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शहर में प्रदूषण फैला रहे 455 बिना फिटनेस के आटो टैक्सी
Updated Sun, 07 Oct 2018 11:17 PM IST
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शहर की हवा को जहरीला बना रहे अनफिट 455 आटो
गोंडा। जिले की सड़कों पर बिना फिटनेस के ही आटो और टैक्सियां फर्राटा भर रही हैं। परिवाहन विभाग के आंकड़ों पर ही गौर करें तो 455 आटो और टैक्सियां ही बिना फिटनेस के हैं इसके अलावा पूरे जिले में 1100 टैक्सी वाहन ऐसे हैं जिनका फिटनेस नही है।
बिना फिटनेस के ही वाहनों के सड़कों पर चलने से शहर में प्रदूषण भी बढ़ रहा है। वाहनों से निकलने वाला धुंआ लोगों के लिए जहर से कम नही है।
बड़ी संख्या में लोग दमा, अस्थमा और टीबी जैसे गंभीर रोगों के शिकार हो रहे हैं। विभाग का कहना है कि बिना फिटनेस के वाहनों के पकड़े जाने पर जुर्माना लगाने के साथ ही विधिक कार्रवाई की जाती है।
परिवाहन विभाग के आंकड़ों पर ही भरोसा करें तो टैम्पो 897, टैक्सी 1100 व आटो रिक्शा 854 शहर के सभी रुट पर दौड रहे। जिसमें 455 टैंपो व आटो रिक्शा ऐसे है जिनका न तो फिटनेस है और न ही प्रदूषण।
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वहीं 1100 टैक्सियों में आधे से अधिक का न फिटनेस है और प्रदूषण नही है। वहीं 2353 कार्मशियल गाडिय़ा है जिनका फिटनेस नही है फिर भी सड़क पर दौड रही है।
परिवहन विभाग करे चालान तो हो राजस्व फायदा
प्रदूषण की जांच से लेकर गाडिय़ों की फिटनेस का चालान अगर परिवहन विभाग काटे तो प्रदूषण के ऐवज में लाखों के राज्स्व का लगा रहा चूना। आखिर कब तक ऐसे ही सड़कों पर बिना जरुरी कागज के चलती रहेंगी गाडिय़ां। एक बार इन गाडिय़ों का चालान कर दिया जाए फिर दोबारा ऐसी गलती करने की सोंचेगें भी नही।
बिना प्रदूषण जांच के ही चल रही टैक्सियां
जिले भर में 1200 सौ टैक्सियां है। जिनमें आधे से अधिक गाड़ियों का न तो फिटनेस है न ही प्रदूषण जांच की रिपोर्ट। फिर भी बिना रोक टोक के सड़कों पर चल रही। फिर भी परिवहन विभाग चेतने को तैयार नही है।
हादसा होने के बाद जब खुद परिवहन विभाग फंसने लगता है तब वह गाड़ी के जितने कागज है उसको खंगालने का काम करती है। जिससे अपनी गर्दन पर लटकी तलवार दूसरे की गर्दन तक पहुंच जाए।
वाहनों की जांच की जा रही है बिना फिटनेस के वाहनों के विरुद्व कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों व कर्मचारियों की कमी से रुटीन में हर मार्ग पर चेकिंग नही हो पाता है। अभियान और तेज किया जाएगा।
- सर्वेश गौतम, सहायक संभागीय अधिकारी
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गोंडा। जिले की सड़कों पर बिना फिटनेस के ही आटो और टैक्सियां फर्राटा भर रही हैं। परिवाहन विभाग के आंकड़ों पर ही गौर करें तो 455 आटो और टैक्सियां ही बिना फिटनेस के हैं इसके अलावा पूरे जिले में 1100 टैक्सी वाहन ऐसे हैं जिनका फिटनेस नही है।
बिना फिटनेस के ही वाहनों के सड़कों पर चलने से शहर में प्रदूषण भी बढ़ रहा है। वाहनों से निकलने वाला धुंआ लोगों के लिए जहर से कम नही है।
बड़ी संख्या में लोग दमा, अस्थमा और टीबी जैसे गंभीर रोगों के शिकार हो रहे हैं। विभाग का कहना है कि बिना फिटनेस के वाहनों के पकड़े जाने पर जुर्माना लगाने के साथ ही विधिक कार्रवाई की जाती है।
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परिवाहन विभाग के आंकड़ों पर ही भरोसा करें तो टैम्पो 897, टैक्सी 1100 व आटो रिक्शा 854 शहर के सभी रुट पर दौड रहे। जिसमें 455 टैंपो व आटो रिक्शा ऐसे है जिनका न तो फिटनेस है और न ही प्रदूषण।
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वहीं 1100 टैक्सियों में आधे से अधिक का न फिटनेस है और प्रदूषण नही है। वहीं 2353 कार्मशियल गाडिय़ा है जिनका फिटनेस नही है फिर भी सड़क पर दौड रही है।
परिवहन विभाग करे चालान तो हो राजस्व फायदा
प्रदूषण की जांच से लेकर गाडिय़ों की फिटनेस का चालान अगर परिवहन विभाग काटे तो प्रदूषण के ऐवज में लाखों के राज्स्व का लगा रहा चूना। आखिर कब तक ऐसे ही सड़कों पर बिना जरुरी कागज के चलती रहेंगी गाडिय़ां। एक बार इन गाडिय़ों का चालान कर दिया जाए फिर दोबारा ऐसी गलती करने की सोंचेगें भी नही।
बिना प्रदूषण जांच के ही चल रही टैक्सियां
जिले भर में 1200 सौ टैक्सियां है। जिनमें आधे से अधिक गाड़ियों का न तो फिटनेस है न ही प्रदूषण जांच की रिपोर्ट। फिर भी बिना रोक टोक के सड़कों पर चल रही। फिर भी परिवहन विभाग चेतने को तैयार नही है।
हादसा होने के बाद जब खुद परिवहन विभाग फंसने लगता है तब वह गाड़ी के जितने कागज है उसको खंगालने का काम करती है। जिससे अपनी गर्दन पर लटकी तलवार दूसरे की गर्दन तक पहुंच जाए।
वाहनों की जांच की जा रही है बिना फिटनेस के वाहनों के विरुद्व कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों व कर्मचारियों की कमी से रुटीन में हर मार्ग पर चेकिंग नही हो पाता है। अभियान और तेज किया जाएगा।
- सर्वेश गौतम, सहायक संभागीय अधिकारी