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1400 कोटेदारों को देना होगा आय से अधिक सम्पति का ब्यौरा
Updated Sat, 18 Aug 2018 11:33 PM IST
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1400 कोटेदारों को देना होगा आय से अधिक संपत्ति का ब्यौरा
गोंडा। जिले के 1400 कोटेदारों को अपने आय से अधिक सम्पत्ति का ब्यौरा देना होगा। शासन ने जिले के सभी कोटेदारों व उनके परिजनों की सभी चल अचल संपत्तियों का ब्यौरा तलब किया है।
अब सप्लाई इंस्पेक्टर कोटेदार व उनके परिजनों के नाम सभी संपत्तियों का ब्यौरा खंगालेंगे। कोटेदारों व उनके परिजनों के नाम संपत्तियों का डाटा तैयार किया जाएगा। आय से अधिक संपत्ति बनाने वाले कई कोटेदारों पर अब जांच व कार्रवाई तलवार लटक गई है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत कार्डधारकों को वितरण किये जाने वाले अनाज की कालाबाजारी में बेचे जाने की लगातार पिछले कई साल से शिकायतें मिल रही थीं। अब शासन ने भी माना कि अनाज का वितरण करने वाले कोटेदारों ने बड़ा खेल कर ब्लैक मनी से तमाम संपत्तियां बना ली हैं।
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इस पर रोक लगाने के लिए शासन ने पहली बार कोटेदारों व उनके परिजनों ने कालाबाजारी से कमाये धन से कितना विकास किया इसकी जांच कराने का आदेश दिया है।
प्रदेश के खाद्य आयुक्त ने जिला पूर्ति अधिकारी से रिपोर्ट मांगी है। कई ऐसे भी कोटेदार हैं जिन्होंने फर्जी तरीके से अपने परिवार के लोगों का नाम राशन लेने की योजना में लाभार्थी बना रखा है।
शासन की ओर से इसकी जांच के लिए एक प्रारूप जारी किया है। जांच अधिकारियों की ओर से बिंदुवार सर्वे कर विवरण दर्ज करना होगा। डीएसओ सर्वे जांच की मानीटरिंग करेंगे।
इसमें आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने वालों से रिकबरी, जुर्माने व उचित दर विक्रेता का लाईसेंस रद्द करने की कार्रवाई किये जाने का प्राविधान है। सभी ब्लाकवार पूर्ति निरीक्षकों को सम्बधित कोटेदारों की जांच करने के लिए जिला पूर्ति अधिकारी ने नामित कर दिया है।
इनसेट
कोटेदार व उनके परिजनों के इन संपत्तियों का बनेगा डाटा
* बैंक खातों में जमा धन * बैंक लाकर में रखे गहने आदि * फिक्स जमा * मकान * प्लाट * संचित भूमि * एसी * जनरेटर * ट्रैक्टर * चौपहिया वाहन * असलहा आदि ।
अभी तक एक भी कोटेदार ने नही दिया ब्यौरा
गोंडा। जिले में अभी 1400 कोटेदारों में से एक भी कोटेदार की ओर से अपने आय से अधिक सम्पत्तियों का ब्योरा नही दिया है। न ही अभी किसी सप्लाई इंस्पेक्टर की ओर से कोटेदारों के आय से अधिक सम्पत्ति होने की जांच शुरू की गई है।
विभाग में अभी लाभाथयों के नाम काटने जोडने का ही खेल चल रहा है। आधार कार्ड की फीडिंग का भी काम पिछले तीन साल से चल रहा है जो पूरा नही हो सका है। जबकि शासन की ओर से कोटेदारों के आय से अधिक सम्पत्तियों का ब्यौरा जल्द उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।
अनाज के खेल में रंक से राजा बन गये कई कोटेदार
गोंडा। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत कार्डधारकों को बंटने वाले अनाज के खेल में कई कोटेदार रंक से राजा बन चुके हैं। सही मानीटरिंग न होने कोटेदार जिले के खाद्यान्न माफियाओं से मिलकर अनाज को कालाबाजारी में बेच देते हैं। दो व तीन रुपये में मिलने वाले राशन को खुलेबाजार में 15 से 20 रुपये प्रति किलो की दर से बेचकर मोटा कमा रहे हैं।
इसमें कई ऐसे कोटेदार हैं वह कोटे की दुकान चलाते चलाते राशन माफिया बन गये तो कुछ ऐसे हैं जो आज लाखों करोड़ों की सम्पत्ति बना चुके हैं। कोटेदारों के चयन के समय आवेदक के आय का ब्यौरा नही लिया जाता है। आवेदक के खाते में 50 हजार रुपये होना मात्र शर्त होता है।
इसमें कई तो ऐसे होते हैं जिनके खाते में इनके फाइनेंसर ही धन जमा कर देते हैं। जो बाद में अनाज की कालाबाजारी करवाते हैं। रंक से राजा बनने वाले कोटेदारों का रेण्डम सर्वे किया जाए तो ऐसे धनबली पांच सौ कोटेदार निकलेंगे।
इनसेट
खाद्य आयुक्त की ओर से सभी कोटेदारों के आय से अधिक सम्पत्तियों का ब्योरा तलब किया है। इसके लिए एक प्रोफार्मा पर सभी उचित दर विक्रेताओं के सम्पत्तियों की स्थिति को दर्ज किया जाना है। उचित दर विक्रेताओं के सर्वे के लिए सभी इंस्पेक्टरों को पत्र लिखकर सर्वे पूरी कर उसकी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। सर्वे प्रक्रिया पूरी होते ही शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। ’
- बहादुर सिंह,जिला पूर्ति अधिकारी
गोंडा। जिले के 1400 कोटेदारों को अपने आय से अधिक सम्पत्ति का ब्यौरा देना होगा। शासन ने जिले के सभी कोटेदारों व उनके परिजनों की सभी चल अचल संपत्तियों का ब्यौरा तलब किया है।
अब सप्लाई इंस्पेक्टर कोटेदार व उनके परिजनों के नाम सभी संपत्तियों का ब्यौरा खंगालेंगे। कोटेदारों व उनके परिजनों के नाम संपत्तियों का डाटा तैयार किया जाएगा। आय से अधिक संपत्ति बनाने वाले कई कोटेदारों पर अब जांच व कार्रवाई तलवार लटक गई है।
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सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत कार्डधारकों को वितरण किये जाने वाले अनाज की कालाबाजारी में बेचे जाने की लगातार पिछले कई साल से शिकायतें मिल रही थीं। अब शासन ने भी माना कि अनाज का वितरण करने वाले कोटेदारों ने बड़ा खेल कर ब्लैक मनी से तमाम संपत्तियां बना ली हैं।
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इस पर रोक लगाने के लिए शासन ने पहली बार कोटेदारों व उनके परिजनों ने कालाबाजारी से कमाये धन से कितना विकास किया इसकी जांच कराने का आदेश दिया है।
प्रदेश के खाद्य आयुक्त ने जिला पूर्ति अधिकारी से रिपोर्ट मांगी है। कई ऐसे भी कोटेदार हैं जिन्होंने फर्जी तरीके से अपने परिवार के लोगों का नाम राशन लेने की योजना में लाभार्थी बना रखा है।
शासन की ओर से इसकी जांच के लिए एक प्रारूप जारी किया है। जांच अधिकारियों की ओर से बिंदुवार सर्वे कर विवरण दर्ज करना होगा। डीएसओ सर्वे जांच की मानीटरिंग करेंगे।
इसमें आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने वालों से रिकबरी, जुर्माने व उचित दर विक्रेता का लाईसेंस रद्द करने की कार्रवाई किये जाने का प्राविधान है। सभी ब्लाकवार पूर्ति निरीक्षकों को सम्बधित कोटेदारों की जांच करने के लिए जिला पूर्ति अधिकारी ने नामित कर दिया है।
इनसेट
कोटेदार व उनके परिजनों के इन संपत्तियों का बनेगा डाटा
* बैंक खातों में जमा धन * बैंक लाकर में रखे गहने आदि * फिक्स जमा * मकान * प्लाट * संचित भूमि * एसी * जनरेटर * ट्रैक्टर * चौपहिया वाहन * असलहा आदि ।
अभी तक एक भी कोटेदार ने नही दिया ब्यौरा
गोंडा। जिले में अभी 1400 कोटेदारों में से एक भी कोटेदार की ओर से अपने आय से अधिक सम्पत्तियों का ब्योरा नही दिया है। न ही अभी किसी सप्लाई इंस्पेक्टर की ओर से कोटेदारों के आय से अधिक सम्पत्ति होने की जांच शुरू की गई है।
विभाग में अभी लाभाथयों के नाम काटने जोडने का ही खेल चल रहा है। आधार कार्ड की फीडिंग का भी काम पिछले तीन साल से चल रहा है जो पूरा नही हो सका है। जबकि शासन की ओर से कोटेदारों के आय से अधिक सम्पत्तियों का ब्यौरा जल्द उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।
अनाज के खेल में रंक से राजा बन गये कई कोटेदार
गोंडा। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत कार्डधारकों को बंटने वाले अनाज के खेल में कई कोटेदार रंक से राजा बन चुके हैं। सही मानीटरिंग न होने कोटेदार जिले के खाद्यान्न माफियाओं से मिलकर अनाज को कालाबाजारी में बेच देते हैं। दो व तीन रुपये में मिलने वाले राशन को खुलेबाजार में 15 से 20 रुपये प्रति किलो की दर से बेचकर मोटा कमा रहे हैं।
इसमें कई ऐसे कोटेदार हैं वह कोटे की दुकान चलाते चलाते राशन माफिया बन गये तो कुछ ऐसे हैं जो आज लाखों करोड़ों की सम्पत्ति बना चुके हैं। कोटेदारों के चयन के समय आवेदक के आय का ब्यौरा नही लिया जाता है। आवेदक के खाते में 50 हजार रुपये होना मात्र शर्त होता है।
इसमें कई तो ऐसे होते हैं जिनके खाते में इनके फाइनेंसर ही धन जमा कर देते हैं। जो बाद में अनाज की कालाबाजारी करवाते हैं। रंक से राजा बनने वाले कोटेदारों का रेण्डम सर्वे किया जाए तो ऐसे धनबली पांच सौ कोटेदार निकलेंगे।
इनसेट
खाद्य आयुक्त की ओर से सभी कोटेदारों के आय से अधिक सम्पत्तियों का ब्योरा तलब किया है। इसके लिए एक प्रोफार्मा पर सभी उचित दर विक्रेताओं के सम्पत्तियों की स्थिति को दर्ज किया जाना है। उचित दर विक्रेताओं के सर्वे के लिए सभी इंस्पेक्टरों को पत्र लिखकर सर्वे पूरी कर उसकी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। सर्वे प्रक्रिया पूरी होते ही शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। ’
- बहादुर सिंह,जिला पूर्ति अधिकारी