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घाघरा के सैलाब से 500 गांव आए निशाने पर
Updated Sun, 13 Aug 2017 10:47 PM IST
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घाघरा के सैलाब से 460 गांव में तबाही
करीब 500 गांव आए नदी के निशाने पर, 33 और गांव में घुसा पानी
अमर उजाला ब्यूरो
करनैलगंज(गोंडा)। क्षेत्र के लिए बाढ़ एक बड़ी त्रासदी बन चुकी है। लगातार बाढ़ एवं प्रभावित गांवों का दायरा बढ़ता जा रहा है। घाघरा के उफान ने लाखों परिवारों की जिंदगी दूभर कर दी है। भीषण बाढ़ की चपेट में आए गांवों के निवासियों को अब खाने के साथ पेयजल की किल्लत से दो चार होना पड़ रहा है। प्रतिदिन प्लास्टिक के गैलन में ऊंचे स्थान से पानी, राशन, भोजन लेकर घर पहुंचते हैं और परिवार को जिंदगी प्रदान करते हैं। रविवार को क्षेत्र में घाघरा का पानी तेजी से फैला और 33 नये गांव को आगोश में ले लिया। इससे बाढ़ से प्रभावित गांवों की संख्या 500 के पार हो गई है। जिनमें से 460 गांव में पानी के कारण तबाही का मंजर है।
बाढ़ का कहर दिनों दिन बिकराल रूप लेता जा रहा है। गोंडा जिले की करीब 62 तथा जिले की सीमा से लगे बाराबंकी जिले की 7 ग्राम पंचायतों के 501 मजरे अब तक बाढ़ की चपेट में आ चुुके हैं। वहीं प्रशासन के खाते में अभी तक गोंडा जिले के प्रभावित गांव की संख्या करीब 460 तक ही सीमित हैं। ग्राम चरसड़ी के निकट ग्रामीणों द्वारा एल्गिन-चरसडी बांध को दो स्थानों पर काट देने के बाद करनैलगंज इलाके के लिए एक नई मुसीबत खड़ी हो गई है। घाघरा का पानी कटे बांध के जरिए सरयू नदी में आने लगा है। जिससे सरयू का जलस्तर भी बढने बनाने लगा है। यदि पानी का तेजी से आना शुरू हो गया तो करनैलगंज की करीब एक दर्जन ऐसी ग्राम पंचायतें बाढ़ से प्रभावित होगीं जिसका प्रशासन को अनुमान तक नहीं है। घाघरा का जलस्तर पिछले तीन दिनों से खतरे के निशान से करीब 70 सेंटीमीटर ऊपर ही स्थिर है। जबकि विभिन्न बैराजों से छोड़ा गया करीब तीन लाख क्यूसेक पानी नदी की धारा से होते हुए करनैलगंज इलाकें में तेजी से फैल रहा है। जिससे जगह-जगह मार्गों के बंद होने एवं सड़कों पर जलभराव की नौबत बन गई है। पानी का बहाव करनैलगंज क्षेत्र की ओर सीधे होने के कारण जलस्तर के माप में वृद्धि का अनुमान नहीं लग पा रहा है। शनिवार को पानी का डिस्चार्ज करीब तीन लाख क्यूसेक रहा तो रविवार को डिस्चार्ज करीब ढाई लाख के ऊपर रहा।
इनसेट
बाढ़ से घिरी ग्राम पंचायतें
करनैलगंज(गोंडा)। बाढ़ से प्रभावित ग्राम पंचायतें काशीपुर, नकहरा, प्रतापपुर, वैद्यपुर, भटपुरवा, रेक्सडिय़ा, पूरेअंगद, पूरेअजब, शाहपुर, बहुवन मदार माझा, भौरीगंज, नंदौर, दूदी, बरदहा, परेटा, गौरासिंहपुर, रमवापुर, बरगदिया, चरसड़ी, रायपुर, शिवगढ़, नरायनपुर जयसिंह, नैनुआ जगन्नाथपुर, घरकुंइयां, अतरसुइया, चंद्रभानपुर, चंद्रहरिया, नकार, पाल्हापुर, गुमदहा, लालेमऊ, दिउली, मोहम्मदपुर गढ़वार, बसेरिया, चंदापुर किटौली, पसका, नंदौर, सकरौर, रुदौली, टेंगनहां, सरैंया, सकतपुर, फत्तेपुर कोटहना, धनावा, रामपुर, बरतरा, नरायनपुर साल, नरायनपुर ललक, पसका, बेलहरी, कोनहटा, विवियापुर मौजूदा समय में इन ग्राम पंचायतों के मजरे बाढ़ की चपेट में आ चुुके हैं। इनके प्रभावित मजरों की संख्या 449 हो गई है। इसके अलावा बाराबंकी जिले की 8 ग्राम पंचायतें रायपुर मांझा, कमियार, परसावल, बेहटा, नैपुरा, पारा, बांसगांव, असवा के कई मजरे बाढ़ के पानी से जलमग्न हैं।
करीब 500 गांव आए नदी के निशाने पर, 33 और गांव में घुसा पानी
अमर उजाला ब्यूरो
करनैलगंज(गोंडा)। क्षेत्र के लिए बाढ़ एक बड़ी त्रासदी बन चुकी है। लगातार बाढ़ एवं प्रभावित गांवों का दायरा बढ़ता जा रहा है। घाघरा के उफान ने लाखों परिवारों की जिंदगी दूभर कर दी है। भीषण बाढ़ की चपेट में आए गांवों के निवासियों को अब खाने के साथ पेयजल की किल्लत से दो चार होना पड़ रहा है। प्रतिदिन प्लास्टिक के गैलन में ऊंचे स्थान से पानी, राशन, भोजन लेकर घर पहुंचते हैं और परिवार को जिंदगी प्रदान करते हैं। रविवार को क्षेत्र में घाघरा का पानी तेजी से फैला और 33 नये गांव को आगोश में ले लिया। इससे बाढ़ से प्रभावित गांवों की संख्या 500 के पार हो गई है। जिनमें से 460 गांव में पानी के कारण तबाही का मंजर है।
बाढ़ का कहर दिनों दिन बिकराल रूप लेता जा रहा है। गोंडा जिले की करीब 62 तथा जिले की सीमा से लगे बाराबंकी जिले की 7 ग्राम पंचायतों के 501 मजरे अब तक बाढ़ की चपेट में आ चुुके हैं। वहीं प्रशासन के खाते में अभी तक गोंडा जिले के प्रभावित गांव की संख्या करीब 460 तक ही सीमित हैं। ग्राम चरसड़ी के निकट ग्रामीणों द्वारा एल्गिन-चरसडी बांध को दो स्थानों पर काट देने के बाद करनैलगंज इलाके के लिए एक नई मुसीबत खड़ी हो गई है। घाघरा का पानी कटे बांध के जरिए सरयू नदी में आने लगा है। जिससे सरयू का जलस्तर भी बढने बनाने लगा है। यदि पानी का तेजी से आना शुरू हो गया तो करनैलगंज की करीब एक दर्जन ऐसी ग्राम पंचायतें बाढ़ से प्रभावित होगीं जिसका प्रशासन को अनुमान तक नहीं है। घाघरा का जलस्तर पिछले तीन दिनों से खतरे के निशान से करीब 70 सेंटीमीटर ऊपर ही स्थिर है। जबकि विभिन्न बैराजों से छोड़ा गया करीब तीन लाख क्यूसेक पानी नदी की धारा से होते हुए करनैलगंज इलाकें में तेजी से फैल रहा है। जिससे जगह-जगह मार्गों के बंद होने एवं सड़कों पर जलभराव की नौबत बन गई है। पानी का बहाव करनैलगंज क्षेत्र की ओर सीधे होने के कारण जलस्तर के माप में वृद्धि का अनुमान नहीं लग पा रहा है। शनिवार को पानी का डिस्चार्ज करीब तीन लाख क्यूसेक रहा तो रविवार को डिस्चार्ज करीब ढाई लाख के ऊपर रहा।
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बाढ़ से घिरी ग्राम पंचायतें
करनैलगंज(गोंडा)। बाढ़ से प्रभावित ग्राम पंचायतें काशीपुर, नकहरा, प्रतापपुर, वैद्यपुर, भटपुरवा, रेक्सडिय़ा, पूरेअंगद, पूरेअजब, शाहपुर, बहुवन मदार माझा, भौरीगंज, नंदौर, दूदी, बरदहा, परेटा, गौरासिंहपुर, रमवापुर, बरगदिया, चरसड़ी, रायपुर, शिवगढ़, नरायनपुर जयसिंह, नैनुआ जगन्नाथपुर, घरकुंइयां, अतरसुइया, चंद्रभानपुर, चंद्रहरिया, नकार, पाल्हापुर, गुमदहा, लालेमऊ, दिउली, मोहम्मदपुर गढ़वार, बसेरिया, चंदापुर किटौली, पसका, नंदौर, सकरौर, रुदौली, टेंगनहां, सरैंया, सकतपुर, फत्तेपुर कोटहना, धनावा, रामपुर, बरतरा, नरायनपुर साल, नरायनपुर ललक, पसका, बेलहरी, कोनहटा, विवियापुर मौजूदा समय में इन ग्राम पंचायतों के मजरे बाढ़ की चपेट में आ चुुके हैं। इनके प्रभावित मजरों की संख्या 449 हो गई है। इसके अलावा बाराबंकी जिले की 8 ग्राम पंचायतें रायपुर मांझा, कमियार, परसावल, बेहटा, नैपुरा, पारा, बांसगांव, असवा के कई मजरे बाढ़ के पानी से जलमग्न हैं।
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