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सड़क कटने से 50 गांवों के 300 मजरों का मुख्यालय से संपर्क टूटा

Sat, 19 Aug 2017 10:15 PM IST
Updated Sat, 19 Aug 2017 10:15 PM IST
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सड़क कटने से 50 गांवों के 300 मजरों का मुख्यालय से संपर्क टूटा

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सड़क कटने से 300 गांवों का मुख्यालय से संपर्क टूटा
शुक्रवार को नदी में समाया 20 मीटर एल्गिन चरसड़ी बांध
प्रभावित मजरों की संख्या बढ़कर 802 पर पहुंची
एल्गिन चरसड़ी बांध के 400 मीटर हिस्से पर कटान का खतरा बढ़ा

अमर उजाला ब्यूरो
करनैलगंज । करनैलगंज के धनावा को जाने वाली मुख्य सड़क शुक्रवार रात में पानी का दबाव न झेल पाने के कारण कट गई। इस सड़क के कटने से करनैलगंज के करीब 300 से अधिक गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है। घाघरा का पानी तेज बहाव के साथ गांवों में फैल रहा हेै जिससे बाढ़ से प्रभावित गांवों की संख्या शनिवार को बढ़कर 806 तक पहुंच गई। पानी के दबाव से एल्गिन चरसड़ी बांध 20 मीटर हिस्सा कटकर घाघरा में समा गया। अभी भी बांध का चार सौ मीटर हिस्सा कटान के दायरे में है।

घाघरा नदी के पानी से होने वाली तबाही शनिवार को शभी जारी रही। शुक्रवार की देर रात घाघरा नदी की कटान व पानी के तेज बहाव के कारण करनैलगंज से धनावा जाने वाली मुख्य सड़क कटान की जद में आ गई और देर रात यह सड़क पानी का दबाव न झेल पाने के चलते कट गई। इस सड़क के कटने से करनैलगंज क्षेत्र के करीब 300 गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है। धनावा जाने वाली यह सड़क करनैलगंज से परसपुर वाया शाहपुर को भी आपास में जोड़ती थी। इस सड़क के कटने से करनैलगंज से परसपुर जाने का रास्ता भी बंद हो गया है। करनैलगंज में अब तक बाढ़ की चपेट में आने से 46 गांवों के मुख्यमार्ग कट चुके हैं। इसके अलावा करीब 22 छोटी पुलिया भी पानी में समा चुकी हैं। शनिवार को घाघरा ने बांध को काटने का सिलसिला तेज कर दिया है। नकहरा, बेहटा व पारा गांव के सामने एल्गिन-चरसडी बांध में तेज कटान शुरु हो गई है। शनिवार को नदी की कटान तेज होने से एल्गिन चरसड़ी बांध का करीब 20 मीटर से अधिक हिस्सा नदी में समा गया। इसके अलावा करीब चार सौ मीटर की लम्बाई में बांध के हिस्से में नद की कटान तेज हो गई है। तेजी के साथ फैल रहे घाघरा के पानी से बाढ़ प्रभावित गावों की संख्या लगातार बढ़ रही है। शनिवार को बाढ़ प्रभावित मजरों की संख्या बढ़कर 806 पर पहुंच गई। शनिवार को घाघरा का पानी खतरे के निशान से करीब एक मीटर ऊपर स्थिर रहा और बाढ़ प्रभावित इलाकों का जलस्तर घटता नजर आया। इस घटते जलस्तर ने लोगो को राहत जरुर दी है लेकिन इससे बाढ़ से प्रभावित लोगों की दुश्वारियां बढने के आसार बढ़ गए हैें।
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छत से गिरकर बालक घायल
करनैलगंज। बाढ़ प्रभावित घरकुंइया गांव में शनिवार को एक सात साल का मासूम छत से गिरकर गंभीर रुप से घायल हो गया। ग्राम घरकुंइया निवासी रामपालच का घर बाढ़ के पानी से पूरी तरह घिरा हुआ है। पूरा परिवार छत पर रहकर जीवन यापन कर रहा है। छत पर छाजन की भी कोई व्यवस्था नहीं है। शनिवार को अचानक बरसात होने लगी तो उसका सात साल का बेटा नीरज बरसात से बचने के लिए पन्नी उठाने के लिए दौडा। इसी बीच उसका पैर फिसल गया और वह छत से नीचे पानी में जा गिरा। छत से गिरने से उसके सिर में गंभीर चोट तो आई है। उसे सीएचसी करनैलगंज लाया गया जहां डाक्टरों ने उसकी हालत गम्भीर देख उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर किया।
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सपा ने लगाया 65 करोड़ के घपले का आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर बाढ़ क्षेत्र का जायजा लेने गई सपा नेताओं की टीम ने अपनी रिपोर्ट अखिलेश यादव को भेज दी है। इस रिपोर्ट में टीम अखिलेश ने जिला प्रशासन पर सरकारी धन के बंदरबांट का आरोप लगाया है। पूर्व मंत्री योगेश प्रताप सिंह के मुताबिक सपा सरकार ने बांध के निर्माण व मरम्मत के लिए 65 करोड़ रुपये जारी किए थे लेकिन यह पूरी रकम भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पूर्व मंत्री विनोद कुमार सिंह, योगेश प्रताप सिंह, पूर्व विधायक बैजनाथ दूवे व विधान परिषद सदस्य रणविजय सिंह समेत चार सदस्यीय टीम को बाढ़ क्षेत्र में दौरा कर पूरी रिपोर्ट मंागी गई थी। टीम अखिलेश ने आरोप लगाया कि बाढ़ से करीब आठ सौ मजरे प्रभावित है लेकिन उन्हे राहत सामग्री उपब्ध करा पाने में सरकार पूरी तरह से विफल है।
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फरिस्ता बनी एनडीआरएफ व पीएसी
करनैलगंज। एनडीआरएफ व पीएसी के जवान बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए फ रिस्ता साबित हो रहे हैं। टीम अपने काम से भी अलग बाढ़ पीड़ितों की मदद करने में पीछे नहीं है। बाढ़ के पानी से घिरे गावों में फ ंसे लोगों को निकालने स्व उनके लिए भोजन का पैकेट पहुंचाने के साथ ही उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए मददगार साबित हो रहे हैं। शनिवार को एनडीआरएफ व पीएसी की टीम ने ग्राम काशीपुर व अतरसुइया में फ ंसे करीब 70 लोगों को गावों से सुरक्षित निकालकर उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया।

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पीड़ित महिला ने बयां किया दर्द
करनैलगंज। पिछले एक सप्ताह से चचरी की सड़कों पर डेरा जमाये ग्रामीणों का दर्द अलग ही है। बाढ़ राहत एंव भोजन के सवाल पर ग्राम मुलायम पुुरवा निवासी युवती मंजू की आंखों से आंसू आ गये। मंजू ने बताया कि तीन दिनों से महज पानी पी कर पेट की भूख मिटानी पड़ रही है। राहत तो दूर यहां कोई अधिकारी हाल पूंछने तक नहीं आया। ग्रामीण संतराम, गया प्रसाद, राम मनोहर, श्रीचन्द का कहना था कि प्रशासन की व्यवस् था बाढ़ के नाम पर पूरी तरह फेल है। बाढ़ पीडित भूखों मर रहे हैं। तीन तीन दिनों तक उन्हें लंच पैकेट नसीब नहीं होता है। गावों में भी उनके साथ दोहरा रवैया अपनाया जाता है। जनप्रतिनिधि अपने खास लोगों को ही सुविधायें उपलब्ध करा रहे हैं।
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