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अब प्रदेश नहीं भारत सरकार तय करेगी गोंडा सीवर लाइन का भविष्य
Updated Thu, 15 Jun 2017 12:04 AM IST
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तीन अरब से बिछेगी शहर में सीवर लाइन
अब नीति आयोग को अंतिम फैसला करना है सीवर लाइन प्रोजेक्ट पर
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ड्रीम प्रोजेक्ट बताकर भेजी थी फाइल
राजेश तिवारी
गोंडा। देश भर से आई स्वच्छता अभियान की सर्वे रिपोर्ट में हमारा गोंडा जिला सबसे गंदा है। यह बात पूरा देश जान चुका है। लेकिन अब इस दाग के धुलने की उम्मीद जगी है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा गोंडा में सीवर लाइन के लिए 325 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाकर नीति आयोग के पास भेजी गई थी। सूत्रों के मुताबिक इस प्रोजेक्ट पर अगले कुछ दिनों नीति आयोग फैसला कर सकता है। बावजूद इसके इस प्रोजेक्ट को लेकर न तो अधिकारी संजीदा हैं, न ही हमारे जिले के जनप्रतिनिधि। यही वजह है कि सीवर लाइन प्रोजेक्ट की फाइल की न तो कोई पैरवी हो रही है न ही इसे भारत सरकार के नीति आयोग से पास करवाए जाने की कोई पहल। एक महीने से ऊपर बीतने को हैं और इसकी फाइल भारत सरकार के नीति आयोग में पड़ी है। लेकिन अभी तक न तो भारत सरकार से इस परियोजना के लिए नियुक्ति किए गए कंसल्टेंट ही यहां झांकने आए हैं न ही नीति विभाग के लोग। ऐसे में गोंडा शहर सीवर लाइन से कभी जुड़ पाएगा या नहीं, इसे लेकर सिर्फ अटकलें ही लगाई जा रही हैं, क्योंकि भारत सरकार के नीति आयोग से जिन 10 बड़ी परियोजनाओं को हरी झंडी दी जानी है, उसमें गोंडा की सीवर लाइन भी है। जिसके भविष्य का फैसला अब सीधे भारत सरकार के नीति आयोग को करना है।
इनसेट
332 करोड़ रुपए की है पूरी परियोजना
गोंडा में सीवर लाइन डाले जाने की जो परियोजना भारत सरकार के नीति आयोग में लंबित है, उसकी कुल लागत 332 करोड़ रुपये है। जिसमें 25 एमएलडी (मिलियन लीटर पर डे) क्षमता का एक ट्रीटमेंट प्लांट, 232.697 किलोमीटर की सीवरेज लाइन, एक अदद इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन (आईपीएस), 1 अदद एमपीएस, 325 मीटर की राइजिंग मेंस, 3 स्टाफ क्वार्टर, 270.50 मीटर की बाउंड्रीवाल, 60 मीटर की एप्रोच रोड, पंपिंग प्लांट, पावर कनेक्शन और जनरेटर इत्यादि शामिल है। जबकि इसमें जमीन की कीमत तकरीबन 5 करोड़ और पांच साल तक इसकी रिपेयरिंग की कीमत सवा पांच करोड़ रुपये शामिल नहीं है।
इनसेट
दिल्ली की ईवाईएलएलपी कंपनी को नियुक्ति किया कंसल्टेंट
नीति आयोग में लंबित गोंडा सीवर लाइन का पूरा प्रोजेक्ट निदेशक/स्टेट कोआर्डिनेटर दीपिका लोहिया एरन व ज्वाइंट सेक्रेट्री/स्टेट कोआर्डिनेटर (डिवीजन व डीपी सेक्सन) विक्रम सिंह गौर देख रहे हैं। जबकि इसे लेकर नीति आयोग से जिस कंपनी को कंसल्टेंट नियुक्त किया गया है, उसका नाम है ईवाईएलएलपी। जिसमें अल्पना जैन, गुंजन जैन, अखिल सहगल और नृपेश कुमार को इसकी पैरवी करनी है।
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इनसेट
मुख्यमंत्री ने खुले मंच से कर दी थी घोषणा
तीन साल पहले सपा सरकार में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जिस समय गोंडा शहर में पड़ने वाली सीवर लाइन की घोषणा एक खुले मंच पर की थी। उस समय शायद उन्हें नहीं पता था कि जिस सीवर लाइन की घोषणा वह अपने ड्रीम प्रोजेक्ट के तौर पर कर रहे हैं, उसके लिए उनकी सरकार के पास पैसा ही नहीं है। जिसके बाद इस प्रोजेक्ट की फाइल डेवलॅपमेंट सपोर्ट की ओर से अवस्थापना निर्माण से सम्बंधित परियोजनाओं (डी3एस)के तहत भारत सरकार को भेज दी गई।
इनसेट
नीति आयोग से 10 परियोजनाओं को ही मिलनी है मंजूरी
भारत सरकार के नीति आयोग में लंबित दर्जनों ऐसी परियोजनाओं, जिनकी लागत 50 करोड़ रुपए से ऊपर है, में से केवल 10 ही परियोजनाओं को मंजूरी दी जानी है। जिसमें एक गोंडा की सीवर लाइन भी शामिल है। जबकि इसके अलावा देश भर से (डी3एस) में भेजी गई परिवहन, ऊर्जा, जल-स्वच्छता, संचार व सामाजिक/वाणिज्यिक अवसंरचना के भी तमाम प्रोजेक्ट हैं।
इनसेट
ट्रिपल पी पर होगा काम, साइन होगा एमओयू
नीति आयोग से अगर गोंडा में पड़ने वाली सीवर लाइन परियोजना का प्रस्ताव पास हो जाता है, तो इसका काम प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप पर होगा। वहीं काम के चयनित होने के उपरान्त नीति आयोग तथा राज्य के मध्य इसका समझौता ज्ञापन (एमओयू) साइन किया जाएगा।
इनसेट
इसलिए जरूरी है गोंडा में सीवर लाइन
-पूरे देश में गोंडा का सबसे गंदा होना
-नाले और नालियों की जलनिकासी व्यवस्था बेहद खराब होना
-800 से ऊपर के परिवारों के पास शौंचालय न होना
-1400 परिवारों के शौचालय की गंदगी का नाले में बहाया जाना
-शहर की लगभग हर सडक़ और मोहल्ले में होने वाला जलभराव
इनसेट
गोंडा मे पडने वाली सीवर लाइन का पूरा प्रोजेक्ट भारत सरकार के नीति आयोग में विचाराधीन है। नीति आयोग से इसके लिए ईवाईएलएलपी कंपनी के कुछ लोगों को कंसल्टेंट भी नियुक्त किया गया है। जिनसे सम्पर्क कर इसकी वस्तुस्थिति जानने का प्रयास वह कर रहे हैं। लेकिन अभी तक इस सम्बंध में कंपनी का कोई व्यक्ति यहां नहीं आया है। उनसे जितना हो सकता है, वह इसकी पैरवी में लगे हैं।
मुकीम अहमद, अधिशाषी अभियंता, जलनिगम
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अब नीति आयोग को अंतिम फैसला करना है सीवर लाइन प्रोजेक्ट पर
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ड्रीम प्रोजेक्ट बताकर भेजी थी फाइल
राजेश तिवारी
गोंडा। देश भर से आई स्वच्छता अभियान की सर्वे रिपोर्ट में हमारा गोंडा जिला सबसे गंदा है। यह बात पूरा देश जान चुका है। लेकिन अब इस दाग के धुलने की उम्मीद जगी है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा गोंडा में सीवर लाइन के लिए 325 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाकर नीति आयोग के पास भेजी गई थी। सूत्रों के मुताबिक इस प्रोजेक्ट पर अगले कुछ दिनों नीति आयोग फैसला कर सकता है। बावजूद इसके इस प्रोजेक्ट को लेकर न तो अधिकारी संजीदा हैं, न ही हमारे जिले के जनप्रतिनिधि। यही वजह है कि सीवर लाइन प्रोजेक्ट की फाइल की न तो कोई पैरवी हो रही है न ही इसे भारत सरकार के नीति आयोग से पास करवाए जाने की कोई पहल। एक महीने से ऊपर बीतने को हैं और इसकी फाइल भारत सरकार के नीति आयोग में पड़ी है। लेकिन अभी तक न तो भारत सरकार से इस परियोजना के लिए नियुक्ति किए गए कंसल्टेंट ही यहां झांकने आए हैं न ही नीति विभाग के लोग। ऐसे में गोंडा शहर सीवर लाइन से कभी जुड़ पाएगा या नहीं, इसे लेकर सिर्फ अटकलें ही लगाई जा रही हैं, क्योंकि भारत सरकार के नीति आयोग से जिन 10 बड़ी परियोजनाओं को हरी झंडी दी जानी है, उसमें गोंडा की सीवर लाइन भी है। जिसके भविष्य का फैसला अब सीधे भारत सरकार के नीति आयोग को करना है।
इनसेट
332 करोड़ रुपए की है पूरी परियोजना
गोंडा में सीवर लाइन डाले जाने की जो परियोजना भारत सरकार के नीति आयोग में लंबित है, उसकी कुल लागत 332 करोड़ रुपये है। जिसमें 25 एमएलडी (मिलियन लीटर पर डे) क्षमता का एक ट्रीटमेंट प्लांट, 232.697 किलोमीटर की सीवरेज लाइन, एक अदद इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन (आईपीएस), 1 अदद एमपीएस, 325 मीटर की राइजिंग मेंस, 3 स्टाफ क्वार्टर, 270.50 मीटर की बाउंड्रीवाल, 60 मीटर की एप्रोच रोड, पंपिंग प्लांट, पावर कनेक्शन और जनरेटर इत्यादि शामिल है। जबकि इसमें जमीन की कीमत तकरीबन 5 करोड़ और पांच साल तक इसकी रिपेयरिंग की कीमत सवा पांच करोड़ रुपये शामिल नहीं है।
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दिल्ली की ईवाईएलएलपी कंपनी को नियुक्ति किया कंसल्टेंट
नीति आयोग में लंबित गोंडा सीवर लाइन का पूरा प्रोजेक्ट निदेशक/स्टेट कोआर्डिनेटर दीपिका लोहिया एरन व ज्वाइंट सेक्रेट्री/स्टेट कोआर्डिनेटर (डिवीजन व डीपी सेक्सन) विक्रम सिंह गौर देख रहे हैं। जबकि इसे लेकर नीति आयोग से जिस कंपनी को कंसल्टेंट नियुक्त किया गया है, उसका नाम है ईवाईएलएलपी। जिसमें अल्पना जैन, गुंजन जैन, अखिल सहगल और नृपेश कुमार को इसकी पैरवी करनी है।
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मुख्यमंत्री ने खुले मंच से कर दी थी घोषणा
तीन साल पहले सपा सरकार में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जिस समय गोंडा शहर में पड़ने वाली सीवर लाइन की घोषणा एक खुले मंच पर की थी। उस समय शायद उन्हें नहीं पता था कि जिस सीवर लाइन की घोषणा वह अपने ड्रीम प्रोजेक्ट के तौर पर कर रहे हैं, उसके लिए उनकी सरकार के पास पैसा ही नहीं है। जिसके बाद इस प्रोजेक्ट की फाइल डेवलॅपमेंट सपोर्ट की ओर से अवस्थापना निर्माण से सम्बंधित परियोजनाओं (डी3एस)के तहत भारत सरकार को भेज दी गई।
इनसेट
नीति आयोग से 10 परियोजनाओं को ही मिलनी है मंजूरी
भारत सरकार के नीति आयोग में लंबित दर्जनों ऐसी परियोजनाओं, जिनकी लागत 50 करोड़ रुपए से ऊपर है, में से केवल 10 ही परियोजनाओं को मंजूरी दी जानी है। जिसमें एक गोंडा की सीवर लाइन भी शामिल है। जबकि इसके अलावा देश भर से (डी3एस) में भेजी गई परिवहन, ऊर्जा, जल-स्वच्छता, संचार व सामाजिक/वाणिज्यिक अवसंरचना के भी तमाम प्रोजेक्ट हैं।
इनसेट
ट्रिपल पी पर होगा काम, साइन होगा एमओयू
नीति आयोग से अगर गोंडा में पड़ने वाली सीवर लाइन परियोजना का प्रस्ताव पास हो जाता है, तो इसका काम प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप पर होगा। वहीं काम के चयनित होने के उपरान्त नीति आयोग तथा राज्य के मध्य इसका समझौता ज्ञापन (एमओयू) साइन किया जाएगा।
इनसेट
इसलिए जरूरी है गोंडा में सीवर लाइन
-पूरे देश में गोंडा का सबसे गंदा होना
-नाले और नालियों की जलनिकासी व्यवस्था बेहद खराब होना
-800 से ऊपर के परिवारों के पास शौंचालय न होना
-1400 परिवारों के शौचालय की गंदगी का नाले में बहाया जाना
-शहर की लगभग हर सडक़ और मोहल्ले में होने वाला जलभराव
इनसेट
गोंडा मे पडने वाली सीवर लाइन का पूरा प्रोजेक्ट भारत सरकार के नीति आयोग में विचाराधीन है। नीति आयोग से इसके लिए ईवाईएलएलपी कंपनी के कुछ लोगों को कंसल्टेंट भी नियुक्त किया गया है। जिनसे सम्पर्क कर इसकी वस्तुस्थिति जानने का प्रयास वह कर रहे हैं। लेकिन अभी तक इस सम्बंध में कंपनी का कोई व्यक्ति यहां नहीं आया है। उनसे जितना हो सकता है, वह इसकी पैरवी में लगे हैं।
मुकीम अहमद, अधिशाषी अभियंता, जलनिगम