{"_id":"5f6b79898ebc3edf2a4e2e74","slug":"5000-houses-were-built-on-nazul-land-in-the-city-gonda-news-lko541638545","type":"story","status":"publish","title_hn":"शहर में नजूल जमीनों पर बन गए 5000 मकान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शहर में नजूल जमीनों पर बन गए 5000 मकान
विज्ञापन
गोंडा के महराजगंज बस स्टाप के समीप अवैध कब्जा कर नजूल की जमीन पर बनी दुकानें।
- फोटो : GONDA
गोंडा। शहर में नजूल की भूमि पर लोगों की निगाहें टिक गई हैं। पांच हजार से अधिक मकान तो बिना फ्री होल्ड के ही बन गए हैं और अब इनकी जांच प्रक्रिया भी रुक गई है। फ्री होल्ड पर भी रोक लगने के कारण लोगों ने घर तो बना लिए लेकिन आगे की प्रक्रिया नहीं की है। जो मकान बने हैं वे तो हैं ही और भी लगातार बनते ही जा रहे है। कई सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों का शोर है पर कार्रवाई नहीं हो रही है। अधिकारियों का कहना है कि अभी नजूल भूमि के फ्री होल्ड की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में शिकायत मिलने पर ही कार्रवाई की जाती है।
शहर में नजूल की जमीनों पर कब्जे का कोई नया मामला नहीं है। बीते वर्ष 2014-15 में तो गांधी पार्क के ही भूखंड के बैनामे का मामला उजागर हुआ था। उस समय नजूल अधीक्षक समेत कइयों पर कार्रवाई हुई थी। यही नहीं हाल ही में कई मामलों पर जिलाधिकारी ने कार्रवाई की और मामले न्यायालयों में लंबित हैं। वर्ष 2019 में बड़गांव चौराहे से जय नरायन चौराहे तक करीब 113 स्थानों पर अवैध कब्जों पर कार्रवाई हुई थी और एक होटल समेत कई दुकानों को ढहाया भी जा चुका है। इसी तरह अब एक बार फिर अवैध कब्जों की खासी चर्चा है।
बड़गांव में अवैध कब्जा ढहाने के बाद अंकुुश की थी उम्मीद
नजूल भूमि के फर्जीवाडे़ में जिले की तीन नगर पालिकाओं में गोंडा नगर पालिका सबसे ऊपर है। यहां नजूल की भूमि को तमाम लोगों ने जालसाजी कर फ्री-होल्ड कराया है। मगर अभी तक किसी ने इसकी जांच नहीं कराई है। लेकिन वर्ष 2019 में जिला प्रशासन ने तेजी दिखाते हुए एक मामले का खुलासा कर बड़ी कार्रवाई की तो अवैध कब्जों पर अंकुश की उम्मीद थी। लेकिन एक बार फिर वही खेल शुरू हो गया है।
विज्ञापन
पहले कई बड़े मामले आ चुके हैं सामने, हुई है कार्रवाई
राजा मोहल्ला में करबला जाने वाली रोड पर स्थित नजूल की जमीन को पूर्ववर्ती चेयरमैन के कार्यकाल में पहले तो फ्री-होल्ड करवाया गया, बाद में इस जमीन को लोगों के हाथों बेच दिया गया। इसी तरह सिविल लाइन में खाली पड़ी नजूल की जमीन को भी फ्री-होल्ड कराया गया और इस जमीन को भी बेच दिया गया। मनकापुर बाईपास पर बनी दुकानें भी इसी घोटाले की एक बड़ी नजीर हैं। इसके अलावा रानीबाजार से लेकर सिविल लाइन इलाके में तमाम जगहों पर खाली पड़ी नजूल की जमीन को फ्री-होल्ड कराया गया। जिस पर आज बड़ी-बड़ी इमारतें बनी खड़ी हैं। सिविल लाइन इलाके में एक पूर्व चेयरमैन के नाम से वर्ष 1999-2000 के बीच में फ्री होल्ड नियमों की अनदेखी करके किए जाने का मामला फाइलों में कैद है।
गोंडा में होने वाले नजूल भूमि के फर्जीवाड़ों को लेकर अब तक दो पूर्व पालिकाध्यक्षों समेत कई अन्य के खिलाफ कोतवाली नगर में प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है। जिसमें से 25 अक्तूबर 2011 को कोतवाली नगर में दर्ज एफआईआर में नपाप के पूर्व चेयरमैन कमरुद्दीन समेत पांच अन्य को आरोपी बनाया गया था। इस मामले में कोतवाली पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगाकर मामला न्यायालय भेज दिया था। जबकि एक अन्य मामले में दो साल पहले पूर्व पालिकाध्यक्ष राजकिशोर अग्रवाल के खिलाफ दर्ज मुकदमे का कोई पता नहीं चल सका है। इसके अलावा वर्ष 2014 में नजूल जमीनों में फर्जीवाड़े की जांच शुरू हुई थी जो फाइलों में ही कैद हो गई है।
कोविड प्रोटोकॉल के चलते रुकी है कार्रवाई
कोविड प्रोटोकॉल से शासन स्तर पर नजूल के मामलों में कार्रवाई रोक दी गई थी। शासन से कोई आदेश मिलते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल शिकायतों के मिलने पर आगे की कार्रवाई होगी। -राकेश कुमार सिंह, एडीएम
विज्ञापन
शहर में नजूल की जमीनों पर कब्जे का कोई नया मामला नहीं है। बीते वर्ष 2014-15 में तो गांधी पार्क के ही भूखंड के बैनामे का मामला उजागर हुआ था। उस समय नजूल अधीक्षक समेत कइयों पर कार्रवाई हुई थी। यही नहीं हाल ही में कई मामलों पर जिलाधिकारी ने कार्रवाई की और मामले न्यायालयों में लंबित हैं। वर्ष 2019 में बड़गांव चौराहे से जय नरायन चौराहे तक करीब 113 स्थानों पर अवैध कब्जों पर कार्रवाई हुई थी और एक होटल समेत कई दुकानों को ढहाया भी जा चुका है। इसी तरह अब एक बार फिर अवैध कब्जों की खासी चर्चा है।
विज्ञापन
बड़गांव में अवैध कब्जा ढहाने के बाद अंकुुश की थी उम्मीद
नजूल भूमि के फर्जीवाडे़ में जिले की तीन नगर पालिकाओं में गोंडा नगर पालिका सबसे ऊपर है। यहां नजूल की भूमि को तमाम लोगों ने जालसाजी कर फ्री-होल्ड कराया है। मगर अभी तक किसी ने इसकी जांच नहीं कराई है। लेकिन वर्ष 2019 में जिला प्रशासन ने तेजी दिखाते हुए एक मामले का खुलासा कर बड़ी कार्रवाई की तो अवैध कब्जों पर अंकुश की उम्मीद थी। लेकिन एक बार फिर वही खेल शुरू हो गया है।
विज्ञापन
पहले कई बड़े मामले आ चुके हैं सामने, हुई है कार्रवाई
राजा मोहल्ला में करबला जाने वाली रोड पर स्थित नजूल की जमीन को पूर्ववर्ती चेयरमैन के कार्यकाल में पहले तो फ्री-होल्ड करवाया गया, बाद में इस जमीन को लोगों के हाथों बेच दिया गया। इसी तरह सिविल लाइन में खाली पड़ी नजूल की जमीन को भी फ्री-होल्ड कराया गया और इस जमीन को भी बेच दिया गया। मनकापुर बाईपास पर बनी दुकानें भी इसी घोटाले की एक बड़ी नजीर हैं। इसके अलावा रानीबाजार से लेकर सिविल लाइन इलाके में तमाम जगहों पर खाली पड़ी नजूल की जमीन को फ्री-होल्ड कराया गया। जिस पर आज बड़ी-बड़ी इमारतें बनी खड़ी हैं। सिविल लाइन इलाके में एक पूर्व चेयरमैन के नाम से वर्ष 1999-2000 के बीच में फ्री होल्ड नियमों की अनदेखी करके किए जाने का मामला फाइलों में कैद है।
गोंडा में होने वाले नजूल भूमि के फर्जीवाड़ों को लेकर अब तक दो पूर्व पालिकाध्यक्षों समेत कई अन्य के खिलाफ कोतवाली नगर में प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है। जिसमें से 25 अक्तूबर 2011 को कोतवाली नगर में दर्ज एफआईआर में नपाप के पूर्व चेयरमैन कमरुद्दीन समेत पांच अन्य को आरोपी बनाया गया था। इस मामले में कोतवाली पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगाकर मामला न्यायालय भेज दिया था। जबकि एक अन्य मामले में दो साल पहले पूर्व पालिकाध्यक्ष राजकिशोर अग्रवाल के खिलाफ दर्ज मुकदमे का कोई पता नहीं चल सका है। इसके अलावा वर्ष 2014 में नजूल जमीनों में फर्जीवाड़े की जांच शुरू हुई थी जो फाइलों में ही कैद हो गई है।
कोविड प्रोटोकॉल के चलते रुकी है कार्रवाई
कोविड प्रोटोकॉल से शासन स्तर पर नजूल के मामलों में कार्रवाई रोक दी गई थी। शासन से कोई आदेश मिलते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल शिकायतों के मिलने पर आगे की कार्रवाई होगी। -राकेश कुमार सिंह, एडीएम