{"_id":"5b8ad15d42c79246400abb9e","slug":"131535824221-gonda-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"साढ़े बारह करोड़ के यूनीफार्म बजट में गोलमाल, जांच में खुलासा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
साढ़े बारह करोड़ के यूनीफार्म बजट में गोलमाल, जांच में खुलासा
Updated Sat, 01 Sep 2018 11:33 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
यूनिफार्म के 12.5 करोड़ के बजट में गोलमाल
गोंडा। बेसिक शिक्षा विभाग ने परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को यूनिफार्म वितरण के लिए साढ़े बारह करोड़ रुपये का बजट जारी किया था। जिसमें यूनिफार्म वितरण में विद्यालयों के प्रबंधन ने गोलमाल किया।
इसका खुलासा विभाग की ओर से जांच में हुआ है। यूनिफार्म वितरण के बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने 20 स्कूलों की जांच टीम बनाकर की।
जांच खुलासा हुआ कि सिर्फ एक तिहाई बच्चों को ड्रेस देकर बाकी पैसा निकाल लिया गया। अब विभाग सभी 3130 परिषदीय स्कूलों की जांच के निर्देश दिए हैं।
16 खंड शिक्षा अधिकारियों से यूनिफार्म वितरण की जांच रिपोर्ट मांगी गई है।
प्राइमरी व जूनियर हाईस्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को दो जोड़ी यूनिफार्म देने के लिए सरकार प्रति छात्र दो सौ रुपये का बजट देती है।
इस बार भी यूनिफार्म वितरण के आदेश आए और स्कूलों को बजट भी भेजा गया। स्कूलों में यूनिफार्म वितरण में कई तरह के गोलमाल की शिकायतें सामने आईं।
एक तो बिना यूनिफार्म बांटे ही बजट निकाले जाने की शिकायतें हुईं और फिर कई स्कूलों में दो जोड़ी की जगह एक ही सेट यूनिफार्म दिए जाने का मामला सामने आया। शिकायतों को परखने के लिए बीएसए ने मुजेहना के 10, वजीरगंज व नवाबगंज के 5-5 स्कूलों की औचक जांच कराई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
बीईओ व दो समंवयकों की टीम की जांच में यह मामला सामने आया कि स्कूलों में वास्तविक संख्या से कम छात्रों को यूनिफार्म दिया गया है। इसके बाद विभाग ने अन्य स्कूलों की भी अभिलेखीय पड़ताल कराई तो पता चला कि कई स्कूल ऐसे हैं जहां कम बच्चों को ही यूनिफार्म दिया।
विज्ञापन
जांच में गोलमाल के खुलासे से विभाग में खलबली मची है। अब विभाग हर स्कूल की जांच करा रही है। बीएसए ने सभी बीईओ से पूरी रिपोर्ट तलब की है। 2232 प्राइमरी और 898 जूनियर हाईस्कूलों में वितरण और बजट के खर्च का ब्योरा मांगा गया है।
उपभोग देने में आनाकानी करता रहा है स्कूल प्रबंधन
यूनिफार्म वितरण के बजट का उपभोग का ब्योरा देने में ही स्कूल प्रबंधन आनाकानी करता रहा है। कई बार कार्रवाई की चेतावनी के बाद उपभोग आए भी हैं तो वास्तविक स्थिति से भिन्नता मिल रही है।
12.50 करोड़ के खर्च का हिसाब लेने के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों को भी जिम्मेदारी दी गई लेकिन उनके स्तर से कोई कार्रवाई न हो पाई। औचक जांच में हुए खुलासे के बाद विभाग उपभोग प्रपत्रों के साथ ही वितरण के लिए अपनाई गई प्रक्रिया की भी छानबीन कर रही है।
जिन 20 स्कूलों की जांच कराई गई हैं वहां वितरण में बहुत गड़बड़ी मिली है। कम छात्रों को यूनिफार्म दिए जाने का मामला सामने आया है। यह गंभीर मामला है और वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है।
-डा. रमेश चन्द्र चौबे, सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी
इनसेट
यूनिफार्म वितरण में गड़बड़ी के मामले की जांच कराई जा रही है। सभी बीईओ से रिपोर्ट ली जा रही है। वितरण में गड़बड़ी पर कार्रवाई की जाएगी।
रमाकांत वर्मा, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
गोंडा। बेसिक शिक्षा विभाग ने परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को यूनिफार्म वितरण के लिए साढ़े बारह करोड़ रुपये का बजट जारी किया था। जिसमें यूनिफार्म वितरण में विद्यालयों के प्रबंधन ने गोलमाल किया।
इसका खुलासा विभाग की ओर से जांच में हुआ है। यूनिफार्म वितरण के बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने 20 स्कूलों की जांच टीम बनाकर की।
जांच खुलासा हुआ कि सिर्फ एक तिहाई बच्चों को ड्रेस देकर बाकी पैसा निकाल लिया गया। अब विभाग सभी 3130 परिषदीय स्कूलों की जांच के निर्देश दिए हैं।
16 खंड शिक्षा अधिकारियों से यूनिफार्म वितरण की जांच रिपोर्ट मांगी गई है।
प्राइमरी व जूनियर हाईस्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को दो जोड़ी यूनिफार्म देने के लिए सरकार प्रति छात्र दो सौ रुपये का बजट देती है।
इस बार भी यूनिफार्म वितरण के आदेश आए और स्कूलों को बजट भी भेजा गया। स्कूलों में यूनिफार्म वितरण में कई तरह के गोलमाल की शिकायतें सामने आईं।
एक तो बिना यूनिफार्म बांटे ही बजट निकाले जाने की शिकायतें हुईं और फिर कई स्कूलों में दो जोड़ी की जगह एक ही सेट यूनिफार्म दिए जाने का मामला सामने आया। शिकायतों को परखने के लिए बीएसए ने मुजेहना के 10, वजीरगंज व नवाबगंज के 5-5 स्कूलों की औचक जांच कराई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
विज्ञापन
बीईओ व दो समंवयकों की टीम की जांच में यह मामला सामने आया कि स्कूलों में वास्तविक संख्या से कम छात्रों को यूनिफार्म दिया गया है। इसके बाद विभाग ने अन्य स्कूलों की भी अभिलेखीय पड़ताल कराई तो पता चला कि कई स्कूल ऐसे हैं जहां कम बच्चों को ही यूनिफार्म दिया।
विज्ञापन
जांच में गोलमाल के खुलासे से विभाग में खलबली मची है। अब विभाग हर स्कूल की जांच करा रही है। बीएसए ने सभी बीईओ से पूरी रिपोर्ट तलब की है। 2232 प्राइमरी और 898 जूनियर हाईस्कूलों में वितरण और बजट के खर्च का ब्योरा मांगा गया है।
उपभोग देने में आनाकानी करता रहा है स्कूल प्रबंधन
यूनिफार्म वितरण के बजट का उपभोग का ब्योरा देने में ही स्कूल प्रबंधन आनाकानी करता रहा है। कई बार कार्रवाई की चेतावनी के बाद उपभोग आए भी हैं तो वास्तविक स्थिति से भिन्नता मिल रही है।
12.50 करोड़ के खर्च का हिसाब लेने के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों को भी जिम्मेदारी दी गई लेकिन उनके स्तर से कोई कार्रवाई न हो पाई। औचक जांच में हुए खुलासे के बाद विभाग उपभोग प्रपत्रों के साथ ही वितरण के लिए अपनाई गई प्रक्रिया की भी छानबीन कर रही है।
जिन 20 स्कूलों की जांच कराई गई हैं वहां वितरण में बहुत गड़बड़ी मिली है। कम छात्रों को यूनिफार्म दिए जाने का मामला सामने आया है। यह गंभीर मामला है और वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है।
-डा. रमेश चन्द्र चौबे, सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी
इनसेट
यूनिफार्म वितरण में गड़बड़ी के मामले की जांच कराई जा रही है। सभी बीईओ से रिपोर्ट ली जा रही है। वितरण में गड़बड़ी पर कार्रवाई की जाएगी।
रमाकांत वर्मा, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी