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शिव शंकर को जिसने पूजा उसका ही उद्धार हुआ...
Updated Mon, 31 Jul 2017 09:18 PM IST
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शिव शंकर को जिसने पूजा उसका ही कल्याण हुआ...
सावन के चौथे सोमवार पर उमड़े श्रद्धालु
गोंडा। सावन माह के चौथे सोमवार पर शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भोर से ही श्रद्धालु मंदिरों पहुुंच गए जहां हर-हर महादेव के जयकारे लगाते हुए अवढ्रदानी का जलाभिषेक कर मंगल कामनाएं की।
सावन माह के चौथे सोमवार पर भोर से ही शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लग गया। हर-हर महादेव के जयकारों की गूंज के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान आशुतोष अवढऱदानी का जलाभिषेक कर अपने परिवार व रिश्तेदारों के लिए मंगलकामनाएं की। मंदिरों के अगल -बगल स्थित दुकानों से श्रद्धालुओं ने दूध, बेलपत्र, पुष्प, शमी, भाँग, धतूर लेकर जलाभिषेक किया। वहीं कई श्रद्धालुओं ने विद्वानों के द्वारा विधिवत पूजन-अर्चन कर मनवांछित फल की कामना की। जलाभिषेक देर सायं तक चलता रहा। तमाम महिलाओं और पुरुषों ने व्रत रखकर शाम को भी धूप,दीप और नैवेद्य अर्पित किये। जिले के मनकापुर स्थित करोहानाथ, करनैलगंज स्थित बरखंडीनाथ, वजीरगंज स्थित बाबा बालेश्वरनाथ सहित अन्य प्रसिद्ध शिव मंदिरों पर भी दिन भर तांता लगा रहा।
जलाभिषेक को नेपाल से भी पहुंचे श्रद्धालु
खरगूपुर(गोंडा)। पौराणिक पृथ्वीनाथ मंदिर पर सावन के चौथे सोमवार को नेपाल सहित अन्य देशों से भी श्रद्धालु जलाभिषेक करने पहुंचे। खरगूपुर स्थित पृथ्वीनाथ मंदिर का विशाल लिंग पूरे देश में प्रसिद्ध है जहां जलाभिषेक के लिए नेपाल व बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, बाराबंकी व फैजाबाद से भी श्रद्धालु आते है। बताया जाता है कि एक माह तक चलने वाले श्रावण मास में शिवलिंग की पूजा करने से पृथ्वी पर उपस्थित समस्त देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना हो जाती है। मान्यता है कि शिवलिंग जिस चक्र में स्थित है,वह भी पृथ्वी के जैसा ही वृत्ताकार है। इसीलिए शिवलिंग की पूजा पुरुषोत्तम भगवान राम ने समुन्द्र में रामेश्वर पुल बांधने से पहले की थी। बताया जाता है कि शिवलिंग का संबन्ध भगवान शिव के लिंग से नहीं है, अपितु शिवलिंग में ही सबसे ऊपर ब्रह्मा,बीच में महेश और नीचे भगवान विष्णू हमेशा उपस्थित रहते है। लोगों का मानना है कि जो सच्चे मन से श्रावण मास में शिवलिंग की पूजा-अर्चना करते है, उनकी सर्व मनोकामना पूरी हो जाती है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था में महिला व पुरुष पुलिस बल व पीएसी बल तैनात रही।
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सावन के चौथे सोमवार पर उमड़े श्रद्धालु
गोंडा। सावन माह के चौथे सोमवार पर शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भोर से ही श्रद्धालु मंदिरों पहुुंच गए जहां हर-हर महादेव के जयकारे लगाते हुए अवढ्रदानी का जलाभिषेक कर मंगल कामनाएं की।
सावन माह के चौथे सोमवार पर भोर से ही शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लग गया। हर-हर महादेव के जयकारों की गूंज के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान आशुतोष अवढऱदानी का जलाभिषेक कर अपने परिवार व रिश्तेदारों के लिए मंगलकामनाएं की। मंदिरों के अगल -बगल स्थित दुकानों से श्रद्धालुओं ने दूध, बेलपत्र, पुष्प, शमी, भाँग, धतूर लेकर जलाभिषेक किया। वहीं कई श्रद्धालुओं ने विद्वानों के द्वारा विधिवत पूजन-अर्चन कर मनवांछित फल की कामना की। जलाभिषेक देर सायं तक चलता रहा। तमाम महिलाओं और पुरुषों ने व्रत रखकर शाम को भी धूप,दीप और नैवेद्य अर्पित किये। जिले के मनकापुर स्थित करोहानाथ, करनैलगंज स्थित बरखंडीनाथ, वजीरगंज स्थित बाबा बालेश्वरनाथ सहित अन्य प्रसिद्ध शिव मंदिरों पर भी दिन भर तांता लगा रहा।
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जलाभिषेक को नेपाल से भी पहुंचे श्रद्धालु
खरगूपुर(गोंडा)। पौराणिक पृथ्वीनाथ मंदिर पर सावन के चौथे सोमवार को नेपाल सहित अन्य देशों से भी श्रद्धालु जलाभिषेक करने पहुंचे। खरगूपुर स्थित पृथ्वीनाथ मंदिर का विशाल लिंग पूरे देश में प्रसिद्ध है जहां जलाभिषेक के लिए नेपाल व बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, बाराबंकी व फैजाबाद से भी श्रद्धालु आते है। बताया जाता है कि एक माह तक चलने वाले श्रावण मास में शिवलिंग की पूजा करने से पृथ्वी पर उपस्थित समस्त देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना हो जाती है। मान्यता है कि शिवलिंग जिस चक्र में स्थित है,वह भी पृथ्वी के जैसा ही वृत्ताकार है। इसीलिए शिवलिंग की पूजा पुरुषोत्तम भगवान राम ने समुन्द्र में रामेश्वर पुल बांधने से पहले की थी। बताया जाता है कि शिवलिंग का संबन्ध भगवान शिव के लिंग से नहीं है, अपितु शिवलिंग में ही सबसे ऊपर ब्रह्मा,बीच में महेश और नीचे भगवान विष्णू हमेशा उपस्थित रहते है। लोगों का मानना है कि जो सच्चे मन से श्रावण मास में शिवलिंग की पूजा-अर्चना करते है, उनकी सर्व मनोकामना पूरी हो जाती है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था में महिला व पुरुष पुलिस बल व पीएसी बल तैनात रही।
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