फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   घाघरा के मुहाने पर आए नैलगंज के पांच दर्जन गांव

घाघरा के मुहाने पर आए नैलगंज के पांच दर्जन गांव

Sun, 02 Jul 2017 10:31 PM IST
Updated Sun, 02 Jul 2017 10:31 PM IST
विज्ञापन
घाघरा के  मुहाने पर आए नैलगंज के पांच दर्जन गांव
घाघरा के निशाने पर सवा लाख की आबादी
विज्ञापन

नदी के मुहाने पर आए नैलगंज के पांच दर्जन गांव
लोगों को बाढ़ से बचाने के लिए इस बार बांध है न बंधा
अमर उजाला ब्यूरो
करनैलगंज/गोंडा। घाघरा नदी का जलस्तर तेजी से बढना शुरू हो गया है। खतरे के निशान 106.07 से जहां कल तक नदी का जलस्तर 5 मीटर नीचे था, वह जलस्तर अब सिर्फ चार मीटर ही खतरे के निशान से नीचे रह गया है। नदी के बढ़ते जलस्तर से जहां तहसील करनैलगंज के 5 दर्जन गांव सीधे-सीधे नदी के मुहाने पर हैं। यहां की सवा लाख की आबादी में बेचैनी इस बात की है कि पिछले साल तो उन्हें बंधे ने बचा लिया था। लेकिन अबकी बार न तो बांध है न ही बंधा। ऐसे में अगर बाढ़ आई तो उन्हें बचाएगा कौन।
तहसीलक्षेत्र करनैलगंज में पडने वाले काशीपुर, नकहरा, प्रतापपुर, घरकुंइया, गौरा मांझा, परसावल, रायपुर, बेहटा, बमबमपुरवा, कमियार, पूरे अजब, पूरे अंगद, जैसे कई गांव घाघरा नदी के बिल्कुल किनारे-किनारे बसे हैं। पिछले साल जिस समय इस इलाके मे बाढ़ आई थी तो रायपुर गांव के किनारे-किनारे घाघरा ने ऐसी कटान की थी कि जिससे एल्गिन-चरसड़ी बांध का सफाया हो गया था। यहां तक कि इस बांध के किनारे बनाया गया रिंग बांध भी नदी के बहाव में कटकर बह गया था। जिसकी मरम्मत बीते एक साल में नहीं हो पाई। मानसून आने के बाद पहाड़ों पर हो रही बरसात से जिस तरह घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। उससे इलाकाई लोगों की बेचैनी भी बढ़ने लगी है।
विज्ञापन

मानसून की दस्तक बरसात के साथ पहाडी नालों के पानी की आमद घाघरा में तेज हो गई है। बाढ़ के पानी को करनैलगंज तहसील क्षेत्र के गांवों में सीधे घुसने का रास्ता पहले से ही साफ है। बस पानी आने की देरी है। आशंका जताई जा रही है कि जिस तेजी से नदी का जलस्तर बढ़ रहा है, उसी तरह अगर नदी में पानी बढ़ता रहा तो एक हफ्ते में बांध के किनारे बसे एक दर्जन से ऊपर गांव नदी के पानी की चपेट में आ जाएंगे। वहीं घाघरा में बाढ बेकाबू होने का खतरा भी मंडरा रहा है। नदी में पानी लगातार बढने से घाघरा नदी किसानों की जमीनों को काटती हुई तेजी से आगे बढ़ रही है। जिससे ग्रामीणों की धड़कने बढ़ने लगी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

इनसेट
जियो ट्यूब से नदी के पानी को रोकने का हो रहा इंतजाम
घाघरा नदी के जिस हिस्से में बांध कटा है और जहां नदी का पानी सीधे बांध से टकरा रहा है, वहां सिंचाई विभाग की ओर से जियो ट्यूब के जरिए नदी के पानी को रोकने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि यह कितना असरदार साबित होता है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन रविवार को जब सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता यहां पहुंचे तो उन्हें इस काम में भी अनियमिता नजर आई। मख्य अभियंता बीपी सिंह ने रिंग बांध पर पानी को रोकने के लिए काम न होने पर नाराजगी जताई। बांध पर सौ-सौ मीटर का प्लेट फार्म बनाने के निर्देश दिए गये थे मगर अब तक उसका भीा काम नहीं हुआ है। उन्होंने बांध व जीओ टयूब के बीच बालू भर बोरियों को प्लांट करने के साथ ही नदी से मोटर बोट हटाने निर्देश दिये। इस दौरान उनके साथ अधीक्षण अभियन्ता आरपी सिंह, अधिशाषी अभियन्ता विश्वनाथ शुुक्ला, सहायक अभियन्ता अमरेश सिंह मौजूद रहे।
इनसेट
कुमायूं रेजीमेंट, एनडीआरएफ और फ्लड पीएसी की है व्यवस्था
इस बार घाघरा नदी से आने वाली संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने कुमायूं रेजजीमेंट की आर्मी सहित एनडीआरएफ व फ्लड पीएसी को पहले से ही पत्र लिख रखा है। साथ ही जानवारों के चारे से लेकर उनके टीकाकरण की भी व्यवस्था पहले से करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। ठेकेदारों से नावों के लिए बांड भी भरा लिया गया है। ताकि किसी भी समय जरूरत पड़ने पर मदद के लिए सारे लोग तैयार रहें।
इनसेट
डीएम का आदेश किया दरकिनार
जिलाधिकारी जेबी सिंह ने कुछ दिनों पहले पहले घाघरा नदी में तेजी से बढ़ रहे पानी को रोकने के लिए सिंचाई विभाग के अफसरों को तीन स्पर बनाए जाने का निर्देश दिया था। बावजूद इसके सिंचाई विभाग के अफसरों ने किसी भी एक स्पर का निर्माण नही कराया। वहीं नदी में गहराई बढाने के लिए महीनों से चलाई जा रही ड्रोजर मशीन को भी हटा दिया गया है।

इनसेट
बाढ़ नियंत्रण खंड की मंत्री का दौरा टला
रविवार को बाढ़ नियंत्रण खंड मंत्री स्वाती सिंह को एल्गिन-चरसड़ी बांध के दौरे पर आना था। लेकिन ऐन मौके पर उनका कार्यक्रम रद्द हो गया। हालांकि उन्होंने खुद न आकर अपनी जगह सिंचाई विभाग के इंजीनियरों को वहां की वस्तु स्थिति का पता करने के लिए जरूर भेजा। लेकिन अगर मंत्री का दौरा हो जाता तो शायद वह भी यहां की स्थिति से भलीभांति वाकिफ हो जातीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed