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जिले में दलहन को मिलेगा उद्योग का दर्जा
Updated Thu, 09 Aug 2018 10:16 PM IST
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गोंडा में दलहन को मिलेगा उद्योग का दर्जा
गोंडा। प्रदेश सरकार की वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट स्कीम में गोंडा की दलहन फसल को स्वीकृति मिली है। उद्योग एवं प्रोत्साहन विभाग की ओर से स्कीम को आगे बढ़ाने की मुहिम शुरू कर दी गई है।
शासन ने दलहन की खेती को उद्योग का दर्जा देने के साथ ही उनके किसानों और उद्यमियों को एकसाथ जोड़ने की मुहिम शुरू की है।
उद्योग विभाग ने जिले में दलहन का उत्पादन कम होने और सिर्फ एक ही उद्यमी होने का हवाला देते हुए स्कीम में चावल को भी शामिल कराने का प्रस्ताव डीएम से भेजवाया है। शासन ने फिलहाल दलहन को ही स्वीकृति दी है।
चावल को अतिरिक्त प्रोडक्ट के रूप शामिल करने पर सैद्घांतिक सहमति दी है। शुक्रवार को राजधानी में होने वाले कार्यक्रम में गोंडा को तीन स्टॉल दिए गए हैं, दो स्टाल दाल के हैं तो एक स्टाल चावल का भी होगा। विभाग इसे भी बड़ी उपलब्धि मान रहा है।
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शासन की वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट स्कीम में दलहन को शामिल किए जाने से दलहन की खेती को संजीवनी मिलेगी। दरअसल दलहन की खेती सीमित हो गई थी। जिले में 27231 हेक्टेयर क्षेत्रफल में ही दलहन की खेती होती है।
किसानों की संख्या भी सीमित है। एक लाख से कम ही किसान दलहन फसलों की खेती करते हैं। बताया जा रहा है कि, किसी जमाने में दलहन फसल गोंडा की मुख्य फसल होने के साथ ही यहां के लोगों का प्रमुख व्यवसाय था।
मगर धीरे-धीरे बाजार और ब्रांड नहीं मिलने से दायरा सिमट गया। अब एक बार फिर दलहन की फसलों को प्रमुखता देने की योजना बनाने के साथ ही दाल व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा।
किसानों का दलहन फसलों से मोहभंग होने का मुख्य कारण दाल के व्यवसाय में उद्यमियों का नहीं होना था। दाल की ब्रांडिंग के लिए कोई प्रयास नहीं हुआ तो बाहर की दाल ही यहां फुटकर व्यवसायी बेचने लगे।
एकमात्र दाल इंडस्ट्रीज होने से दाल को बाजार ही नहीं मिल सका। इससे दलहन फसलों की बोआई किसानों ने बंद कर दी। अब उद्योग विभाग 200 उद्यमियों को प्रोत्साहित कर रहा है।
इन नए उद्यमियों को बैंकों की ओर से पांच करोड़ एक लाख 87 हजार रुपये ऋण स्वीकृत किया गया है। नए उद्यमी किसानों को बाजार देने का काम करेंगे।
दलहन फसलों के किसानों की समस्याएं दूर करने के साथ ही उन्हें तकनीकी जानकारी दी जाएगी। अभी तक दलहन फसलों के किसानों के लिए विशेष प्रयास नहीं किए जाते थे।
अब बैंक से केसीसी व अन्य ऋण की सुविधाएं दिलाने के साथ ही सरकारी सहायता भी दी जाएगी। बीज की व्यवस्था कराने, खेती के तकनीकी जानकारी देने की व्यवस्था भी होगी।
उत्पादन की बिक्री कराने के साथ ही ब्रांडिंग भी की जाएगी। इससे किसान प्रोत्साहित होंगे। दाल के व्यवसायी को भी बैंक सुविधा के साथ ही बाजार दिलाने के लिए उद्योग विभाग कार्य करेगा।
उद्योग एवं निर्यात प्रोत्साहन उपायुक्त, गोंडा अश्विनी कुमार वर्मा का कहना है कि, वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट स्कीम के तहत जिले में दलहन को शासन ने शामिल किया है।
दलहन की फसलों का क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए प्रयास होगा। किसानों और उद्यमियों को हर तरह की सुविधा दी जाएगी। गोंडा की दालों को पूरे प्रदेश में बाजार दिलाने के लिए प्रयास होगा। किसानों व उद्यमियों को अच्छी उपज और अच्छा मूल्य दिलाया जाएगा।
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गोंडा। प्रदेश सरकार की वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट स्कीम में गोंडा की दलहन फसल को स्वीकृति मिली है। उद्योग एवं प्रोत्साहन विभाग की ओर से स्कीम को आगे बढ़ाने की मुहिम शुरू कर दी गई है।
शासन ने दलहन की खेती को उद्योग का दर्जा देने के साथ ही उनके किसानों और उद्यमियों को एकसाथ जोड़ने की मुहिम शुरू की है।
उद्योग विभाग ने जिले में दलहन का उत्पादन कम होने और सिर्फ एक ही उद्यमी होने का हवाला देते हुए स्कीम में चावल को भी शामिल कराने का प्रस्ताव डीएम से भेजवाया है। शासन ने फिलहाल दलहन को ही स्वीकृति दी है।
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चावल को अतिरिक्त प्रोडक्ट के रूप शामिल करने पर सैद्घांतिक सहमति दी है। शुक्रवार को राजधानी में होने वाले कार्यक्रम में गोंडा को तीन स्टॉल दिए गए हैं, दो स्टाल दाल के हैं तो एक स्टाल चावल का भी होगा। विभाग इसे भी बड़ी उपलब्धि मान रहा है।
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शासन की वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट स्कीम में दलहन को शामिल किए जाने से दलहन की खेती को संजीवनी मिलेगी। दरअसल दलहन की खेती सीमित हो गई थी। जिले में 27231 हेक्टेयर क्षेत्रफल में ही दलहन की खेती होती है।
किसानों की संख्या भी सीमित है। एक लाख से कम ही किसान दलहन फसलों की खेती करते हैं। बताया जा रहा है कि, किसी जमाने में दलहन फसल गोंडा की मुख्य फसल होने के साथ ही यहां के लोगों का प्रमुख व्यवसाय था।
मगर धीरे-धीरे बाजार और ब्रांड नहीं मिलने से दायरा सिमट गया। अब एक बार फिर दलहन की फसलों को प्रमुखता देने की योजना बनाने के साथ ही दाल व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा।
किसानों का दलहन फसलों से मोहभंग होने का मुख्य कारण दाल के व्यवसाय में उद्यमियों का नहीं होना था। दाल की ब्रांडिंग के लिए कोई प्रयास नहीं हुआ तो बाहर की दाल ही यहां फुटकर व्यवसायी बेचने लगे।
एकमात्र दाल इंडस्ट्रीज होने से दाल को बाजार ही नहीं मिल सका। इससे दलहन फसलों की बोआई किसानों ने बंद कर दी। अब उद्योग विभाग 200 उद्यमियों को प्रोत्साहित कर रहा है।
इन नए उद्यमियों को बैंकों की ओर से पांच करोड़ एक लाख 87 हजार रुपये ऋण स्वीकृत किया गया है। नए उद्यमी किसानों को बाजार देने का काम करेंगे।
दलहन फसलों के किसानों की समस्याएं दूर करने के साथ ही उन्हें तकनीकी जानकारी दी जाएगी। अभी तक दलहन फसलों के किसानों के लिए विशेष प्रयास नहीं किए जाते थे।
अब बैंक से केसीसी व अन्य ऋण की सुविधाएं दिलाने के साथ ही सरकारी सहायता भी दी जाएगी। बीज की व्यवस्था कराने, खेती के तकनीकी जानकारी देने की व्यवस्था भी होगी।
उत्पादन की बिक्री कराने के साथ ही ब्रांडिंग भी की जाएगी। इससे किसान प्रोत्साहित होंगे। दाल के व्यवसायी को भी बैंक सुविधा के साथ ही बाजार दिलाने के लिए उद्योग विभाग कार्य करेगा।
उद्योग एवं निर्यात प्रोत्साहन उपायुक्त, गोंडा अश्विनी कुमार वर्मा का कहना है कि, वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट स्कीम के तहत जिले में दलहन को शासन ने शामिल किया है।
दलहन की फसलों का क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए प्रयास होगा। किसानों और उद्यमियों को हर तरह की सुविधा दी जाएगी। गोंडा की दालों को पूरे प्रदेश में बाजार दिलाने के लिए प्रयास होगा। किसानों व उद्यमियों को अच्छी उपज और अच्छा मूल्य दिलाया जाएगा।