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स्कूल छोड़ने वाले 2226 छात्र खोजे जाएंगे
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गोंडा। बेसिक स्कूलों में भी छात्र बीच में पढ़ाई छोड़ रहे हैं। ऐसा कोरोना संकट की वजह से बीच-बीच में स्कूलों में पठन-पाठन बंद होने से हो रहा है। इस बार शासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। जिले के बेसिक स्कूलों से सात से 14 आयु वर्ग के 2226 छात्रों ने बीच में पढ़ाई बंद कर दी या फिर नामांकन ही नहीं कराया गया है।
अब इसके लिए विशेष अभियान चलेगा। इसके लिए विभाग को एक करोड़ 17 हजार रुपये का बजट भी मिलेगा। बच्चों का नामांकन करने पर उनकी पढ़ाई की सुविधाओं पर बजट खर्च होगा। इससे पहले बेसिक स्कूलों से पढ़ाई करके 18366 छात्र भी घर बैठ चुके हैं। इन छात्रों ने माध्यमिक स्कूलों में प्रवेश नहीं कराया। छात्रों की शिक्षा से दूरी होने से विभाग सकते में है।
शासन ने बीते दिनों बेसिक स्कूलों में न आने वाले छात्रों का ब्योरा तैयार किया है जिसमें सात से 10 आयु वर्ग के 1330 छात्र स्कूल नहीं जा रहे हैं। इसी तरह 11 से 14 आयुवर्ग के 896 छात्र स्कूलों से दूर हैं। अब इन छात्रों को स्कूल से जोड़ने के लिए अभियान शुरू होगा। विभाग के अनुसार यदि इन छात्रों ने बेसिक शिक्षा हासिल नहीं की तो आगे की पढ़ाई कैसे करेंगे। इसलिए बच्चों को स्कूलों से जोड़ने के लिए बजट भी तय किया।
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प्रत्येक छात्र पर 4500 रुपये खर्च होंगे। इस तरह एक करोड़ 17 लाख रुपये का बजट तय किया गया है। इसमें नामांकन कराने पर बच्चों को शिक्षा सामग्री दिए जाने की भी व्यवस्था होगी। इसमें प्रत्येक बच्चे पर 860 रुपये की दर से खर्च किया जाना है। इसके लिए 19 लाख 14 हजार 360 रुपये का बजट खर्च होगा। विभाग का पूरा प्रयास है कि कोई छात्र स्कूल में नामांकन से वंचित न रहे। स्कूल में नामांकित हैं तो स्कूल लाने के लिए जोर दिया जाना है। (संवाद)
बेसिक स्कूलों से पढ़ाई करने के बाद छात्र आगे प्रवेश नहीं ले रहे हैं। माध्यमिक स्तर की पढ़ाई से 18366 छात्रों ने मुंह मोड़ लिया है। बेसिक शिक्षा के स्कूलों से 64126 छात्रों ने शैक्षिक सत्र 2019-20 में कक्ष आठ की परीक्षा पास की थी। इसके बाद सत्र वर्ष 2020-21 में माध्यमिक स्कूलों की कक्षा में 45760 छात्रों ने ही प्रवेश लिया। इससे 18366 छात्रों ने कक्षा नौ में माध्यमिक स्कूल ही छोड़ दिया। अब विभाग की ओर से रिपोर्ट आने पर खलबली मची है।
बेसिक शिक्षा के हर नए शैक्षिक सत्र में कक्षा एक से आठ तक की कक्षाओं में प्रवेश के लिए स्कूल चलो अभियान चलाए जाते हैं। हर स्तर पर निगरानी होती है और प्रवेश के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है। माध्यमिक शिक्षा की ओर से ऐसा कोई अभियान नहीं चलाया जाता है। बेसिक शिक्षकों को कक्षा आठ पास करने वाले छात्रों को कक्षा नौ में प्रवेश के लिए प्रेरित करने की जिम्मेदारी मिली है। मार्च-अप्रैल से इसके लिए अभियान शुरू होगा।
कोरोना संकट में माध्यमिक स्कूल बंद रहे, इसके बाद भी अभिभावकों को शासन की ओर से कोई राहत नहीं मिली। बंदी के बाद भी स्कूलों के लिए कोई निर्देश फीस को लेकर शासन से जारी नहीं हुआ। इससे अभिभावकों को स्कूलों की कृपा पर जो छूट मिली, वही मिल सकी। इसी के कारण शैक्षिक सत्र में अभिभावकों ने प्रवेश कराने से हाथ खींच लिया।
यह भी एक कारण हो सकता है कि छात्रों ने आगे की कक्षा में प्रवेश नहीं लिया। अभिभावक परेशान रहे और कोई छूट नहीं पा सके। शासन ने रिपोर्ट जुटाई तो 18366 छात्रों का प्रवेश न होने की रिपोर्ट सामने आई। अब बेसिक शिक्षा मुहिम जारी हो गया।
सीडीओ शशांक त्रिपाठी ने बताया कि शिक्षा योजनाओं को प्रभावी ढंग से संचालित किए जाने पर जोर दिया जा रहा है। हर स्तर पर समीक्षा की जाएगी और प्रयास होगा कि सभी को शिक्षा मिले और योजनाओं का लाभ मिले।
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अब इसके लिए विशेष अभियान चलेगा। इसके लिए विभाग को एक करोड़ 17 हजार रुपये का बजट भी मिलेगा। बच्चों का नामांकन करने पर उनकी पढ़ाई की सुविधाओं पर बजट खर्च होगा। इससे पहले बेसिक स्कूलों से पढ़ाई करके 18366 छात्र भी घर बैठ चुके हैं। इन छात्रों ने माध्यमिक स्कूलों में प्रवेश नहीं कराया। छात्रों की शिक्षा से दूरी होने से विभाग सकते में है।
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शासन ने बीते दिनों बेसिक स्कूलों में न आने वाले छात्रों का ब्योरा तैयार किया है जिसमें सात से 10 आयु वर्ग के 1330 छात्र स्कूल नहीं जा रहे हैं। इसी तरह 11 से 14 आयुवर्ग के 896 छात्र स्कूलों से दूर हैं। अब इन छात्रों को स्कूल से जोड़ने के लिए अभियान शुरू होगा। विभाग के अनुसार यदि इन छात्रों ने बेसिक शिक्षा हासिल नहीं की तो आगे की पढ़ाई कैसे करेंगे। इसलिए बच्चों को स्कूलों से जोड़ने के लिए बजट भी तय किया।
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प्रत्येक छात्र पर 4500 रुपये खर्च होंगे। इस तरह एक करोड़ 17 लाख रुपये का बजट तय किया गया है। इसमें नामांकन कराने पर बच्चों को शिक्षा सामग्री दिए जाने की भी व्यवस्था होगी। इसमें प्रत्येक बच्चे पर 860 रुपये की दर से खर्च किया जाना है। इसके लिए 19 लाख 14 हजार 360 रुपये का बजट खर्च होगा। विभाग का पूरा प्रयास है कि कोई छात्र स्कूल में नामांकन से वंचित न रहे। स्कूल में नामांकित हैं तो स्कूल लाने के लिए जोर दिया जाना है। (संवाद)
बेसिक स्कूलों से पढ़ाई करने के बाद छात्र आगे प्रवेश नहीं ले रहे हैं। माध्यमिक स्तर की पढ़ाई से 18366 छात्रों ने मुंह मोड़ लिया है। बेसिक शिक्षा के स्कूलों से 64126 छात्रों ने शैक्षिक सत्र 2019-20 में कक्ष आठ की परीक्षा पास की थी। इसके बाद सत्र वर्ष 2020-21 में माध्यमिक स्कूलों की कक्षा में 45760 छात्रों ने ही प्रवेश लिया। इससे 18366 छात्रों ने कक्षा नौ में माध्यमिक स्कूल ही छोड़ दिया। अब विभाग की ओर से रिपोर्ट आने पर खलबली मची है।
बेसिक शिक्षा के हर नए शैक्षिक सत्र में कक्षा एक से आठ तक की कक्षाओं में प्रवेश के लिए स्कूल चलो अभियान चलाए जाते हैं। हर स्तर पर निगरानी होती है और प्रवेश के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है। माध्यमिक शिक्षा की ओर से ऐसा कोई अभियान नहीं चलाया जाता है। बेसिक शिक्षकों को कक्षा आठ पास करने वाले छात्रों को कक्षा नौ में प्रवेश के लिए प्रेरित करने की जिम्मेदारी मिली है। मार्च-अप्रैल से इसके लिए अभियान शुरू होगा।
कोरोना संकट में माध्यमिक स्कूल बंद रहे, इसके बाद भी अभिभावकों को शासन की ओर से कोई राहत नहीं मिली। बंदी के बाद भी स्कूलों के लिए कोई निर्देश फीस को लेकर शासन से जारी नहीं हुआ। इससे अभिभावकों को स्कूलों की कृपा पर जो छूट मिली, वही मिल सकी। इसी के कारण शैक्षिक सत्र में अभिभावकों ने प्रवेश कराने से हाथ खींच लिया।
यह भी एक कारण हो सकता है कि छात्रों ने आगे की कक्षा में प्रवेश नहीं लिया। अभिभावक परेशान रहे और कोई छूट नहीं पा सके। शासन ने रिपोर्ट जुटाई तो 18366 छात्रों का प्रवेश न होने की रिपोर्ट सामने आई। अब बेसिक शिक्षा मुहिम जारी हो गया।
सीडीओ शशांक त्रिपाठी ने बताया कि शिक्षा योजनाओं को प्रभावी ढंग से संचालित किए जाने पर जोर दिया जा रहा है। हर स्तर पर समीक्षा की जाएगी और प्रयास होगा कि सभी को शिक्षा मिले और योजनाओं का लाभ मिले।