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Gonda News: सहकारिता से जुड़ खुशहाल बनेंगे 23 हजार किसान
Tue, 03 Oct 2023 11:59 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Tue, 03 Oct 2023 11:59 PM IST
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गोंडा। बदहाल सहकारी समितियों को समृद्ध बनाकर किसानों को खुशहाल करने की मुहिम अब रंग दिखाने लगी है। किसान अब खुद सहकारी समितियों की सदस्यता लेने को उत्साहित दिखने लगे हैं। इसके चलते ही सितंबर माह में बी-पैक्स सदस्यता अभियान के तहत 23,210 नए सदस्य बने, जिन्होंने करीब 50 लाख रुपये का शेयर बांड खरीदा। इससे आने वाले समय उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकेगी।
इसके साथ ही 33 समितियों ने मॉडल समिति बनाने के लिए आवेदन भी किया है। इससे किसानों से जुड़े कृषि संबंधी कार्य के साथ ही एनआईसी व ई-डिस्ट्रिक संबंधी कार्य भी आसानी से हो सकेंगे। जिले में 161 साधन सहकारी समितियां संचालित हैं, इसमें से अधिकांश समितियां बदहाल हो चुकी थी। इससे किसान भी समितियों से दूरी बनाने लगे थे। इस बीच समितियों की हालत सुधारने के लिए नई योजनाओं का शुभारंभ होने से किसानों का रुझान इन समितियों की ओर बढ़ने लगा। भविष्य में होने वाले फायदे को देखते हुए बड़ी संख्या में किसानों ने समितियों की सदस्यता भी ली।
किसान महज 21 रुपये की रसीद कटवाकर सहकारी समिति का सदस्य बन कर कम से कम 200 रुपये का शेयर बांड भी खरीद रहे हैं। यह समितियां किसानों को सस्ती दर पर खाद बीज व कृषि यंत्र मुहैया कराने के साथ ही ब्याज मुक्त ऋण देने की व्यवस्था भी सुनिश्चित कर रही हैं।
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अब प्रदेश सरकार की ओर से साधन सहकारी समितियों को वित्तीय मदद देने के लिए दस-दस लाख रुपये का क्रेडिट लिमिट दिया जाएगा। जिसका ब्याज भी किसानों को नहीं भरना होगा, प्रदेश सरकार की ओर से क्रेडिट लिमिट का ब्याज भरा जाएगा। इसके तहत प्रत्येक सदस्य कम से कम 200 रुपये का शेयर खरीदकर समिति से ऋण पाने का पात्र बन सकता है।
शासन स्तर से नई योजनाओं के संचालन के साथ ही काफी मेहनत कर 23 हजार सदस्य बनाए गए हैं। इसके बाद अब समितियों को मॉडल बनाने की कवायद चल रही है।
अशोक मौर्य, सहायक निबंधक सहकारिता
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इसके साथ ही 33 समितियों ने मॉडल समिति बनाने के लिए आवेदन भी किया है। इससे किसानों से जुड़े कृषि संबंधी कार्य के साथ ही एनआईसी व ई-डिस्ट्रिक संबंधी कार्य भी आसानी से हो सकेंगे। जिले में 161 साधन सहकारी समितियां संचालित हैं, इसमें से अधिकांश समितियां बदहाल हो चुकी थी। इससे किसान भी समितियों से दूरी बनाने लगे थे। इस बीच समितियों की हालत सुधारने के लिए नई योजनाओं का शुभारंभ होने से किसानों का रुझान इन समितियों की ओर बढ़ने लगा। भविष्य में होने वाले फायदे को देखते हुए बड़ी संख्या में किसानों ने समितियों की सदस्यता भी ली।
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किसान महज 21 रुपये की रसीद कटवाकर सहकारी समिति का सदस्य बन कर कम से कम 200 रुपये का शेयर बांड भी खरीद रहे हैं। यह समितियां किसानों को सस्ती दर पर खाद बीज व कृषि यंत्र मुहैया कराने के साथ ही ब्याज मुक्त ऋण देने की व्यवस्था भी सुनिश्चित कर रही हैं।
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अब प्रदेश सरकार की ओर से साधन सहकारी समितियों को वित्तीय मदद देने के लिए दस-दस लाख रुपये का क्रेडिट लिमिट दिया जाएगा। जिसका ब्याज भी किसानों को नहीं भरना होगा, प्रदेश सरकार की ओर से क्रेडिट लिमिट का ब्याज भरा जाएगा। इसके तहत प्रत्येक सदस्य कम से कम 200 रुपये का शेयर खरीदकर समिति से ऋण पाने का पात्र बन सकता है।
शासन स्तर से नई योजनाओं के संचालन के साथ ही काफी मेहनत कर 23 हजार सदस्य बनाए गए हैं। इसके बाद अब समितियों को मॉडल बनाने की कवायद चल रही है।
अशोक मौर्य, सहायक निबंधक सहकारिता