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भिखारीपुर-सकरौर बांध भी घाघरा में समाया, 80 गांवों में हाहाकार
Updated Fri, 10 Aug 2018 10:49 PM IST
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भिखारीपुर-सकरौर बांध भी घाघरा में समाया, 80 गांवों में हाहाकार
गोंडा। करनैलगंज क्षेत्र में रिंग बांध के काटने के बाद घाघरा के उफान ने ऐसा कहर बरपाया कि करनैलगंज के साथ परसपुर, नवाबगंज, तरबगंज के अधिकांश भाग को अपने चपेट में ले लिया है।
शुक्रवार को तरबगंज तहसील क्षेत्र के सोनौली मोहम्मदपुर व ऐलीपरसौली के मध्य बच्ची माझा के पास भिखारीपुर सकरौर बांध धराशायी हो गया। चौधरी पुरवा के पास कट रहे बांध को देखकर लोग भयभीत हो गए और बांध बचाने की कवायद शुरू थी कि कट रहे बांध के 50 मीटर पश्चिम की तरफ स्पर नंबर पांच को भी घाघरा ने अपनी चपेट में ले लिया।
दो स्थानों पर कटान जारी थी। करीब दो फिट बांध का हिस्सा बचा था जो रात तक कट जाएगा। चौधरीपुरवा के पास कटे बांध ने सोनौली मोहम्मदपुर, ऐली परसौली, गढ़ी सहित अन्य ग्राम पंचायतों के 80 गांवों को अपने चपेट में ले लिया।
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इस बांध के कटने से करीब 200 गांव बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। अब सिर्फ परसपुर धौरहरा बांध बचा है, अगर वो भी कट गया तो स्थित नियंत्रण के बाहर हो सकती है।
शुक्रवार की सुबह घाघरा नदी के प्रचंड वेग को भिखारीपुर-सकरौरा तटबंध नहीं थाम सका और धीरे-धीरे कर बांध का लगभग दो तिहाई से अधिक हिस्सा घाघरा में समा गया। बांध कटता देख आसपास के गांव के लोग व सरकारी अमला मौके पर जुट गया और बोल्डर, पेड़ों की टहनियां तथा बोरियां भर कर डालने लगे लेकिन बांध को नहीं बचा सके।
लगातार उठ रहे मशीना ने सब कुछ अपने में समाहित कर लिया और देर शाम को बांध कट गया। खबर जंगल में आग की तरह फैल गई आला अधिकारी से लेकर हर कोई बांध की तरफ भागा।
बाढ़ की विभीषिका को लेकर लोग चिंतित दिखे। लोग विभागीय अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगा रहे थे। ग्रामीणों को बेघर होने का डर सताने लगा है। इससे तहसील तरबगंज के लगभग डेढ़ सौ से अधिक मजरे तथा कर्नलगंज के कई मजरे बाढ़ की चपेट में आ जाएंगे।
नगर के कालीकुंड तक पहुंचा बाढ़ का पानी
नवाबगंज क्षेत्र में घाघरा-सरयू के बाढ़ का कहर करीब 125 गांवों तक फैला है। जैतपुर माझा के दो मजरों के लोगों के गांव पूरी तरह धारा की कटान में हैं।
यहां के लोगों को प्रशासन ने पहले ही बाहर निकाल लिया है। बाढ़ का कहर नवाबगंज के कस्बे के कालीकुंड तक पहुंच गया है।
गांवों को खाली कराने को एसडीएम ने की अपील
भिखारीपुर सकरौर बांध के दो स्थानों पर कटान होते देख प्रशासन भी सकते में आ गया। एसडीएम करनैलगंज सौरभ भट्ट ने माइक संभाला और गांवों में एनाउंस करना शुरू कर दिया कि वे लोग तत्काल अपना जरूरी सामान लेकर सुरक्षित स्थान पर चले जाएं। बांध कटने वाला है। उन्होंने तहसील के राजस्व कर्मियों को लगाकर गांवों को खाली कराने की जिम्मेदारी सौंप दी।
धान और मक्के की फसल चौपट
करनैलगंज। घाघरा नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है। फिर भी बाढ़ से प्रभावित होने वाले गांव के लोगों की दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। लोगों के घरों में पानी अभी भी घुसा हुआ है, जिससे रहने खाने सोने सहित अन्य समस्याएं पीड़ितों के सामने अभी भी खड़ी है।
बाढ़ का पानी भले ही नदी में घट रहा हो मगर नदी के पानी के बहाव से आने वाला पानी लगातार क्षेत्र में आकर फैला है। जिससे बाढ़ से प्रभावित होने वाले गांवों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है।
करीब 68 गांव बाढ़ के पानी में की चपेट में आ चुके हैं। बराबर पानी भरा रहने की वजह से लोगों के पैर सड़ चुके हैं। कुछ लोग बुखार से भी पीड़ित हो रहे हैं। भूसा बाढ़ के पानी का भेंट चढ़ चुका है। धान व मकई की फसल नष्ट हो चुकी है। गन्ना के खतों में पानी भरा है।
गोंडा। करनैलगंज क्षेत्र में रिंग बांध के काटने के बाद घाघरा के उफान ने ऐसा कहर बरपाया कि करनैलगंज के साथ परसपुर, नवाबगंज, तरबगंज के अधिकांश भाग को अपने चपेट में ले लिया है।
शुक्रवार को तरबगंज तहसील क्षेत्र के सोनौली मोहम्मदपुर व ऐलीपरसौली के मध्य बच्ची माझा के पास भिखारीपुर सकरौर बांध धराशायी हो गया। चौधरी पुरवा के पास कट रहे बांध को देखकर लोग भयभीत हो गए और बांध बचाने की कवायद शुरू थी कि कट रहे बांध के 50 मीटर पश्चिम की तरफ स्पर नंबर पांच को भी घाघरा ने अपनी चपेट में ले लिया।
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दो स्थानों पर कटान जारी थी। करीब दो फिट बांध का हिस्सा बचा था जो रात तक कट जाएगा। चौधरीपुरवा के पास कटे बांध ने सोनौली मोहम्मदपुर, ऐली परसौली, गढ़ी सहित अन्य ग्राम पंचायतों के 80 गांवों को अपने चपेट में ले लिया।
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इस बांध के कटने से करीब 200 गांव बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। अब सिर्फ परसपुर धौरहरा बांध बचा है, अगर वो भी कट गया तो स्थित नियंत्रण के बाहर हो सकती है।
शुक्रवार की सुबह घाघरा नदी के प्रचंड वेग को भिखारीपुर-सकरौरा तटबंध नहीं थाम सका और धीरे-धीरे कर बांध का लगभग दो तिहाई से अधिक हिस्सा घाघरा में समा गया। बांध कटता देख आसपास के गांव के लोग व सरकारी अमला मौके पर जुट गया और बोल्डर, पेड़ों की टहनियां तथा बोरियां भर कर डालने लगे लेकिन बांध को नहीं बचा सके।
लगातार उठ रहे मशीना ने सब कुछ अपने में समाहित कर लिया और देर शाम को बांध कट गया। खबर जंगल में आग की तरह फैल गई आला अधिकारी से लेकर हर कोई बांध की तरफ भागा।
बाढ़ की विभीषिका को लेकर लोग चिंतित दिखे। लोग विभागीय अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगा रहे थे। ग्रामीणों को बेघर होने का डर सताने लगा है। इससे तहसील तरबगंज के लगभग डेढ़ सौ से अधिक मजरे तथा कर्नलगंज के कई मजरे बाढ़ की चपेट में आ जाएंगे।
नगर के कालीकुंड तक पहुंचा बाढ़ का पानी
नवाबगंज क्षेत्र में घाघरा-सरयू के बाढ़ का कहर करीब 125 गांवों तक फैला है। जैतपुर माझा के दो मजरों के लोगों के गांव पूरी तरह धारा की कटान में हैं।
यहां के लोगों को प्रशासन ने पहले ही बाहर निकाल लिया है। बाढ़ का कहर नवाबगंज के कस्बे के कालीकुंड तक पहुंच गया है।
गांवों को खाली कराने को एसडीएम ने की अपील
भिखारीपुर सकरौर बांध के दो स्थानों पर कटान होते देख प्रशासन भी सकते में आ गया। एसडीएम करनैलगंज सौरभ भट्ट ने माइक संभाला और गांवों में एनाउंस करना शुरू कर दिया कि वे लोग तत्काल अपना जरूरी सामान लेकर सुरक्षित स्थान पर चले जाएं। बांध कटने वाला है। उन्होंने तहसील के राजस्व कर्मियों को लगाकर गांवों को खाली कराने की जिम्मेदारी सौंप दी।
धान और मक्के की फसल चौपट
करनैलगंज। घाघरा नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है। फिर भी बाढ़ से प्रभावित होने वाले गांव के लोगों की दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। लोगों के घरों में पानी अभी भी घुसा हुआ है, जिससे रहने खाने सोने सहित अन्य समस्याएं पीड़ितों के सामने अभी भी खड़ी है।
बाढ़ का पानी भले ही नदी में घट रहा हो मगर नदी के पानी के बहाव से आने वाला पानी लगातार क्षेत्र में आकर फैला है। जिससे बाढ़ से प्रभावित होने वाले गांवों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है।
करीब 68 गांव बाढ़ के पानी में की चपेट में आ चुके हैं। बराबर पानी भरा रहने की वजह से लोगों के पैर सड़ चुके हैं। कुछ लोग बुखार से भी पीड़ित हो रहे हैं। भूसा बाढ़ के पानी का भेंट चढ़ चुका है। धान व मकई की फसल नष्ट हो चुकी है। गन्ना के खतों में पानी भरा है।