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छह गांवों के 40 मजरे बाढ़ के पानी से घिरे
Updated Fri, 01 Sep 2017 09:47 PM IST
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अब भी 40 गांव बाढ़ के पानी से घिरे
पानी कम होने से मुश्किलों में नहीं आई कमी
अमर उजाला ब्यूरो
करनैलगंज(गोंडा)। बाढ़ का पानी तेजी से घट रहा है। बावजूद उसके अभी करीब 40 गांव बाढ़ के पानी से घिरे हैं। अधिकांश गांवों में कीचड़, दलदल और गांव के बाहर पानी भरा होने से परेशानी उठानी पड़ रही है।
क्षेत्र को लोग अब बाढ़ विभीषिका से छुटकारा पाने लगे हैं। तेजी के साथ वापस हुए बाढ़ के पानी ने पीड़ितों के लिए आक्सीजन का काम किया है। उनके पास अब आवश्यक सभी वस्तुएं खत्म हो चुकी थी। डेढ़ माह पूर्व दस किलो आंटा, पांच किलो चावल, दो किलो दाल, एक किलो नमक, मोमबत्ती माचिस व दो साबुन देकर प्रशासन ने अपना पल्ला झाड़ लिया था। वह जरूरत मंद लोगों को राहत सामाग्री न देकर पूरे क्षेत्र के पीड़ितों को एक-एक बार की राहत सामाग्री मुहैया कराने में लगा था। जहां महीनो से बाढ़ का पानी टिका था, अब वहां से भी वापस नदी की तरफ रूख कर चुका है। यही हाल रहा तो अगले सप्ताह तक बाढ़ समाप्त हो सकती है। यदि बैराजों से दोबारा पानी छोड़ा गया तो बाढ़ का संकट फिर करनैलगंज में गहरा सकता है। जल स्तर कम होने से नदी में मशीना लगना आम बात है। इससे बांध को लगातार खतरा बना हुआ है। प्रतिदिन बांध का कुछ हिस्सा नदी में समाता रहा। और सिंचाई विभाग के अधिकारी उसे रोंक पाने में पूरी तरह विफ ल साबित हुए। अवर अभियंता एमके सिंह ने बताया कि बांध पर दबाव अभी भी बना हुआ है। लेकिन बांध पर आसपास कहीं भी कटान नहीं हो रही है।
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पानी कम होने से मुश्किलों में नहीं आई कमी
अमर उजाला ब्यूरो
करनैलगंज(गोंडा)। बाढ़ का पानी तेजी से घट रहा है। बावजूद उसके अभी करीब 40 गांव बाढ़ के पानी से घिरे हैं। अधिकांश गांवों में कीचड़, दलदल और गांव के बाहर पानी भरा होने से परेशानी उठानी पड़ रही है।
क्षेत्र को लोग अब बाढ़ विभीषिका से छुटकारा पाने लगे हैं। तेजी के साथ वापस हुए बाढ़ के पानी ने पीड़ितों के लिए आक्सीजन का काम किया है। उनके पास अब आवश्यक सभी वस्तुएं खत्म हो चुकी थी। डेढ़ माह पूर्व दस किलो आंटा, पांच किलो चावल, दो किलो दाल, एक किलो नमक, मोमबत्ती माचिस व दो साबुन देकर प्रशासन ने अपना पल्ला झाड़ लिया था। वह जरूरत मंद लोगों को राहत सामाग्री न देकर पूरे क्षेत्र के पीड़ितों को एक-एक बार की राहत सामाग्री मुहैया कराने में लगा था। जहां महीनो से बाढ़ का पानी टिका था, अब वहां से भी वापस नदी की तरफ रूख कर चुका है। यही हाल रहा तो अगले सप्ताह तक बाढ़ समाप्त हो सकती है। यदि बैराजों से दोबारा पानी छोड़ा गया तो बाढ़ का संकट फिर करनैलगंज में गहरा सकता है। जल स्तर कम होने से नदी में मशीना लगना आम बात है। इससे बांध को लगातार खतरा बना हुआ है। प्रतिदिन बांध का कुछ हिस्सा नदी में समाता रहा। और सिंचाई विभाग के अधिकारी उसे रोंक पाने में पूरी तरह विफ ल साबित हुए। अवर अभियंता एमके सिंह ने बताया कि बांध पर दबाव अभी भी बना हुआ है। लेकिन बांध पर आसपास कहीं भी कटान नहीं हो रही है।
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