गई हैं।
एसडीएम गुलाम सरवर ने बताया कि घाघरा के साथ ही सरयू नदी का पानी भी क्षेत्र में तेजी के साथ फैल रहा है। क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में अब तक 105 नावें लगाई जा चुकी है। 1500 से अधिक परिवारों को राहत किट वितरित की गई है। उन्होंने बताया कि पूरे क्षेत्र पर लगातार नजर रखी जा रही है।
विज्ञापन
गोंडा। घाघरा की विनाश लीला तेज होती जा रही है। घाघरा का जलस्तर घटने पर तबाही और बढ़ने पर भीषण तबाही का दौर चल रहा है। बीते 24 घंटे में घाघरा 18 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच कर पिछले रिकॉर्ड को तोड़ने में लगी है।
जानकारी के मुताबिक पहाड़ों पर हो रही लगातार बरसात से घाघरा का जलस्तर अभी और बढ़ने की संभावनाएं हैं। घाघरा के तेजी से बढ़ रहे जलस्तर से जिन गांवों में अभी बाढ़ का पानी नहीं पहुंचा है। उन ग्रामीणों की धड़कन तेज हो गई है।
विज्ञापन
सोमवार की सुबह से घाघरा नदी का जलस्तर फिर से बढ़ने लगा। शनिवार की शाम को 4 बजे तक घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान 106.07 के सापेक्ष 106.606 पर पहुंचकर 53 सेंटीमीटर ऊपर था तो सोमवार को घाघरा का जलस्तर बढ़ कर 106.786 पहुंच गया जो खतरे के निशान से 70 सेंटीमीटर ऊपर है।
विज्ञापन
जलस्तर घटने बढ़ने का सिलसिला लगातार जारी है। मगर इससे क्षेत्र में पानी के फैलाव में कमी नहीं आ रही है। लगातार बाढ़ का पानी क्षेत्र में तेजी से फैल रहा है। जिससे चारों तरफ पानी ही पानी दिखाई दे रहा है।
एक तरफ घाघरा तो दूसरी तरफ सरयू नदी का पानी क्षेत्र की ग्राम पंचायतों के मजरों को अपने आगोश में लेता जा रहा है। जिससे बाढ़ से प्रभावित पीड़ितों की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं।
अधिकतर लोगों के घरों में पानी भरा है। जिससे कुछ लोगों का छप्पर का घर गिर चुका है, कुछ लोगों का गिरने के कगार पर है। जिससे पीड़ितों का सामान बर्बाद हो रहा है, ईंधन न होने से भोजन बनाने की समस्या उत्पन्न हो गई है।
बाढ़ पीड़ितों को न तो सोने की जगह है न ही भोजन बनाने के लिए संशाधन हैं। लगातार पानी में रहने से पीड़ितों के पैर सड़ चुके हैं। विषैले जंतुओं और मच्छरों से बीमारी भी बढ़ती जा रही है। घाघरा व सरयू नदी से निकल रहे बाढ़ के पानी से अब तक क्षेत्र की 42 ग्राम पंचायतों के 160 से अधिक मजरे प्रभावित हो चुके हैं।
जिसमे गौरासिंहपुर, नकहरा, काशीपुर, नकार, वैदपुर, चन्द्रहरिया, बसेरिया, मोहम्मदपुर गड़वार एवं सरैंया, घरकुइयाँ, प्रतापपुर, दिवली, भटपुरवा, सहित अन्य ग्राम पंचायतें घाघरा के पानी से प्रभावित हैं।
वहीं मलौना, नरायनपुर माझा, हीरापुर कमियार, अल्लीपुर गोकुला, सकरौरा ग्रामीण, बसेहिया, लालेमउ, कचनापुर एवं फत्तेपुर कोटहना, मलौना, मलौली, परसोली, कैथौली सहित कई अन्य ग्राम पंचायतें सरयू नदी के पानी से प्रभावित है। प्रशासन ने इन गांवों में 82 नावें लगाई गई हैं।
एसडीएम गुलाम सरवर ने बताया कि घाघरा के साथ ही सरयू नदी का पानी भी क्षेत्र में तेजी के साथ फैल रहा है। क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में अब तक 105 नावें लगाई जा चुकी है। 1500 से अधिक परिवारों को राहत किट वितरित की गई है। उन्होंने बताया कि पूरे क्षेत्र पर लगातार नजर रखी जा रही है।